मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का बड़ा खतरा। 2 महीने में 6 बाघों की मौत के बाद किसली रेंज में एक और बाघ का असामान्य व्यवहार, मुक्की सेंटर में इलाज जारी।

मंडला/भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के खूबसूरत और शांत जंगलों में इन दिनों एक अदृश्य और बेहद खतरनाक संकट मंडरा रहा है। यह संकट है—कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV)। हाल ही में कान्हा के किसली रेंज में एक बाघ का बेहद असामान्य व्यवहार देखने को मिला है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग की रातों की नींद उड़ा दी है। पिछले दो महीनों में इस घातक वायरस के कारण कान्हा में 6 बाघों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस खतरे पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो यह महामारी देश के अन्य टाइगर रिजर्व्स में भी फैल सकती है।
यह पूरा मामला कान्हा टाइगर रिजर्व की किसली रेंज के संदूकखोल क्षेत्र का है। सफारी पर निकले पर्यटकों ने एक बाघ को बेहद दयनीय और अजीब स्थिति में देखा। बाघ बार-बार एक ही जगह गोल-गोल चक्कर लगा रहा था, अचानक तेजी से इधर-उधर भागने लगता और वह शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और थका हुआ नजर आ रहा था।
आमतौर पर बाघ ऐसा व्यवहार तभी करते हैं जब उनके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर किसी वायरस का हमला हुआ हो। पर्यटकों द्वारा इसकी सूचना तुरंत पार्क प्रबंधन को दी गई।
शुरुआती तौर पर वन अधिकारियों ने माना कि यह भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन का असर हो सकता है। लेकिन जब लगातार निगरानी के बाद भी बाघ की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वन्यजीव डॉक्टरों की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
वर्तमान स्थिति: संक्रमित बाघ को मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में रखकर उसका सघन उपचार किया जा रहा है।
जांच प्रक्रिया: बाघ के ब्लड और अन्य जैविक नमूने (Biological Samples) जांच के लिए जबलपुर स्थित 'स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ' भेजे गए हैं। हालांकि रिपोर्ट आना अभी बाकी है, लेकिन लक्षण पूरी तरह से कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की ओर ही इशारा कर रहे हैं।
कान्हा का जंगल पिछले दो महीनों में आठ बाघों की मौत का गवाह बन चुका है, जिनमें से छह मौतों की पुष्टि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई है। इसमें सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली घटना अमाही क्षेत्र की बाघिन टी-141 और उसके चार मासूम शावकों की थी। वायरस ने देखते ही देखते इस पूरे बाघ परिवार को खत्म कर दिया। इसके कुछ ही समय बाद, महावीर बाघ (टी-220) भी इसी जानलेवा संक्रमण का शिकार होकर दम तोड़ बैठा।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV)? यह एक संक्रामक और घातक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से कुत्तों से जंगली जानवरों (जैसे बाघ, तेंदुए, सियार) में फैलती है। यह वायरस जानवर के श्वसन, भोजन तंत्र और सीधे दिमाग पर हमला करता है, जिससे जानवर अपना मानसिक संतुलन खोने लगता है और उसकी मौत हो जाती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कान्हा में हो रही ये मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह भारत के बाघ संरक्षण (Tiger Conservation) के प्रयासों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित आवारा कुत्ते जब नेशनल पार्क की सीमाओं के आसपास घूमते हैं, तो वन्यजीवों में यह संक्रमण आसानी से फैल जाता है। यदि समय रहते बफर जोन के गांवों में रहने वाले पालतू व आवारा कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण नहीं किया गया, तो यह वायरस देश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
यह भी पढ़ें..

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में सरकारी सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी सेंटर भेजे जाने के आरोप लगे हैं। मामले ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।
रीवा में पुरी धाम की परंपरा अनुसार भगवान जगन्नाथ को दिव्य औषधि अर्पित की गई। उपचार पूर्ण होने के बाद 16 जुलाई को भगवान रथ यात्रा के माध्यम से नगर भ्रमण कर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
सतना के पोड़ी पतौरा-धवारी मार्ग की जर्जर हालत से पचास से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीण परेशान हैं। बरसात में गड्ढों और कीचड़ के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि सड़क निर्माण की मांग वर्षों से अधूरी है।
कोठी क्षेत्र के रामपुरा गांव में लकवाग्रस्त बुजुर्ग महिला को खाट पर अस्पताल ले जाने का वीडियो वायरल हुआ। ग्रामीणों ने बदहाल सड़क को जिम्मेदार बताया, जबकि प्रशासन ने खबर को भ्रामक बताते हुए अपना पक्ष रखा।
सतना में पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक के चेक तकनीकी कारणों से क्लियर नहीं हो रहे हैं। भुगतान अटकने से खाताधारकों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि विभाग से स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिला।
सतना में नर्मदा जल पहुंचाने की परियोजना को लेकर अक्टूबर-नवंबर 2026 की नई समयसीमा सामने आई है। वर्षों से मिलती तारीखों के बीच टनल निर्माण अंतिम चरण में है, लेकिन लोगों का भरोसा अभी भी अधूरा है।
नागौद से गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाई गई प्रसूता की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने समय पर आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए जाने का दावा किया।
सतना और मैहर में 5वीं-8वीं बोर्ड सेकंड चांस परीक्षा के बाद भी आठ हजार से अधिक छात्र असफल रहे। परिणामों ने स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और बुनियादी शिक्षा की गंभीर खामियां उजागर कर दीं।
मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव के बीच दतिया की सियासत में उस वक्त भूचाल आ गया, जब कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से नाराज चल रहे वरिष्ठ नेता अवधेश नायक से मिलने खुद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी उनके घर पहुंच गए। बीती देर रात हुई इस मुलाकात ने दतिया के सियासत में सुगबुगाहट तेज कर दी है।
मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में बड़ी राहत मिली है। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने उनके जाति प्रमाण पत्र को सही पाते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी है।