अमेरिका-इजरायल और ईरान तनाव के कारण भारत में एलपीजी सप्लाई प्रभावित। यूपी और पंजाब में लाइन में लगे बुजुर्गों की मौत। गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी जारी।
By: Ajay Tiwari
Mar 14, 20264:59 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध (अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान) का सीधा असर अब भारत के आम जनजीवन पर दिखने लगा है। कच्चे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने से देशभर में एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत पैदा हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि सिलेंडर के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े दो बुजुर्गों ने दम तोड़ दिया है, वहीं कई राज्यों में पुलिस की मौजूदगी में गैस का वितरण किया जा रहा है।
गैस सिलेंडर पाने की जद्दोजहद जानलेवा साबित हो रही है। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में 76 वर्षीय मोहम्मद मुख्तियार शुक्रवार सुबह 6:30 बजे से लाइन में लगे थे। अचानक तबीयत बिगड़ने और गिरने के बाद अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। पंजाब के बरनाला के गांव शैहना में 66 वर्षीय भूषण कुमार मित्तल की भी सिलेंडर की लाइन में खड़े रहने के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश: भोपाल, इंदौर और सिद्धार्थनगर जैसे शहरों में रात-रात भर लोग एजेंसियों के बाहर डेरा डाले हुए हैं। छिंदवाड़ा में विवाद की स्थिति को देखते हुए पुलिस के साये में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़: रायपुर और बिलासपुर में सर्वर ठप होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने से रेस्टोरेंट्स में 10% सरचार्ज वसूला जा रहा है और कई जगह लकड़ी के चूल्हों पर खाना बन रहा है।
राजस्थान और बिहार: यहां लकड़ी और कोयले की मांग में अचानक उछाल आया है क्योंकि घरेलू और कमर्शियल दोनों ही सिलेंडर बाजार से गायब हैं।
संकट का फायदा उठाकर जमाखोर सक्रिय हो गए हैं। ₹2000 का कॉमर्शियल सिलेंडर ₹4000 तक में बेचा जा रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यूपी, एमपी, कर्नाटक और तमिलनाडु में गैस गोदामों पर छापेमारी शुरू कर दी है ताकि अवैध भंडारण को रोका जा सके।
मध्य प्रदेश में करीब 50 हजार से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट संकट में हैं। कई जगहों पर केवल 24 से 48 घंटे का स्टॉक बचा है। विकल्प के तौर पर लोग इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन लागत बढ़ने से आम आदमी की थाली महंगी हो गई है।