मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार 2026 की नई तबादला नीति लाने की तैयारी में है। मई से तबादलों पर लगी रोक हट सकती है। जानें 10% की सीमा और प्रभारी मंत्रियों की नई भूमिका के बारे में

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों का इंतज़ार जल्द ही खत्म होने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कहने पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) वर्ष 2026 की नई तबादला नीति का ड्राफ्ट तैयार करने में जुट गया है। इस नई नीति को अप्रैल के अंत तक कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है, जिसके बाद प्रदेश में लंबे समय से तबादलों पर लगी रोक को एक निश्चित अवधि के लिए हटा दिया जाएगा।
राज्य सरकार हर साल की तरह इस बार भी तबादलों पर लगी रोक को एक सीमित विंडो के लिए खोलने जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मई की शुरुआत से लगभग एक महीने के लिए तबादलों का दौर शुरू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकेतों के बाद विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। माना जा रहा है कि कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही जिलों और राज्य स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो और तबादलों में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए सरकार ने एक सख्त सीमा तय की है। प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, किसी भी विभाग में उसके कुल कैडर स्ट्रेंथ के 10 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकेंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि विभागों में जनशक्ति का संतुलन बना रहे और केवल आवश्यक होने पर ही फेरबदल किया जाए। इससे 'तबादला उद्योग' जैसे आरोपों पर भी लगाम लगेगी।
इस बार की नीति में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव प्रभारी मंत्रियों के अधिकारों को लेकर होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रभारी मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों में तबादलों की सूची को अंतिम रूप देने के व्यापक अधिकार दिए जा सकते हैं। मंत्रियों की स्वीकृति के बिना तबादला सूचियों को अंतिम नहीं माना जाएगा। इस कदम का उद्देश्य जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाना है, जिससे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांगों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बना रहे।
नई नीति में छोटे संवर्ग के कर्मचारियों (तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी) के लिए प्रक्रिया को सरल और स्थानीय बनाने का प्रयास किया गया है। इन कर्मचारियों के तबादले के प्रस्ताव सबसे पहले जिला कलेक्टर स्तर पर तैयार किए जाएंगे। कलेक्टर की सिफारिश के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर की समस्याओं और कर्मचारी की पारिवारिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
पिछले साल प्रदेश में अपेक्षाकृत कम तबादले हुए थे, जिसके कारण कई अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठकों में तबादलों से प्रतिबंध हटाने की पुरजोर मांग की थी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो पारिवारिक या स्वास्थ्य कारणों से अपना स्थानांतरण चाहते हैं।

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