दमोह। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर आई है। जिले में पूरी हुई गिद्ध गणना के परिणाम सामने आ गए हैं, जिसमें कुल 423 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन मंडल दमोह द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत रिपोर्ट में स्थानीय (देशी) प्रजातियों के साथ-साथ प्रवासी गिद्ध भी नजर आए हैं।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और पन्ना बफर जोन का दिखा असर
दमोह के वन मंडलाधिकारी (DFO) ईश्वर जरांडे ने बताया कि यह विशेष गणना 22 मई से 24 मई 2026 के बीच जिले के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में आयोजित की गई थी। इस दौरान न केवल गिद्धों की संख्या गिनी गई, बल्कि उनकी प्रजातियों और उम्र (वयस्क एवं अवयस्क) का भी पूरा डेटा तैयार किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दमोह जिले का सिंग्रामपुर क्षेत्र 'वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व' से सटा हुआ है, जबकि हटा-मडियादो का इलाका 'पन्ना टाइगर रिजर्व' के बफर जोन से जुड़ता है। इन संरक्षित क्षेत्रों की नजदीकी के कारण यहाँ वन्यजीवों की विविधता काफी समृद्ध है, जिसका सीधा सकारात्मक असर गिद्धों की आबादी पर भी देखने को मिला है।
वन विभाग के आंकड़े: किस रेंज में मिले कितने गिद्ध?
गणना के अनुसार, जिले में कुल 378 वयस्क (Adult) और 45 अवयस्क (Juvenile) गिद्ध पाए गए हैं। वन विभाग द्वारा रेंज-वार जारी किए गए आंकड़े इस प्रकार हैं:
| वन परिक्षेत्र (Range) | अवयस्क (Juvenile) | वयस्क (Adult) | कुल संख्या (Total) |
|---|---|---|---|
| दमोह रेंज | 0 | 143 | 143 |
| हटा रेंज | 29 | 112 | 141 |
| तेजगढ़ रेंज | 16 | 76 | 92 |
| तेंदूखेड़ा रेंज | 0 | 35 | 35 |
| झलोन रेंज | 0 | 8 | 8 |
| सिंग्रामपुर रेंज | 0 | 4 | 4 |
| सगौनी और तारादेही | 0 | 0 | 0 |
| कुल योग | 45 | 378 | 423 |
दमोह के आसमान में दिखीं गिद्धों की ये दुर्लभ प्रजातियां
इस बार की गणना में प्रजातियों की अद्भुत विविधता देखने को मिली है, जो यहाँ के बेहतरीन इकोसिस्टम की ओर इशारा करती है। दमोह के जंगलों में पाई गई प्रमुख प्रजातियों में शामिल हैं:
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देशी गिद्ध (White-backed Vulture)
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सफेद गिद्ध (Egyptian Vulture)
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काला गिद्ध (Cinereous Vulture)
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यूरेशियन ग्रिफन (Eurasian Vulture)
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इंडियन लॉन्ग बिल्ड गिद्ध (Indian Long-billed Vulture)
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राज गिद्ध (King Vulture / Red-headed Vulture)
पर्यावरण के 'कुदरती सफाईकर्मी' क्यों हैं जरूरी?
गिद्धों को प्रकृति का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सफाईकर्मी माना जाता है। ये मृत पशुओं के शवों को खाकर पर्यावरण को साफ रखते हैं, जिससे जंगलों और आस-पास के इलाकों में घातक संक्रमण और महामारियां नहीं फैलतीं। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, गिद्धों की अच्छी आबादी होने से रेबीज और एंथ्रेक्स जैसी संक्रामक बीमारियों के प्रसार पर प्रभावी रोक लगती है।
मानसून से पहले हुई गणना का क्या है महत्व?
वन विभाग के अनुसार, मानसून की शुरुआत से ठीक पहले की जाने वाली यह गणना बेहद खास होती है। इससे गिद्धों के वर्तमान आवास, उनकी गतिविधियों और उनके प्रजनन (Breeding) की स्थिति को समझने में मदद मिलती है। मौसम के बदलाव और मानवीय दखल का इनकी आबादी पर गहरा असर पड़ता है। डीएफओ ईश्वर जरांडे ने कहा कि दमोह में फिलहाल गिद्धों की स्थिति संतोषजनक और सुखद है, लेकिन इनके दीर्घकालिक संरक्षण के लिए लगातार मॉनिटरिंग और जन-जागरूकता अभियान चलाए जाते रहेंगे।























