विंध्य में कांग्रेस के ‘मैहर मंथन’ से जातीय भागीदारी, टिकट वितरण और संगठनात्मक संतुलन पर नई बहस शुरू।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
विधानसभा चुनाव को अभी भले ही डेढ़ साल से ज्यादा का समय बकाया हो लेकिन राजनीति की चौसर अभी से सजने लगी है। राजनीतिक खिलाड़ी अपने मोहरे फिट करने में लग गए हैं। कोई अपने लिए जमीन तलाशने में लग गया है तो कोई जनता के बीच और पार्टी में अपनी सक्रियता बढ़ाने में व्यस्त है। इन सबके बीच कांग्रेस के ‘मैहर मंथन’ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस सम्मेलन में एक प्रस्ताव पास किया गया कि खासतौर पर विंध्य के लिए कि जिसकी जितनी संख्या उसकी संगठन और चुनावों में उतनी भागेदारी होनी चाहिए। विधानसभा चुनाव के लगभग डेढ़ साल पहले विंध्य के कांग्रेस के ब्राम्हण नेताओं द्वारा पारित इस प्रस्ताव ने राजनीतिक हल्कों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। इस प्रस्ताव को राजनीति के जानकार अपने-अपने हिसाब से देख रहे हैं। इन्हीं जानकारों की माने तो सम्मेलन में शामिल कुछ नेता अपनी विधानसभा टिकट की तैयारी की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। बहरहाल, ‘मैहर मंथन’ में पारित प्रस्ताव के पर्दे के पीछे की कहानी जो भी हो लेकिन कांग्रेस से जुड़े ब्राम्हण नेताओं की इस मांग ने मुख्य विपक्षी दल के अंदर खाने में तो हलचलें मचा ही दी हैं। साथ ही सत्तारूढ़ दल भाजपा भी इसके साइड इफे क्ट को लेकर सशंकित नजर आ रही है।
वैसे यदि विंध्य के राजनीतिक पृष्ठभूमि के हिसाब से कांग्रेस के ब्राम्हण नेताओं के प्रस्ताव को देखें तो रीवा- शहडोल संभाग में सात जिले आते हैं, जिनमें तीस विधानसभा और चार लोकसभा सीटें हैं। यदि विधानसभा सीटों की बात करें तो 30 में से 12 सीटें आरक्षित हैं। जबकि 18 सीटें अनारक्षित हैं। इन्हीं 18 सीटों में से 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पांच ब्राम्हणों को टिकट दी थी, जिसमें से सिर्फ एक को विजय मिली थी।
कांग्रेस ने सतना जिला की चित्रकूट विधानसभा में नीलांशु चतुर्वेदी और रामपुर बाघेलान में रामशंकर पयासी पर दांव लगाया था। दोनों सीटोें पर पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा था। इसी तरह रीवा जिले की रीवा विधानसभा सीट से इंजीनियर राजेन्द्र शर्मा और सेमरिया विधानसभा से अभय मिश्रा पर भरोसा जताया था। इसमें पार्टी को सेमरिया में विजय मिली थी। इसी तरह मऊगंज जिले की देवतालाब विधानसभा सीट से पदमेश गौतम को अपना उम्मीदवार बनाया था, यहां भी पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा।
हाशिए पर ब्राम्हण नेतृत्व
वैसे देखा जाए तो विंध्य में कांग्रेस की राजनीति पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के इर्द-गिर्द घूमा करती थी लेकिन कांग्रेस में आज टिकट वितरण हो या संगठन के पदीय दायित्व-हर जगह ब्राम्हण नेतृत्व दरकिनार और उपेक्षित नजर आ रहा है। शायद यही वजह है कि आज पार्टी के अंदर से जितनी संख्या उतनी हिस्सेदारी की बात निकलकर सामने आ रही है। यह पहला अवसर नहीं है। जब कांग्रेस के अंदर इस तरह की बातें हुई हैं। इससे पहले जब पार्टी के शहर व ग्रामीण अध्यक्षों की घोषणा की गई थी, उस समय भी रीवा में एक बैठक कर इसी तरह की हिस्सेदारी का प्रस्ताव पारित किया गया था।
क्यों मिल रही पराजय इस पर भी मंथन
मैहर में आयोजित सम्मेलन जिसमें समूचे विंध्य के कांग्रेसी ब्राम्हण मौजूद थे, सभी सत्ता और संगठन में भागेदारी के हिसाब से हिस्सेदारी तो मांगी ही साथ ही विंध्य में चुनाव -दर- चुनाव कमजोर होती कांग्रेस की कमजोरी का मंथन किया। गौरतलब है कि कभी विंध्य को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। स्व. कुंवर अर्जुन सिंह एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी के दौर में विंध्य में कांग्रेस का स्वर्णिम कार्यकाल था, लेकिन आज वही कांग्रेस विंध्य में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही।
चार लोकसभा, एक टिकट
विंध्य में सतना, रीवा, सीधी और शहडोल चार लोकसभा सीटें हैं। इनमें से एक सीट आरक्षित जबकि तीन सीटें अनारक्षित हैं। तीन अनारक्षित सीटोें में कांग्रेस ने 2024 के चुनाव में दो पर ओबीसी उम्मीदवार उतारे थे, जबकि एक सीट रीवा में पार्टी ने पूर्व विधायक नीलम मिश्रा पर भरोसा जताया था, लेकिन उन्हें भी पराजय का सामना करना पड़ा था। सतना में विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा, सीधी में पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल व एसटी के लिए आरक्षित शहडोल सीट पर प्रमिला सिंह को चुनावी समर में उतारा था।
9 जिले, 12 अध्यक्ष, सिर्फ 1 ब्राम्हण
विंध्य में कांग्रेस के संगठन की बात करें तो यहां के 9 जिलों में शहर और ग्रामीण मिलाकर 12 जिलाध्यक्ष हैं जिसमें से मात्र रीवा में ग्रामीण अध्यक्ष ब्राम्हण (राजेन्द्र शर्मा) हैं। श्री शर्मा इससे पहले भी ग्रामीण अध्यक्ष रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि इससे पहले इन्हीं 9 जिलों में 3 ब्राम्हण अध्यक्ष थे जिनमें सतना में दिलीप मिश्रा, रीवा ग्रामीण में राजेन्द्र शर्मा एवं मऊगंज में संगठन की कमान पदमेश गौतम के पास थी।
विंध्य में कांग्रेस की विचारधारा से ब्राम्हणों को जोड़ने के लिए सम्मेलनों की शुरुआत की गई है। इसी सिलसिले में बीते दिनों मैहर में एक चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से ब्राम्हणों को कांग्रेस के साथ लेकर प्रदेश व देश में पार्टी की सरकार बनाने की दिशा में काम हो रहा है। इसी चिंतन शिविर में जिसकी जितनी भागेदारी उसकी कांग्रेस के सत्ता (टिकट) और संगठन में उतनी हिस्सेदारी का एक प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पास किया गया है।
दिलीप मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी ग्रामीण


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