पं. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज के छात्रों को अस्पताल न खुलने और सुविधाओं के अभाव के कारण ओपीडी कक्षों में मरीजों के बीच खड़े होकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में क्लीनिकल हॉल न मिलने और कॉलेज से 8 किमी दूर अस्पताल तक रोज़ाना 240 छात्रों की आवाजाही ने समस्याओं को और गंभीर बना दिया है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में दो वर्ष पहले खुले पं. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में अस्पताल न खुलने के कारण मेडिकल छात्रों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दो वर्ष बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा बस की व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके अलावा पढ़ाई एवं क्लीनिकल प्रैक्टिकल के लिए जिला अस्पताल आ रहे मेडिकल छात्रों को भी उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जिला अस्पताल प्रबंधन मेडिकल कॉलेज के छात्रों को डिमांसट्रेशन एवं क्लीनिकल प्रैक्टिकल के लिए हॉल तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के छात्र ओपीडी कमरे में खड़े होने को मजबूर दिखे। जहां चिकित्सकों द्वारा मरीजों का इलाज एवं चिकित्सा शिक्षक द्वारा स्टूडेंट की पढ़ाई साथ-साथ कराई जा रही थी। इलाज के लिए आए मरीजों को इस अव्यवस्था के चलते कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। गौरतलब है कि मेडिकल छात्रों के द्वारा हाल ही में विरोध प्रदर्शन कर मांगें रखी गई थीं, इसके बाद रोगी कल्याण समिति की बैठक में मेडिकल छात्रों को क्लीनिकल हॉल मुहैया कराने की सहमति बनी थी।
छात्रों और मरीजों के बीच हुई धक्का- मुक्की
शुक्रवार को जिला अस्पताल के नवीन ओपीडी हाल में बने 8 बाई 8 के ओपीडी चेम्बर में मरीज एवं मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट साथ-साथ दिखे। कई मेडिकल स्टूडेंट बाहर खड़े नजर आए। नए ओपीडी चेम्बर इतने छोटे बनाए गए हैं कि वहां एक साथ कई चिकित्सक साथ नहीं बैठ सकते बावजूद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक शिक्षक एवं जिला अस्पताल के चिकित्सक साथ बैठने को मजबूर दिखे। ओपीडी चेम्बर में मेडिकल कॉलेज के छात्रों के खड़े होने के कारण कई मरीजों को समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। मरीजों एवं छात्रों द्वारा धक्का- मुक्की तक की स्थिति निर्मित हो गई थी। जिसका छात्रों द्वारा कुछ देर तक विरोध किया गया, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई।
240 छात्र कर रहे 8 किमी का सफर
बताया गया कि 2023 एवं 2024 बैच के 240 छात्र वर्तमान में जिला अस्पताल में पढाई के साथ क्लीनिकल पे्रक्टिकल के लिए पहुंच रहे हैं। छात्रों की थ्योरिकल क्लास मेडिकल कॉलेज में सुबह 8 से 10 संचालित होती है, इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक उन्हें क्लीनिकल पै्रक्टिकल एवं डिमांसट्रेशन के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता है। बताया गया कि मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल की दूरी लगभग 8 किमी है, तो कुछ ही मिनट में छात्र कैसे जिला अस्पताल पहुंच सकता है। छात्रों को जिला अस्पताल तक पहुंचने में कम से कम घंटे भर का समय लग जाता है। इसके बाद जिला अस्पताल में डिमांस्टेÑशन हॉल उपलब्ध न होने के कारण कम क्षेत्र वाली जगह में ही मजबूरन पढ़ाई करना पड़ता है। हाल ही में मेडिकल छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद रोगी कल्याण समिति की बैठक में छात्रों की समस्याओं का समाधान किया गया था। छात्रों के लिए जिला अस्पताल में बने मीटिंग हाल के ऊपर खाली पड़े इंडियन रेडक्रास सोसायटी के हॉल को क्लीनिकल स्टूडेंट को देने के लिए सहमति जताई गई थी लेकिन अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है।


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