सीधी जिले को मिनी स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले कई साल बीत चुके हैं, लेकिन सुविधाएं आज भी अधूरी हैं। शहर में प्रस्तावित एक दर्जन यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। नगर पालिका की लापरवाही के कारण न यात्रियों को छांव मिल पा रही है, न बैठने की जगह। शहीद श्यामलाल सिंह तिराहा, सम्राट चौक, ऊंची हवेली और सिंचाई विभाग कार्यालय के पास जैसे प्रमुख स्थानों पर यात्री सड़क पर खड़े होकर बसों और टैक्सियों का इंतजार करने को मजबूर हैं। वहीं सूखा नाला सौंदर्यीकरण सहित कई अन्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक

हाइलाइट्स
सीधी, स्टार समाचार वेब
सीधी शहर को भले ही मिनी स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल चुका है, लेकिन यहां मिनी स्मार्ट सिटी जैसी सुविधाएं अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई हैं। जिला मुख्यालय में आज तक एक भी यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण नहीं हो पाया है। शहर के टैक्सी स्टैंडों एवं चौराहों सहित विभिन्न स्टापेज में यात्रियों को सडक में खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। बैठने एवं छांव की व्यवस्था न होने से महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को काफी परेशानी हो रही है।
मिनी स्मार्ट सिटी के तहत शहर में करीब एक दर्जन यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण होना था लेकिन वो भी नगर पालिका की लापरवाही के भेंट चढ़ गए। मिनी स्मार्ट सिटी मद से शहर के सार्वजनिक स्थलों में यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण किया जाना था, ताकि शहर वासियों को यात्री बस व टैक्सियों के लिए सड़क पर बैठकर इंतजार न करना पड़े। इसके लिए करीब एक दर्जन स्थलों का भी चयन किया जा चुका था, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निर्धारित समय सीमा में नगर पालिका द्वारा स्थान की उपलब्धता नहीं कराये जाने से चिन्हित स्थलों पर यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण नहीं हो पाया। शहर के विभिन्न चौराहों में यात्री वाहनों का इंतजार करने के लिए यात्रियों की भीड़ जुटती है और यात्रियों को घंटों सड़क पर खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे स्थलों व चौराहों में मुख्य रूप से शहीद श्यामलाल सिंह तिराहा, सम्राट चौक, लालता चौक, ऊंची हवेली, कलेक्ट्रेट मार्ग मर्चुरी के पास, पुराने यातायात थाने के पास, सिंचाई विभाग कार्यालय के पास सिंगरौली मार्ग सहित अन्य प्रमुख स्थल शामिल हैं। यहां लगने वाले वाहनों व यात्रियों के जमावड़े से सड़क हादसों का भी खतरा बना रहता है।
स्मार्ट सिटी के और भी कई काम हैं लंबित
उधर मिनी स्मार्ट सिटी के लिए जनप्रतिनिधियों व शहरवासियों ने सूखा नाला के सौंदर्यीकरण पर काफी समय से जोर दे रहे हैं। सूखा नाला के दोनों किनारे पर पीसीसी सड़क व चौपाटी बनाकर फुटपाथी दुकानदारों को जगह उपलब्ध कराई जाए। इससे जहां शहर को वाहनों के भारी दवाब व जाम से निजात मिलेगी। वहीं आमजन को मनोरंजन का स्थल मिल जाएगा। कलेक्ट्रेट मार्ग सूखा नाला पुल से गोपालदास सूखा नाला पुल तक पीसीसी सड़क एवं सौंदर्यीकरण का काम पांच वर्ष पूर्व शुरू किया गया था।
विडंबना ये है कि सडक का निर्माण कार्य तो किसी तरह हुआ लेकिन उसको गोपालदास सूखा नाला मुख्य मार्ग में जोड़ने की जरूरत नहीं समझी गई। जिसके चलते यह मार्ग आवागमन के रूप में अभी तक समुचित तरीके से शुरू नहीं हो सका है। इस मामले में जिम्मेदार पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। तीन वर्षों से नागरिक इंतजार कर रहे हैं कि गोपालदास सूखा नाला के मुख्य मार्ग से सूखा नाला तट पर बनाए गए पीसीसी सडक को जोड़ दिया जाए। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं है। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से शांत बने हुए हैं। सूखा नाला के शेष हिस्सों में अतिक्रमण हटाकर पीसीसी सड़क का निर्माण कब किया जाएगा इसको लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक तौर पर नहीं दी जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह काम ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।


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