प्रदेश में मनरेगा मजदूरी के 100 करोड़ से अधिक बकाया, विंध्य के जिलों में करोड़ों अटके, होली से पहले ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत मजदूरों का हजारों लाख रुपये का भुगतान लंबित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश स्तर पर अकुशल मजदूरी के 7219 लाख रुपये तथा कुशल मजदूरी के 3258 लाख रुपये का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। यह तब है जब होली को गिनती के दिन बचे हुए हैं।
जिला स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। सतना-मैहर जिले में अकुशल मजदूरी के 133 लाख रुपये और कुशल मजदूरी के 15 लाख रुपये बकाया हैं। सीधी जिले में अकुशल मजदूरी 92.15 लाख रुपये तथा कुशल मजदूरी 7.65 लाख रुपये लंबित है। रीवा-मऊगंज में अकुशल मजदूरी 445.56 लाख रुपये और कुशल मजदूरी 8.58 लाख रुपये अटकी हुई है। सिंगरौली में अकुशल मजदूरी 102.98 लाख रुपये तथा कुशल मजदूरी 37.53 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भुगतान संकट व्यापक और बहुस्तरीय है। होली जैसे प्रमुख त्यौहार से ठीक पहले यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है। ग्रामीण परिवार त्यौहार पर आवश्यक खरीदारी और पारिवारिक जरूरतों के लिए इसी मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। भुगतान न मिलने से बाजार भी ग्राहकी भी फीकी है।
सतना-मैहर की जनपदों का हाल
सतना और मैहर की आठ जनपद पंचायतों में अकुशल और कुशल मजदूरी मिलाकर करीब 135 लाख रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। इससे हजारों मजदूर परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सबसे ज्यादा बकाया मझगवां में है, जहां अकुशल मजदूरी के 43.18 लाख और कुशल मजदूरी के 1.29 लाख रुपये अटके हैं। अमरपाटन में अकुशल 32.3 लाख और कुशल 0.21 लाख लंबित हैं। रामपुर बघेलान में अकुशल 24.68 लाख और कुशल 1.16 लाख का भुगतान बाकी है। सतना जनपद में अकुशल 15.39 लाख और कुशल 1.29 लाख रुपये अटके हैं, जबकि उचेहरा में अकुशल 7.8 लाख और कुशल 1.1 लाख लंबित हैं। मैहर में अकुशल 5.2 लाख और कुशल 1.44 लाख, नागौद में अकुशल 3.46 लाख और कुशल 5.72 लाख, तथा रामनगर में अकुशल 0.93 लाख और कुशल 2.28 लाख रुपये का भुगतान शेष है।
मजदूरों में असंतोष बढ़ा
मजदूरों में असंतोष बढ़ रहा है और कई स्थानों पर प्रशासन से शीघ्र भुगतान की मांग की जा रही है। यदि समय रहते बकाया राशि जारी नहीं की गई तो यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को त्वरित फंड रिलीज, भुगतान ट्रैकिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि योजना का उद्देश्य सुरक्षित रहे और ग्रामीण विश्वास बहाल हो सके।
पहले भुगतान नहीं तो आंदोलन
भारतीय किसान-मजदूर महासंघ के युवा नेता सुभाष पांडेय ने कहा, सरकार कागजों में रोजगार गारंटी की बात करती है, लेकिन मजदूरी की गारंटी नहीं दे पा रही। मजदूर दिनभर धूप में पसीना बहाते हैं और महीनों तक भुगतान के लिए चक्कर लगाते हैं। यह शोषण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि होली से पहले भुगतान जारी नहीं किया गया तो जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।


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रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज और संजय गांधी अस्पताल में सैकड़ों अग्निशामक यंत्रों की मियाद खत्म होने के बावजूद नए स्टीकर लगाए जाने के आरोप लगे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि बेटियों की पूजा और नारियों के सम्मान से देश प्रगति करता है। महिला आरक्षण और सशक्तीकरण को उन्होंने ऐतिहासिक कदम बताया।
सीधी के अभय गुप्ता ने आर्थिक तंगी और जर्जर खपरैल मकान में रहकर कक्षा 10वीं में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया। दिहाड़ी मजदूर पिता के बेटे की सफलता प्रेरणा बनी।
पन्ना जिले में जेके सीमेंट पर सरकारी और निजी जमीन पर अवैध उत्खनन के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने कार्रवाई मांगी, लेकिन शिकायतकर्ता को नोटिस मिलने से प्रशासन पर सवाल उठे हैं।
मैहर पुलिस ने लग्जरी कार से 450 पाव अंग्रेजी शराब जब्त कर दो तस्करों को पकड़ा। दूसरी कार्रवाई में बाइक से 300 पाव शराब मिली, नदी से 825 किलो महुआ लाहन नष्ट किया।
सतना नगर निगम क्षेत्र में जनगणना ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए 155 आवेदन पहुंचे। कर्मचारियों ने बीमारी, पारिवारिक जिम्मेदारी, कैंसर, एलर्जी और अन्य निजी कारण बताकर राहत मांगी है।
सतना जिले में ई-विकास सिस्टम के बावजूद 24.66 टन खाद ऑफलाइन बेची गई। कृषि विभाग ने सहकारी समितियों को नोटिस जारी किया और निजी विक्रेता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
सतना नगर निगम ने संबल योजना में अपात्र होकर लाभ लेने वाले तीन हितग्राहियों पर एफआईआर की तैयारी की है। मृतकों के बाद पंजीयन और उम्र छुपाकर सहायता राशि लेने का मामला सामने आया।
सतना जिला अस्पताल में हीमोफीलिया मरीजों के लिए हब सेंटर संचालित है। सात जिलों के 72 मरीजों को मुफ्त इंजेक्शन, डे केयर सेंटर और विशेषज्ञ निगरानी की सुविधा मिल रही है।
मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में भी आज एक एक घूसखोर उपराजस्व अधिकारी को लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथों धर दबोचा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई की यह कहानी किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं है। सिराज ने झुकने के बजाय संघर्ष चुना और लोकायुक्त में शिकायत कर दी।