सीधी जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व या प्रसव बाद मौत दर्ज हुई। चिंताजनक आंकड़ों ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय संसाधनों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाइलाइट्स:
सीधी, स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य अमला किस तरह से काम कर रहा जीता-जागता उदाहरण आदिवासी अंचल सीधी जिले से देखने को मिल रहा है। 2025 एवं 2026 के आंकड़ों की बात की जाए तो सीधी जिले में 1 वर्ष में गर्भावस्था या प्रसव के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं ने दम तोड़ दिया ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं क्योंकि सरकार गर्भवती महिलाओं को लेकर विभिन्न योजनाएं चला रही है लेकिन जिस तरह गर्भवती महिलाओं की मौत हुई है वो सिस्टम पर सवाल उठा रहे।
मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल सीधी जिले में वर्ष 2025-26 की जो रिपोर्ट आई है वो हैरान कर देने वाली है क्योंकि 1 वर्ष में सीधी जिले के विभिन्न गांव की रहने वाली करीब 53 महिलाओं ने प्रसव के पूर्व एवं प्रसव के बाद दम तोड़ दिया संभवत: मध्य प्रदेश का ये पहला जिला होगा जहां इतनी ज्यादा तादात में गर्भवती महिलाओं की मौत हुई हैं, हालांकि कई महिलाओं की मौत होने के बाद उनके परिजनों ने यहां पर पदस्थ चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए कई बार सड़क जाम तक की स्थिति निर्मित हो चुकी है लेकिन सीधी जिले में व्यवस्था जिसकी जस की तस बनी हुई है।
नर्सिंग स्टाफ एवं डॉक्टरों की भी कमी बरकरार
सीधी जिले में जिला अस्पताल के अगर बात की जाए तो यहां नर्सिंग स्टाफ एवं डॉक्टरों की भी कमी है। आए दिन इस जिला अस्पताल की लापरवाहियों की खबर आती ही रहती है। इस मामले में जब मीडिया कर्मियों ने जिला अस्पताल में पदस्थ सिविल सर्जन से संपर्क करना चाहा तो वो भी कार्यालय में नदारत मिले जबकि उनकी पत्नी जो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीधी हैं बबीता खरे, उनको स्वास्थ्य कारणों के कारण छुट्टी में होने का हवाला दिया गया। सिविल अस्पताल में हर जगह मीडिया कर्मियों को बगैर अनुमति के फोटो वीडियो लेने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं
अगर बात करें तो सीधी जिला चिकित्सालय की तो यहां की व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं, गंदगी का आलम है, नर्सिंग स्टाफ की कमी है। जिम्मेदार चिकित्सा शासकीय अस्पताल की जगह अपने-अपनी आवासों में निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं।
पहले पीड़ित परिवार ने क्या बताया
सीधी जिले के सिहावल क्षेत्र की अकला पथरौंही की रहने वाली मंती देवी कुशवाहा की बहू अर्चना कुशवाहा जनवरी माह 2026 में प्रसव के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अमरपुर ले जाया गया है जहां मौजूद नर्स और डॉक्टर सीधी जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिये। बहू की डिलीवरी हो गई लेकिन रात में डिलीवरी होने के बाद खून की मांग की गई, इतना जल्दी खून की व्यवस्था नहीं हो पाई और कुछ समय बाद ही नर्सिंग स्टाफ एवं डॉक्टर ने उसे मृत्यु घोषित कर दिया जबकि नवजात शिशु की 3 दिन बाद मौत हो गई। मृतक अर्चना कुशवाहा का एक 3 वर्ष का मासूम बेटा है जिसकी परवरिश की जिम्मेदारी उसकी दादी के ऊपर आ गई है। दादी के मुताबिक मृतक अर्चना का पति मजदूरी करने हैदराबाद में रहता है।
फिर भी सत्ता-विपक्ष एक सुर में मौन
सीधी जिले के ये दिल दहला देने वाले आंकड़े बेहद चिंताजनक है पर इन आंकड़ों को लेकर एक गंभीर बात ये भी है कि जहां सत्ताधारी दल इस पूरे मामले में पूरी तरह के मुख दर्शक है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भी केवल नाम करने के लिए सोशल मीडिया में कुछ पोस्ट तो करते हैं परंतु उन्हें जिस तरह से इस मामले में गंभीर पहल करते हुए दिखना चाहिए उस तरह वो दिखाई नहीं देते हैं। अब ऐसी स्थिति में जब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही मौन हों तो सीधी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या हाल होगा? मौत के आंकड़े और कहां तक जाएंगे? ये एक बेहद गंभीर सवाल है? सीधी जिला स्वास्थ्य के मामले में बीते कुछ दशकों से हमेशा अपनी नाकामियों को लेकर सुर्खियों में रहा है। यहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं स्थाई तौर पर चरमराई हुई रहती हैं। जिला अस्पताल एक रेफरल अस्पताल हो गया है यहां जो भी गंभीर मरीज आते हैं उन्हें रीवा रेफर कर दिया जाता है या तो वह अपना दम तोड़ देते हैं। अब सवाल ये है कि जिले के जनप्रतिनिधि जिनके ऊपर इस मामले को लेकर जिम्मेदारी है वो इस पर क्या पहल करते हैं और जिले की माताओं की कहां तक रक्षा कर पाते हैं यह बेहद चिंतनीय विषय है?
रिपोर्ट: आर.बी.सिंह 'राज'


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