रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और निजी प्रैक्टिस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों को ओपीडी, बेड और जांच सुविधाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
तीन दशक पहले जब विंध्य की वादियों में एक बड़े अस्पताल की परिकल्पना ने जन्म लिया था, तो मकसद सिर्फ एक था इलाज के अभाव में दम तोड़ती सांसों को बचाना और रीवा के लोगों को उनके अपने शहर में बेहतर इलाज देना। साल 2003 में जब संजय गांधी अस्पताल की नींव रखी गई, तो लगा कि विंध्य के स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया सूरज उगा है। अत्याधुनिक मशीनें आईं, नामी डॉक्टर आए और मरीजों का भरोसा भी जागा। लेकिन वक्त के साथ यह भरोसा सरकारी व्यवस्था की तरह ही चरमरा गया। लोग इलाज के लिए रीवा से बाहर भागने लगे।
इस टूटते भरोसे को भांपकर रीवा के विधायक और वर्तमान शासन के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने एक नया भगीरथ प्रयास किया। शहर को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सौगात मिली। एक बार फिर अत्याधुनिक मशीनें और देश के जाने-माने विषय विशेषज्ञ रीवा बुलाए गए। शुरूआत अच्छी रही। कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी के गंभीर मरीजों को नई जिंदगी मिलने लगी। लेकिन अफसोस यह उम्मीदें ज्यादा दिनों तक सलामत नहीं रह सकीं।
सरकारी ओपीडी सूनी, बंगलों पर दुकानें गुलजार
आज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के उन गलियारों में जहां डॉक्टरों को मरीजों की धड़कनें नापनी चाहिए, वहां जूनियर डॉक्टरों के भरोसे व्यवस्था छोड़ी जा रही है। आरोप हैं कि अस्पताल के बड़े डॉक्टरों को अब अपनी ओपीडी की तारीखें और समय याद नहीं रहता। वे जूनियर डॉक्टरों को फोन पर ही समझाइश देकर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेते हैं। दूसरी तरफ इन डॉक्टरों के निजी बंगलों का नजारा बिल्कुल जुदा है। नियम कहते हैं कि सुपर स्पेशलिटी में पदस्थ डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस की सख्त मनाही है। ज्वाइनिंग के वक्त उनसे नॉन-प्रैक्टिस का अनुबंध भरवाया जाता है, जिसके बदले उन्हें भारी-भरकम वेतन भी मिलता है। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर अलसुबह से लेकर देर रात तक डॉक्टरों के निजी आवासों पर मरीजों का मेला लगा रहता है। सबसे बुरा हाल कार्डियो और न्यूरो विभाग का है, जहां अपनी बारी के इंतजार में मरीज सुबह से शाम कर देते हैं।
आयुष्मान कार्ड है तो 'भगवान', नहीं तो 'मशीन खराब है'
अस्पताल के भीतर एक और कड़वा सच पैर पसार चुका है। यहां सबसे ज्यादा तवज्जो उन मरीजों को मिलती है जिनके पास आयुष्मान कार्ड है। वजह साफ है—सरकार द्वारा तय नियमों के मुताबिक, आयुष्मान के तहत इलाज करने पर डॉक्टरों को एक निश्चित प्रोत्साहन राशि मिलती है। अगर आपके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, तो सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आपके लिए बेड अचानक फुल हो जाते हैं और चलती हुई मशीनें खराब बता दी जाती हैं। ऐसे बेबस मरीजों को सीधे निजी अस्पतालों का रास्ता दिखा दिया जाता है।
भीगे कपड़ों की तरह निचोड़े जाते हैं मरीज
हैरानी और दर्द की बात यह है कि जिन मरीजों को सरकारी अस्पताल से नो बेड या मशीन खराब का बहाना बनाकर रेफर किया जाता है, निजी अस्पतालों में पहुंचते ही वही डॉक्टर उनका इलाज करने खड़े मिलते हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि जिस इलाज के लिए सरकारी चौखट पर मिन्नतें करनी पड़ रही थीं, वही इलाज निजी अस्पतालों में मरीज और उनके परिजनों को भीगे कपड़ों की तरह आर्थिक रूप से निचोड़ कर किया जाता है। विंध्य के लोगों ने एक बार फिर खुद को ठगा सा महसूस करना शुरू कर दिया है। जिस भरोसे को कायम करने के लिए शासन-प्रशासन ने करोड़ों की लागत से सुपर स्पेशलिटी का ढांचा खड़ा किया था, वह अब चंद डॉक्टरों की निजी महत्वाकांक्षाओं और लालच की भेंट चढ़ता दिख रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या नियम सिर्फ कागजों के लिए हैं और क्या विंध्य के मरीजों की किस्मत में हमेशा इलाज के लिए भटकना ही लिखा है।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पदस्थ चिकित्सकों का प्राइवेट प्रैक्टिस में प्रतिबंध है। ज्वाइनिंग के समय उनके आदेश में इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाता है। कई जगह से इस तरह की जानकारी आई है। अधिष्ठाता श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय ने इस संबंध में नोटिस भी जारी किया है।
- डॉ. अक्षत श्रीवास्तव, अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी
यह सही है कि सुपर स्पेशलिटी चिकित्सकों का निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध है। लेकिन यह डीन के कार्य क्षेत्र में नहीं है। इसके लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को कार्रवाई करनी चाहिए।
- डॉ. अवतार सिंह, प्रभारी डीन श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा

रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए प्रस्तावित नई हवाई सेवाओं की शुरुआत फिलहाल टल गई है। एयरलाइंस और सरकार के बीच सब्सिडी पर सहमति नहीं बनने से परियोजना आगे बढ़ने में देरी हो रही है।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और निजी प्रैक्टिस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों को ओपीडी, बेड और जांच सुविधाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मऊगंज जिले की एक मेधावी छात्रा की आत्महत्या के बाद परिवार ने परीक्षा प्रणाली की अनियमितताओं को जिम्मेदार बताया है। घटना के बाद एनएसयूआई ने आर्थिक सहायता देकर मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग उठाई।
रीवा में नौतपा के दौरान हुई बारिश ने लोगों को सीवरेज परियोजना की पुरानी परेशानियां याद दिला दीं। जगह-जगह खुदी सड़कों और कीचड़ से फिसलन बढ़ी, जबकि तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई।
सीधी जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व या प्रसव बाद मौत दर्ज हुई। चिंताजनक आंकड़ों ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय संसाधनों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पन्ना जिले के पवई क्षेत्र में पुलिस ने 1,665 लीटर अवैध देशी शराब से भरी पिकअप जब्त की। कार्रवाई में करीब 18.50 लाख रुपये की संपत्ति बरामद हुई, जबकि चालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
सतना जिले के खोहर गांव में बाड़े में बैल घुसने के विवाद ने खूनी रूप ले लिया। युवक की लाठी-डंडों से पिटाई कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने पति-पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
सतना जिले में मई 2026 के दौरान पीडीएस वितरण का औसत 93.64 प्रतिशत रहा। करीब 17,715 पात्र राशन कार्डधारक खाद्यान्न नहीं ले सके, जबकि पोर्टेबिलिटी सुविधा से हजारों हितग्राहियों को लाभ मिला।
सतना नगर निगम में सम्पत्ति कर की 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव फिर चर्चा में है। परिषद पहले इसे खारिज कर चुकी है, लेकिन फाइल एमआईसी को भेजे जाने से शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है।
सतना रेलवे स्टेशन पर 18 फेसीलेटर नियुक्त होने के बावजूद केवल 6 ही ड्यूटी कर रहे हैं। एटीवीएम व्यवस्था प्रभावित होने से यात्रियों को जनरल टिकट के लिए लंबी कतारों और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह