जानिए देश में मानसून की ताजा स्थिति, अल नीनो का बढ़ता असर, क्षेत्रीय बारिश का हाल और बाढ़ से प्रभावित राज्यों की पूरी रिपोर्ट। क्या आने वाले दिनों में बारिश राहत देगी या तबाही?

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है, जिससे लंबे समय से चली आ रही बारिश की कमी में सुधार देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 16 से 22 जुलाई के बीच देश में लगभग सामान्य बारिश दर्ज की गई है। 1 जून से शुरू हुए इस सीजन में अब तक बारिश का जो घाटा बना हुआ था, वह घटकर अब 17 प्रतिशत पर आ गया है। इस दौरान सामान्य तौर पर होने वाली 370.9 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 306.9 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। हालांकि, भले ही स्थिति में कुछ सुधार हुआ हो, लेकिन कुल मानसूनी बारिश अभी भी संतोषजनक सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाई है, जिस पर मौसम वैज्ञानिकों की पैनी नजर बनी हुई है।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी बारिश का वितरण काफी असंतुलित नजर आ रहा है। उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश सामान्य के करीब दर्ज की गई है। उत्तर-पश्चिम भारत में केवल 10 प्रतिशत और मध्य भारत में मात्र 6 प्रतिशत की मामूली कमी आई है, जबकि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इसके विपरीत, दक्षिण भारत में अब भी 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति पूर्व और पूर्वोत्तर भारत की है, जहां सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, गुजरात, गोवा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अब भी बारिश का एक बड़ा घाटा बना हुआ है, जिससे खेती-किसानी पर असर पड़ रहा है।
मानसून की अनिश्चितता के पीछे सबसे बड़ा कारण 'अल नीनो' (El Nino) का बढ़ता प्रभाव है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो और अधिक मजबूत होता दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसका प्रभाव आने वाले दिनों में और अधिक गहराता है, तो यह मानसून की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसके कारण न केवल मानसून समय से पहले कमजोर पड़ सकता है, बल्कि बारिश का स्थानिक और कालिक वितरण भी पूरी तरह असंतुलित हो सकता है। यही वजह है कि मौसम विभाग मानसून के बचे हुए सीजन को लेकर बेहद सतर्क है और लगातार इसकी निगरानी कर रहा है।
राहत की बात यह है कि आने वाले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियों के और अधिक तीव्र होने की पूरी संभावना है। 24 से 29 जुलाई के दौरान कई मजबूत मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय रहेंगी। इसके प्रभाव से दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात, उत्तर कोंकण और उत्तर मध्य महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही, पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर के राज्यों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर वर्षा होने की संभावना है, जो सूखे की मार झेल रहे क्षेत्रों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
एक तरफ जहां बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं दूसरी तरफ यह कई राज्यों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। गुजरात में लगातार तीन दिनों की मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जहां 38 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा और 352 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया गया। बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में वहां पांच लोगों की जान जा चुकी है और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। उधर, असम में बाढ़ का संकट विकराल रूप ले चुका है, जिसमें अब तक 61 लोगों की मौत हो चुकी है और सात लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन के कारण मचैल माता यात्रा स्थगित है, जबकि वैष्णो देवी यात्रा को दोबारा शुरू करने की तैयारियां चल रही हैं।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने के नियम को वैध ठहराया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पटाखों पर पूरा बैन नहीं लगेगा और न ही 24 घंटे आतिशबाजी की इजाजत होगी। कोर्ट ने ग्रीन क्रैकर्स के लिए समय तय करने और शर्तों के साथ छूट देने के संकेत दिए हैं।
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खड़गे ने कहा कि मोदी- शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आयोग को कठपुतली बना दिया है। भाजपा चुनाव आयोग के साथ वोट चोरी कर रही है।
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