मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 2 मार्च को बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली कृषि कैबिनेट करेंगे। जानें किसानों की आय बढ़ाने और जनजातीय विकास के लिए क्या है सरकार का मास्टर प्लान।
By: Star News
Mar 01, 20266:34 PM
भोपाल/बड़वान। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत एक अनूठी और ऐतिहासिक पहल की है। सोमवार, 2 मार्च 2026 को बड़वानी जिले के जनजातीय बहुल ग्राम नागलवाड़ी में प्रदेश की पहली विशेष 'कृषि कैबिनेट' आयोजित होने जा रही है। यह पहला अवसर होगा जब पूरी राज्य सरकार और मंत्रिमंडल भोपाल के गलियारों से निकलकर निमाड़ के एक सुदूर जनजातीय अंचल में किसानों के हित में मंथन करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय को दोगुना करना है। 'किसान कल्याण वर्ष' के तहत नागलवाड़ी में होने वाली इस कैबिनेट में कृषि, सिंचाई और जनजातीय विकास से जुड़े कई क्रांतिकारी और निर्णायक प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है।
सोमवार को मुख्यमंत्री सहित पूरा मंत्रिपरिषद नागलवाड़ी में मौजूद रहेगा। इस दौरान कार्यक्रमों की रूपरेखा कुछ इस प्रकार होगी:
कृषि कैबिनेट: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की विशेष बैठक, जिसमें कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे।
किसान-प्रबुद्धजन संवाद: डॉ. यादव सीधे किसानों और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों से चर्चा करेंगे। यहाँ न केवल सरकारी योजनाओं को साझा किया जाएगा, बल्कि जनता की अपेक्षाओं और सुझावों को भी सुना जाएगा।
विकास प्रदर्शनी: कार्यक्रम स्थल पर जनजातीय संस्कृति और कृषि आधारित आधुनिक विकास पर केंद्रित एक भव्य प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
नागलवाड़ी का यह दौरा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। कैबिनेट के पश्चात पूरा मंत्रिमंडल 800 वर्ष पुराने प्राचीन भिलट देव मंदिर में दर्शन करेगा, जो जनजातीय समाज की अगाध आस्था का केंद्र है। मुख्यमंत्री और मंत्रीगण जुलवानिया में आयोजित होने वाले पारंपरिक 'भगोरिया हाट' उत्सव में भी शिरकत करेंगे। इस दौरान पूरे अंचल में जनजातीय परंपराओं और लोक संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिलेगी।
लगभग 6 हजार की आबादी वाला नागलवाड़ी ग्राम इस ऐतिहासिक कैबिनेट का साक्षी बनकर पूरे निमाड़ और बड़वानी जिले के विकास का नया मार्ग प्रशस्त करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जनजातीय क्षेत्रों में इस तरह के आयोजनों से शासन और जनता के बीच की दूरी कम होगी और विकास की मुख्यधारा सुदूर अंचलों तक पहुंचेगी।