
कांग्रेस किसी को बाेलने से नहीं रोकती, न दबाती है
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित 'रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन' के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए एक ऐसा बयान दिया, जिसकी राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद वे हर संगठन और व्यक्ति के अपनी बात रखने के अधिकार के पक्ष में हैं।
गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य कभी भी किसी को बोलने से रोकना या उसकी आवाज दबाना नहीं रहा है। इसी वैचारिक प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने या उन्हें देश से बाहर करने की कोशिश की गई, तो वे खुद आगे आकर उनकी रक्षा करेंगे। उनके मुताबिक, देश के हर संगठन और नागरिक को अपनी बात खुलकर रखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्रों के प्रदर्शन का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र अपनी समस्याओं को लेकर तकलीफ में थे और अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किसी भी नागरिक को अपनी बात कहने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में आरएसएस के बदले हुए स्वरूप पर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब छोटे व्यापारी और उद्यमी आरएसएस की रीढ़ हुआ करते थे और वही इसकी असली ताकत थे। हालांकि, केंद्र सरकार की नीतियों—विशेषकर नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण तरीके से लागू किए गए जीएसटी (GST)—ने इस वर्ग को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ में कॉरपोरेट संस्कृति का प्रवेश प्रमोद महाजन के कार्यकाल में शुरू हुआ था, जो नरेंद्र मोदी के दौर में पूरी तरह स्थापित हो चुका है। राहुल का दावा है कि 'पुराना संघ अब समाप्त हो चुका है' और वर्तमान संगठन पूरी तरह से बड़े पूंजीपतियों के हितों की पूर्ति का साधन बन गया है।
वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश में आज भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो इस सत्ता और ताकत के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने से डरता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज भारत में कई लोग 'कायरों की तरह व्यवहार' कर रहे हैं। राहुल गांधी ने देश के युवाओं और नागरिकों से आह्वान किया कि यदि भारत की वास्तविक स्थिति को समझना है, तो यह देखना होगा कि आज के दौर में लोग अपनी असहमति और विचार किस प्रकार व्यक्त कर रहे हैं।
पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर वॉर्निंग लेबल लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को अंतिम चेतावनी दी है।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है। उन्होंने पुनर्नियुक्ति से इनकार किया, जिसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने उत्तराधिकारी के लिए चयन समिति की प्रक्रिया शुरू की है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब के पास SAD चीफ सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला हुआ है। सीएम फडणवीस ने जांच के आदेश दिए हैं।
संसद का मानसून सत्र 2026 भारी हंगामे और गतिरोध के बीच समाप्त हो गया है। कार्यवाही बाधित होने से 7 हजार मिनट बर्बाद हुए और 175 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पटना हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि हिंदू विवाह को वैध साबित करने के लिए केवल मतदाता सूची या भरण-पोषण का आदेश पर्याप्त नहीं है। विवाह हिंदू रीति-रिवाज और आवश्यक रस्मों के साथ संपन्न हुआ हो, इसका प्रमाण देना जरूरी है।
संसद का मानसून सत्र आज बिना किसी ठोस निर्णय के हंगामे की भेंट चढ़ गया। सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही महज 1 मिनट ही चल सकी। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन के तुरंत बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट में भारत की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में पुरानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए आत्मघाती वाहन विस्फोट के पीछे आतंकी संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट का हाथ था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स के अधिकारियों व जवानों के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। गृह मंत्रालय के पुलिस-2 प्रभाग (कार्मिक-नीति अनुभाग) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह अवधि कार्मिकों के संबंधित एजेंसी में शामिल होने के पहले दिन से ही लागू मानी जाएगी।
कभी-कभी सरकारी लापरवाही उन परिवारों को भी नहीं बख्शती जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी हो। इसका एक उदाहरण शौर्य चक्र से सम्मानित मोहन सिंह की विधवा का दशकों लंबा संघर्ष है, जिन्हें अपनी हक की स्पेशल फैमिली पेंशन पाने के लिए 26 साल तक इंतजार करना पड़ा और वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया।

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