रेलवे ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सतना, मैहर और रीवा स्टेशनों पर ड्रोन कैमरे की मदद से निगरानी की जाएगी। ट्रायल आज से शुरू होगा, जिससे भगदड़ और हादसों की रोकथाम में मदद मिलेगी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना, मैहर एवं रीवा स्टेशनों में रेलवे जल्द ही क्राउड मैनेजमेंट एवं सुरक्षा व ट्रैक की मॉनीटरिंग के लिए सर्विलांस ड्रोन का सहारा लेगा। आज से इसका ट्रायल शुरू होगा । बताया गया कि सबसे पहले ट्रायल मैहर स्टेशन में होगा। इसके बाद फि र 7 एवं 8 सितम्बर को सतना स्टेशन में ट्रायल कर रेल सुरक्षा बल को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस सर्विलांस ड्रोन के जरिए रेलवे को न सिर्फ स्टेशनों पर हो रही भीड़ को कंट्रोल करने में काफी सुविधा होगी तो वहीं भगदड़ या अन्य प्रकार के हादसों को रोकने में काफी मदद मिलेगी। अभी तक रेलवे बड़ी परियोजनाओं की मॉनीटरिंग एवं सर्वे में इसका उपयोग करता था।
ट्रैक से 250 फुट ऊंचाई पर उड़ेगा ड्रोन
सतना जंक्शन जहां विंध्य क्षेत्र का प्रवेश द्वार है, वहीं मैहर में मां शारदा के दर्शन के लिए ट्रेनों के माध्यम से देश के कोने-कोन से श्रद्धालू पहुंचते हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए आने वाले दिनों में रेलवे ड्रोन कैमरे का ही सहारा लेगा। बताया गया ड्रोन कैमरा ट्रैक से 250 फुट ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा। सबसे खास बात यह कि ड्रोन अगर डिस्कनेक्ट होता है तो जहां से उड़ान भरेगा उसी जगह पर वापस पहुंचेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार कोविड-19 के दौरान ड्रोन कैमरा बहुत मददगार साबित हुआ। कोविड-19 के दौरान पश्चिम मध्य रेल से गुजरने वाली और पहुंचने वाली आॅक्सीजन एक्सप्रेस की वीडियोग्राफी करके निरीक्षण किया गया था। रेलवे में ड्रोन का उपयोग वर्ष 2017 से किया जा रहा है, उस वक्त ड्रोन कैमरा से 400-500 फीट ऊंचाई से दो किमी के दायरे की तस्वीरे ली जाती थीं। बैटरी से चलित यह ड्रोन कैमरा 20 से 25 मिनट की समयावधि तक उड़ सकता था, लेकिन अब इस ड्रोन को अपग्रेड किया गया है, यह 1300 से अधिक फीट की ऊंचाई और चार किमी दायरे की तस्वीर ले सकता है। अपडेट ड्रोन कैमरा अब करीब 30 से 40 मिनट तक उड़ सकता है। ड्रोन कैमरे के माध्यम से रेलवे अब अपने कामों में जीरो एरर की तरफ बढ़ रहा है।
इस तरह रेलवे में ड्रोन कैमरे का उपयोग
यह है खासियत

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