सतना स्टेशन पर ज्ञानगंगा एक्सप्रेस का एसी कोच तकनीकी खराबी के कारण अलग किया गया। डेढ़ घंटे तक ट्रेन खड़ी रही, वहीं सुपौल एक्सप्रेस में भी धुआं निकलने से यात्रियों में हड़कंप मच गया।
सतना समेत जबलपुर मंडल के स्टेशनों में सफाई कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिलने पर रेलवे ने सात ठेकेदार कंपनियों को चेतावनी दी, बावजूद इसके स्टेशन की सफाई व्यवस्था अब भी लचर बनी हुई है
सतना रेलवे स्टेशन पर एटीवीएम मशीनें बिना फेसीलेटर बंद पड़ी हैं, जिससे जनरल टिकट के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। यात्रियों को समय से पहले पहुंचना पड़ रहा है, व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
सतना रेलवे स्टेशन के बाहर ऑटो चालकों की अव्यवस्था से भीषण जाम लग गया। एम्बुलेंस तक फंसी रही। नो-पार्किंग, प्री-पेड बूथ और पुलिस तैनाती की कमी से यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
सतना सांसद गणेश सिंह ने जबलपुर रेल मंडल की बैठक में सतना जंक्शन पर अवैध वेंडरों पर अंकुश लगाने और विंध्यवासियों की सुविधा को देखते हुए सतना से दिल्ली के बीच वंदे भारत ट्रेन चलाने की मांग उठाई। सांसद ने माल गोदाम शिफ्टिंग, झुकेही में रेल ओवर ब्रिज, जैतवारा स्टेशन विस्तार और बंद ट्रेनों के ठहराव बहाल करने जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया। बैठक में सीधी सांसद ने भी नई दिल्ली और भोपाल के लिए ट्रेनों की मांग रखी।
रेलवे ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सतना, मैहर और रीवा स्टेशनों पर ड्रोन कैमरे की मदद से निगरानी की जाएगी। ट्रायल आज से शुरू होगा, जिससे भगदड़ और हादसों की रोकथाम में मदद मिलेगी।
सतना रेलवे स्टेशन पर निरीक्षण के दौरान एसडीजीएम ने मथुरा प्रसाद एंड सन्स की ट्राली में एक्सपायर्ड आईडी कार्ड पकड़ा। अधिकारियों को फटकार लगाई और डीजल खपत व कर्मचारियों की तैनाती पर सवाल उठाए।
पीएम गति शक्ति योजना के तहत सतना रेलवे स्टेशन के 265.32 करोड़ रुपये के पुनर्विकास प्रोजेक्ट की रफ्तार बेहद धीमी है। 20 महीने बाद भी न तो ड्रॉइंग पास हुई और न ही निर्माण कार्य शुरू हुआ। यह सुस्ती जनउम्मीदों पर पानी फेर रही है।
सतना जंक्शन को पहली बार महिला टिकट कलेक्टर मिली है, लेकिन स्टेशन पर अब भी टिकट चेकिंग स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। सिर्फ 12 टीसी पदस्थ हैं जबकि 24 पद स्वीकृत हैं। नतीजतन स्टेशन पर बेटिकट यात्री और अव्यवस्था का बोलबाला है, जिससे रेलवे को हर महीने लाखों का नुकसान हो रहा है।
'प्लेटफार्म' नामक यह तीखा व्यंग्यात्मक लेख करन उपाध्याय द्वारा लिखा गया है, जिसमें बताया गया है कि किस तरह कुछ 'छोटे साहब' रेलवे को अपनी निजी संपत्ति की तरह चला रहे हैं। टिकट कन्फर्म हो या चाय-पानी, हर सेवा 'अपनों' के लिए। वहीं आम जनता आज भी वेटिंग लिस्ट में ठगी सी बैठी है।






















