रीवा संभाग में शिक्षा विभाग की 787 पेंशन और वेतन निर्धारण फाइलें लंबित हैं। 111 प्रकरण बिना कारण निरस्त किए गए। कर्मचारियों को महीनों से भुगतान और पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
जेडी कोष एवं लेखा का एक नया और बड़ा कारनामा सामने आया है। भले ही सरकार ने करप्शन रोकने के लिए सिस्टम को आनलाइन कर दिया है लेकिन फाइलें रोकने में अधिकारियों ने सारी हदें पार कर दी है। सरकारी कर्मचारियों के पेंशन और वेतन निर्धारण का फैसला ही नहीं किया जा रहा। महीनों नहीं सालों से फाइलें पेडिंग में है। कईयों को बिना आपत्ति में निरस्त कर दिया गया। वर्तमान समय में रीवा संभाग की सिर्फ शिक्षा विभाग से 787 फाइलें होल्ड पर है। इनमें से 111 बिना कारण के निरस्त कर दिया गया। कोष एवं लेखा के अधिकारियों की करतूत की जानकारी जेडी लोक शिक्षण ने आयुक्त रीवा संभाग रीवा को दी है।
सरकारी नौकरी में जीवन भर सेवाएं देने के बाद कर्मचारी, अधिकारियों की गाढ़ी कमाई भी रिटायरमेंट पर पूरी नहीं मिलती। सबसे बड़ा रोड़ा जेडी कोष एवं लेखा में बैठे अधिकारी बन गए हैं। वेतन और पेंशन का निर्धारण समय पर नहीं करते। इसके कारण लोक सेवकों के स्वत्वों काभुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है। कई रिटायरमेंट के बाद भी वेतन निर्धारण और पेंशन निर्धारण के लिए कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस अव्यवस्था ने सिर्फ शिक्षकों और कर्मचारियों को ही परेशान नहीं किया है। स्कूल शिक्षा विभाग के जेडी भी इस मनमानी और भ्रष्टाचार का शिकार हुए हैं। जब उन्होंने पूरे संभाग से पेडिंग फाइलों की जानकारी मांगी तो होश उड़ गए। शिक्षा विभाग की 787 फाइलें जेडी कोष एवं लेखा के पास पेडिंग में हैं। 111 फाइलें बिना किसी रीजन के निरस्त कर दी गईं।
आईएफएमआईएस से भेजा जाता है प्रकरण
कमिश्नर रीवा संभाग रीवा के अंडर में हालांकि सभी संयुक्त संचालक कार्यालय है। इन्हीं में से एक जेडी कोष एवं लेखा भी है। यह विभाग कर्मचारियों के वेतन का निर्धारण करता है। शासकीय सेवकों के साथ ही सेवा निवृत्त होने वाले लोक सेवकों के भी स्वत्वों का निराकरण इसी विभाग से होता है। जब तक यह विभाग सेवा पुस्तिका और भुगतान का निर्धारण नहीं करता। कर्मचारियों को एक फूटी कौड़ी नहीं मिलती। रिटायरमेंट के बाद पेंशन प्रकरण का भी निर्धारण जेडी कोष एवं लेखा से ही होता है। पैसे का सारा काम आॅफलाइन यानि मैनुअल होता था। मैनुअल ही सेवापुस्तिका जांच के लिए विभागों से जेडी कोष एवं लेखा के पास जाती थी। तब भी बिना कमीशन काम नहीं होता था। सरकार ने फिर सिस्टम में बदलाव किया। आनलाइन व्यवस्था लागू की और आईएफएमआईएस पोर्टल जनरेट किया। सभी कर्मचारियों के प्रकरण आनलाइन भेजे जाने लगे लेकिन भ्रष्टाचार नहीं रुका। सिर्फ शिक्षा विभाग की ही बात करें तो 787 प्रकरण विभाग में लंबित हैं। इन्हें बिना कारण के सालों से होल्ड पर रखा गया है। इनमें से 111 निरस्त कर दिया गया लेकिन आनलाइन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कमी क्या थी।
कमीशन के चक्कर में लटकाते हैं फाइल
जेडी कोष एवं लेखा से सरकारी शिक्षकों के वेतनमान, पदोन्नति, एरियर आदि की राशि का निर्धारण किया जाता है। रिटायरमेंट के बाद पेंशन का निर्धारण भी यहीं से किया जाता है। इसी फिक्सेशन में जेडी कोष एवं लेखा के अधिकारी, कर्मचारी लंबा खेल करते हैं। एरियर, ग्रेच्युटी, पेंशन आदि के फिक्सेशन की राशि पर इनकी नजर रहती है। इन्हीं फाइलों को क्लियर करने के लिए मोटा कमीशन मांगा जाता है। कमीशन नहीं देने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों, अधिकारियों की फाइलें होल्ड कर दी जाती है। बाद में निरस्त कर देते हैं।
कलेक्टर ने पेंशन अधिकारी को थमाई नोटिस
यह सिर्फ हवा हवाई नहीं है। जेडी कोष एवं लेखा लोकानंद टेकाम हैं। इनके पास पेंशन का भी चार्ज है। इनके कार्यों की लापरवाही की सजा रिटायर्ड शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी भुगतान रहे हैं। लगातार शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में पहुंच रही हैं। समय पर पेंशन प्रकरणों का निराकरण नहीं होने से कलेक्टर रीवा ने भी इन्हें नोटिस जारी किया है। अब इनके कार्यों की हालत और पारदर्शिता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जेडी लोक शिक्षण की भी फाइल निरस्त की, वेतनवृद्धि भी घटाई
हद तो यह है कि इनकी प्रताड़ना से अधिकारी भी नहीं बच पाते। जेडी लोक शिक्षण संचालनालय रीवा का भी प्रकरण एरियर भुगतान के लिए आनलाइन माध्यम से भेजा गया था। 6 महीने तक होल्ड पर प्रकरण रखा गया। इसके बाद रिजेक्ट कर दिया गया। फाइल को रिजेक्ट क्यों किया गया, इसकी जानकारी भी दर्ज नहीं की गई। जब कार्यालय के लिपिक ने इंटरनल आॅडीटर मनीष त्रिपाठी से इसका कारण पूछा तो उसने दो टूक जवाब दिया था कि जहां शिकायत करना है कर दो, कारण नहीं बताएंगे।
111 लोक सेवकों की फाइलें निरस्त की गईं
रीवा संभाग अंतर्गत आने वाले सभी बीईओ कार्यालय से फाइलें जेडी कोष एवं लेखा के पास लंबित हैं। इनमें से 111 वेतन निर्धारण की फाइलें रिजल्ट कर दी गईं। इनका कारण भी नहीं बनाया गया। इसमें रीवा से 28, रायपुर कर्चुलियान की 28, अमरपाटन की 56 और सिहावल की 19 फाइलें शामिल हैं।
कमिश्नर रीवा संभाग रीवा को जेडी ने लिखा पत्र
जेडी कोष एवं लेखा की कारस्तानियों से लोक शिक्षण संचालनालय रीवा के जेडी ने कमिश्नर को भी अवगत कराया है। उन्होंने रीवा संभाग के विकासखंडों की होल्ड फाइलों की जानकारी का पुलिंदा बनाकर कमिश्नर रीवा संभाग रीवा बीएस जामोद के पास भेजा है। साथ ही फाइल में लिखा गया है कि उनके खुद का प्रकरण जेडी कोष एवं लेखा से बिना किसी कारण के निरस्त कर दिया गया। वेतन भी घटा दियागया। इससे उन्हें हर महीने 31 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।


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