रीवा मेडिकल कॉलेज बैठक में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला भड़के, डीन पर भुगतान रोकने के आरोप। लंबित बिल और सफाई व्यवस्था पर जताई नाराजगी, सुधार के सख्त निर्देश दिए।
By: Yogesh Patel
Mar 22, 20263:59 PM
हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय में शनिवार को सामान्य परिषद की बैठक में शुरू हुई एजेंडें की चर्चा में अधिष्ठाता मेडिकल कॉलेज द्वारा साधी गई चुप्पी से डिप्टी सीएम भड़क गए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ठेकेदारों को भुगतान नहीं कर रहे हैं आपकी मंशा ठीक नहीं लगती। बैठक में सब स्टेशन को विद्युत विभाग के हैंडओव्हर किए जाने का एजेंडा रखा गया। इस पर पीडब्लूडी के इंजीनियर ने भुगतान न किए जाने का आरोप लगाया। करीब 1 करोड़ की पेडेंसी बताई। डीन द्वारा इस संबंध में अनभिज्ञता जाहिर की गई। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने स्पष्ट हिदायत देते हुए कहा कि ठेकेदारों से काम लेने के बाद बिल भुगतान नहीं किया जाना अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने डीएमई को भोपाल जाने के पहले लंबित बिलों के निराकरण के निर्देश दिए।
आपको बता दें कि शनिवार को श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में स्वशासी समिति सामान्य परिषद की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला, सांसद जनार्दन मिश्रा, मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल, डीएमई डॉ अरुणा कुमार मौजूद रहे। बैठक में मेडिकल कॉलेज के सब स्टेशन को पीडब्लूडी ईएंडएम से लेकर विद्युत विभाग को देने पर एजेंडा में चर्चा की गई। इस पर पीडब्लूडी के इंजीनियर ने आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि डीन काम कराने के बाद भुगतान नहीं करते। 1 करोड़ का बिल पेडिंग हैं। इसी बात पर डिप्टी सीएम भड़क गए। उन्होंने डीन को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यदि आप पहले सारे भुगतान क्लियर करते फिर यह एजेंडा लाते तो समझ में आता। बिना भुगतान किए ही यह एजेंडा आपकी मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। आप काम कराने के बाद ठेकेदारों का भुगतान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने जल्द से जल्द सभी पेडिंग भुगतान क्लियर करने के निर्देश दिए।
डॉक्टरों को नियुक्ति कराने में परेशान किया जाता है
डिप्टी सीएम ने डॉक्टरों के रिक्त पद और नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संजय गांधी अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कई पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए उन्होंने कहा कि ऐसा विज्ञापन निकालें जो हर समय स्टैंड रहे। जिसको नौकरी चाहिए वह कभी भी आकर आवेदन करे और इंटरव्यू दे दे। सुपर स्पेशलिटी में 100 पद हैं, इसमें से 22 ही भरे हैं। डिप्टी सीएम ने एक डॉक्टर का उदाहरण भी दिया कि इंटरव्यू के बाद ज्वाइनिंग आदेश जारी करने के लिए उन्हें भटकाया गया। डीएमई और सचिव के साइन तक नहीं हुए। डिप्टी सीएम ने पदों को भरने के लिए नियमों में बदलाव की बात भी कही।
प्रदेश की पहली डिजिटल लाइब्रेरी का किया शुभारंभ
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रदेश की प्रथम डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारंभ किया गया है। इसमें पांच हजार किताबें डिजिटली उपलब्ध हैं। एक किताब को कई विद्यार्थी एक साथ पढ़ सकते हैं। इसके लॉगिन पासवर्ड से किताबों को डाउनलोड करने की भी सुविधा रहेगी। मेडिकल के विद्यार्थी घर से भी इसका लाभ उठा सकते हैं। इसमें 4 लाख प्रश्न और उत्तर भी उपलब्घ है। मेडिकल एजुकेशन के लिए यह रीवा की बड़ी उपलब्धि है।
यह उपलब्धियां भी जल्द मिलेंगी
उप मुख्यमंत्री ने कहा अस्पताल आते हैं तो नाक बंद करना पड़ता है
एजेंडे में अस्पताल की साफ सफाई पर भी डिप्टी सीएम ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल आने पर इतनी बदबू रहती है कि नाक बंद करके आना जाना पड़ता है। फर्श पर पेशाब फैला है या पानी, यह पता ही नहीं चलता। शौचालय में दरवाजे नहीं है। साफ सफाई को दुरुस्त करने की बात कही गई। डिप्टी सीएम के इस बात का सांसद ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह बात सही है। एतनी बदबू रहत ही कि नाक बंद करय का पड़त है। जब हमही गंधात है ता य माना की सब का गंधातय होई।
प्रमोशन होता तो डीएम के और कोर्स शुरू हो जाते
डिप्टी सीएम ने मेडिकल कॉलेज के डीन को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों के प्रमोशन को जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टरों को प्रमोशन मिलता तो कई और विभागों में डीएम के पद मिल जाते। प्रमोशन में देरी के कारण डीएम के पद स्वीकृत नहीं हो पाए।
सभी भुगतान क्लियर करने को कहा
डिप्टी सीएम ने बैठक में सभी ठेकेदारों का भुगतान क्लियर करने का आदेश दिया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिस भी विभाग का जो बकाया है, उसे भी निराकृत किया जाए। इसके बाद जो भी राशि बचे उसके हिसाब से ही बजट लाया जाए। उन्होंने कहा कि यह सारी पेडेंसी निराकृत करें, इसके बाद शासन स्तर से पृथक से राशि देने का प्रयास किया जायेगा।
बैठक में बातचीत के अंश
डीन डॉ सुनील अग्रवाल- मेडिकल कॉलेज में सब स्टेशन बने हुए हैं। इन्हें मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को दे दिया जाए। इससे मेंटीनेंस का खर्चा बचेगा।
अधीक्षण अभियंता- सब स्टेशन का मेंटीनेंस आउटसोर्स से ही कराया जाता है। इसमें भी उन्हें भुगतान करना पड़ता है। फ्री में कुछ नहीं हो पाता।
पीडब्लूडी ईएंडएम - इंजीनियर विनोद तिवारी ने कहा कि 1500 केवीए का ट्रांसफार्मर ठेकेदार को भरोसे पर लेकर कराया गया। आज तक भुगतान नहीं किया गया। डीन ने कहा 2 लाख से ऊपर का भुगतान नहीं कर सकते। इसके बाद छोटे छोटे बिल बनाकर दिए गए। फिर भी भुगतान नहीं किया गया।
डिप्टी सीएम ने डीन से कहा- यदि पैसा दे दिए होते तब सब स्टेशन का प्रस्ताव रखते और भुगतान के बाद पीडब्लूडी काम नहीं कर पाता तब यह एजेंडा लाते तो यह कह सकते थे कि विभाग काम नहीं कर रहा। विद्युत विभाग से रखरखाव कराना उचित होगा।
पीडब्लूडी ईएंडएम- इंजीनियर विनोद तिवारी ने डिप्टी सीएम से कहा कि एमसीसीएमसी का भुगतान नहीं कर रहे। 1 करोड़ का बिल पेडिंग है। आज तक भुगतान नहीं किया गया।
डीन डॉ सुनील अग्रवाल- उन्होंने किसी भी तरह के बिल की जानकारी से इंकार कर दिया।
लेखा पाल- मेडिकल कॉलेज के लेखापाल ने बैठक में डिप्टी सीएम को जानकारी देते हुए बताया कि 95 लाख नहीं 5 लाख के बिल हैं।
डिप्टी सीएम- 95 लाख के बिल कहां है, डीएमई इस बिल को देखकर जाइएगा। इसके बाद मंत्री ने डीन को कहा कि आप पैसा देना चाहते हैं, ऐसा लगता नहीं है। आपकी मंशा ठीक नहीं है। सभी लंबित बिलों का जल्द से जल्द भुगतान कराएं।
नागपुर जाने वाली बसें घट गईं
बैठक में मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के शुरू होने से मरीजों को काफी फायदा हुआ है। अधिकांश मरीज नागपुर जाते थे। अब उन्हें यहीं पर इलाज मिल रहा है। पहले मऊगंज से 10 से 12 बसें नागपुर जाती थी। अब इनकी संख्या आधी रह गई है।