सतना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल गई। मैहर से रेफर गर्भवती महिला को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिली, जिससे उसे पैदल लेबर रूम तक जाना पड़ा। वार्ड बॉय की अनुपस्थिति भी उजागर हुई।
सतना में आग से झुलसे मरीजों को बिना एसी वाली 108 एंबुलेंस से रेफर किए जाने के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। एंबुलेंसों के रखरखाव और मॉनिटरिंग की कमी भी सामने आई है।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और निजी प्रैक्टिस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों को ओपीडी, बेड और जांच सुविधाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सीधी जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व या प्रसव बाद मौत दर्ज हुई। चिंताजनक आंकड़ों ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय संसाधनों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदेश की नि:शुल्क शव वाहन सेवा से हजारों परिवारों को राहत मिली है, लेकिन रीवा में 9 महीनों में 1,129 मौतों के आंकड़े ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली और इलाज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सतना जिला अस्पताल में तीन वर्षों से सर्विसिंग नहीं होने पर दोनों पीएसए ऑक्सीजन प्लांट बंद कर दिए गए। फिलहाल एलएमओ प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई जारी है, लेकिन तकनीकी खराबी की स्थिति में मरीजों पर संकट गहरा सकता है।
रीवा जिले के सिरमौर अस्पताल में अमानवीय लापरवाही सामने आई, जहां एक वृद्ध तीन घंटे तक पोर्च में तड़पता रहा। डॉक्टरों की अनदेखी से उसकी मौत हो गई, परिजन करते रहे मदद की गुहार।
सतना जिला अस्पताल में सर्जरी के दौरान नाइट्रस ऑक्साइड सिलेंडर खत्म होने पर उधार से ऑपरेशन पूरा किया गया। लगातार कमी से डॉक्टर नाराज, ओटी बंद करने की चेतावनी दी गई है।
सतना जिला अस्पताल की पहली मंजिल पर एक साल पहले लगी टाइल्स उखड़ने लगी हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मैहर सिविल अस्पताल में लिफ्ट और ऑक्सीजन प्लांट एक माह बाद भी बंद हैं। डिप्टी सीएम के निर्देशों के बावजूद सुधार नहीं हुआ, मरीजों को सिलेंडर के भरोसे इलाज मिल रहा है।






















