वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर मिश्रा की पावर गैलरी में नगर निगम, जनपद पंचायत और प्रशासनिक गलियारों की चर्चित राजनीतिक हलचलों, प्रोटोकॉल विवाद, अविश्वास प्रस्ताव और चर्चाओं पर आधारित व्यंग्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

हाइलाइट्स:
'महापौर और अध्यक्ष' की कप्तानी फेल
नगर निगम के गलियारों से छनकर आ रही खबर बड़ी दिलचस्प है। कहते हैं कि राजनीति में दोस्त और दुश्मन स्थाई नहीं होते, लेकिन यहां तो जनता के गुस्से ने धुर विरोधियों को ही गले मिलवा दिया। सत्तापक्ष के महापौर और विपक्ष के निगम अध्यक्ष अपनी-अपनी ढपली बजाने में इतने मस्त रहे कि उनके पैरों के नीचे से राजनीतिक जमीन ही खिसक गई। दोनों दलों के पार्षद अब तक अपनी ही नगर सरकार के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिस रहे थे, लेकिन जब वार्ड की जनता ने उन्हें पानी और सीवरेज के मुद्दे पर घेरना शुरू किया, तो पार्षदों का ईगो जाग गया। सियासी हलकों में चर्चा है कि सत्तापक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने मिलकर एक ऐसा 'क्रॉस-पार्टी' सिंडिकेट बना लिया है, जिसने महापौर और अध्यक्ष दोनों को सीधे बायपास कर दिया। पार्षदों ने गुपचुप रणनीति बनाई, एक-दूसरे को फोन घुमाया और नेताप्रतिपक्ष की अगुवाई में सीधे कमिश्नर की क्लास में हाजिरी लगा दी। कानाफूसी तो यह भी है कमिश्नर साहब भी भांप गए कि अगर ये बागी पार्षद भड़के, तो पूरी निगम सरकार ठप हो जाएगी। इसलिए उन्होंने बिना देर किए 15 दिन का डेडलाइन चैलेंज ले लिया और अगले ही दिन खुद व्यवस्थाएं दुरुस्त करने जमीन पर उतर गए। इस पूरे ड्रामे के बाद अब निगम के गलियारों में अधिकारी और कर्मचारी दबी जुबान में मुस्कुराते हुए पूछ रहे हैं अगर सारे काम कमिश्नर साहब को ही चुटकियों में करने थे और पार्षदों को सीधे उन्हीं के पास जाना था, तो फिर महापौर और अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे माननीय सिर्फ फीता काटने के लिए बचे हैं क्या? देखना दिलचस्प होगा कि दोनों शीर्ष पदों पर बैठे नेता अपनी इस राजनीतिक साख को बचाने के लिए अब क्या डैमेज कंट्रोल करते हैं।
लाल कालीन बिछाना भूल गए 'लाटसाहब'!
कहते हैं जब प्रशासनिक बाबू अपनी धुन में मस्त हों, तो बड़े-बड़े माननीयों का प्रोटोकॉल भी हवा में उड़ जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ रीवा के एक बड़े सरकारी दफ्तर में, जहां कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त एक आयोग के अध्यक्ष बड़े चाव से समीक्षा बैठक लेने पहुंचे थे। पर भाई साहब, यहां तो स्वागत की कौन कहे, एक अदद गुलाब का फूल देने वाला भी कोई नहीं मिला। सुना है, दफ्तर के मुखिया जी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की धुन में इस कदर लीन थे कि उन्हें याद ही नहीं रहा कि बाहर कोई वीआईपी मेहमान इंतजार कर रहे हैं। अध्यक्ष जी आधे घंटे तक "कोई है" की मुद्रा में बैठे रहे और जब पारा 100 डिग्री पार हुआ, तो बिना मीटिंग किए ही बैरंग लौट गए। अब गलियारों में चर्चा है कि साहब को वीसी प्यारी थी या अपनी कुर्सी, क्योंकि अध्यक्ष जी जाते-जाते कारण बताओ नोटिस का ऐसा बम फोड़ गए हैं कि पूरे दफ्तर में हड़कंप मच गया है।
जनपद में 'पतिशाही' का अंत? सवाल पूछने पर उपाध्यक्ष 'गेट आउट'
जनपद पंचायत इन दिनों विकास के लिए नहीं, बल्कि अध्यक्ष पति के पावर-प्ले और तानाशाही के लिए सुर्खियों में है। यहां जनता ने चुनकर तो महिला अध्यक्ष को भेजा था, लेकिन मलाई और कमान उनके 'पतिदेव' संभाल रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा पिछली बैठक की है। जब उपाध्यक्ष ने पांचवें वित्त की राशि और बजट का हिसाब माँगा, तो सच सुनने की बजाय सिस्टम बौखला गया। आरोप है कि अध्यक्ष पति के इशारे पर जनपद सीईओ ने मर्यादा ताक पर रखकर उपाध्यक्ष को सीधे बैठक से गेट आउट कर दिया। उपाध्यक्ष का यह अपमान और बजट का बंदरबांट बाकी सदस्यों को हजम नहीं हुआ। 'गेट आउट' का करारा जवाब देने के लिए कुल 25 में से 22 सदस्य एकजुट हुए और अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन लेकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। सियासी गलियारों में कानाफूसी तेज है कि जो साहब कल तक दूसरों को बाहर का रास्ता दिखा रहे थे, अब 22 माननीय मिलकर उनकी ही 'परमानेंट विदाई' की स्क्रिप्ट लिख चुके हैं।
शार्ट सर्किट या सबूत स्वाहा?
मानना पड़ेगा बॉस, रीवा के मार्तंड स्कूल नंबर-2 की किस्मत इन दिनों कुछ ज्यादा ही चमकीली है! इधर बच्चों ने नीट का पेपर देकर चैन की सांस ली, उधर स्कूल के सीसीटीवी कंट्रोल रूम ने ऐसी आग पकड़ी कि पूरा शहर अब धुएं में सच ढूंढ रहा है। बाजार में चर्चा गरम है कि आग भी लगी तो कहां? सीधे उस 'तीसरी आंख' पर, जो दिनभर परीक्षा की कुंडली नोट कर रही थी। अब लोग चुटकी ले रहे हैं कि यह बिजली का शॉर्ट सर्किट था या किसी के दिमाग का सर्किट घूमा था। सुना था परीक्षा में गड़बड़ी रोकने को कैमरे लगते हैं, यहां तो परीक्षा के बाद कैमरों का ही काम तमाम कर दिया। लोग दबी जुबान में पूछ रहे हैं कि कहीं यह आग किसी रिकॉर्ड को ठिकाने लगाने का 'शॉर्टकट' तो नहीं थी। इस पर अब लोग सीधे तंज कस रहे है कि तार तो पूरे स्कूल में थे साहब, पर करंट सिर्फ उसी मशीन में क्यों दौड़ा जिसे सच उगलना था। अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि सीसीटीवी का बैकअप सुरक्षित है या डेटा भी धुआं-धुआं हो गया। देखते हैं इस आग के पीछे छुपा असली खिलाड़ी सामने आता है या फिर बेचारे चूहे और शॉर्ट सर्किट के सिर ठीकरा फोड़कर फाइल बंद कर दी जाती है।

वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर मिश्रा की पावर गैलरी में नगर निगम, जनपद पंचायत और प्रशासनिक गलियारों की चर्चित राजनीतिक हलचलों, प्रोटोकॉल विवाद, अविश्वास प्रस्ताव और चर्चाओं पर आधारित व्यंग्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
रीवा में वांछित गांजा तस्करी के आरोपी को उड़ीसा पुलिस ने गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर साथ ले गई। मामले के बाद स्थानीय पुलिस की कार्रवाई और वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रीवा के कुसमैदा घाट पर टमस नदी में अवैध रेत उत्खनन से पर्यावरण और जलस्तर पर संकट गहराया है। ग्रामीणों ने नवागत कलेक्टर से निष्पक्ष जांच, सख्त कार्रवाई और नदी संरक्षण की मांग की है।
रीवा के इटमा वाटर फॉल में सेल्फी लेते समय युवक तेज बहाव में बहकर लापता हो गया। पुलिस और एसडीआरएफ ने सर्च अभियान शुरू किया। एक माह में यह तीसरी ऐसी घटना है।
सीधी के संजय टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान एक साथ तीन बाघ पानी में आराम करते दिखाई दिए। दुर्लभ दृश्य ने पर्यटकों को रोमांचित किया। वन विभाग ने पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई।
पन्ना के आदिवासी परिवार को निजी खदान से 11.19 कैरेट जेम्स क्वालिटी हीरा मिला है। करीब 30 लाख रुपये मूल्य का यह हीरा शासकीय नीलामी में जाएगा। पिछले वर्ष भी परिवार को 93 लाख का हीरा मिला था।
सतना के नागौद क्षेत्र में अज्ञात चोर 7.20 किलोमीटर बिजली तार और 17 पोल क्षतिग्रस्त कर गए। आठ ट्रांसफार्मरों की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कई गांवों और 60 से अधिक किसानों की बिजली बाधित हो गई।
सतना के विंध्य चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज चुनाव में सतीश सुखेजा लगातार दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्होंने संदीप कुमार जैन को 243 मतों से हराकर इतिहास रचते हुए नया रिकॉर्ड बनाया।
सतना में खाद्य सुरक्षा विभाग ने होटल और खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच कर 32 लीटर अनुपयुक्त कुकिंग ऑयल नष्ट कराया। टीपीसी सीमा से अधिक तेल उपयोग करने वालों को सख्त चेतावनी और कार्रवाई के निर्देश दिए।
सतना कृषि उपज मंडी में रिकॉर्ड आवक से कारोबार बढ़ा, लेकिन तुलाई में देरी, जाम, शेड की कमी, बारिश का खतरा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से किसान एवं व्यापारी लगातार परेशान हैं।

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