रीवा और मऊगंज में भीषण गर्मी के बीच लगातार बिजली ट्रिपिंग और कटौती से उपभोक्ता परेशान हैं। बढ़ते लोड के कारण ट्रांसफार्मर और केबल जल रहे हैं, जबकि शिकायतों के निराकरण में घंटों लग रहे हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
एक ओर भीषण गर्मी ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। तापमान 40 डिग्री के करीब है। दूसरी तरफ बिजली विभाग की लापरवाही इस मामले में आग में घी डालने जैसा काम कर रही है। दिन में कई बार बिजली ट्रिपिंग हो रही है। असमय आपूर्ति ठप होने से आम उपभोक्ता परेशान है। इसका कारण गर्मी में लोड बढ़ने को माना जा रहा है। जिसके चलते ट्रांसफार्मर और केबिल जल रही है। यह हाल केवल शहर संभाग का नहीं बल्कि पूरे सर्किल यानी रीवा व मऊगंज जिले का है।
कहने को तो बिजली वितरण कंपनी की ओर से हर साल मेंटीनेंस के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं। लेकिन यह काम केवल कागजों में होता है। जिसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को गर्मी आने पर भुगतना पड़ता है। बताया जा रहा है कि घटिया केबिल और क्षमता से कम लगे ट्रांसफार्मर गर्मी में लोड बढ़ने के कारण जलने लगते हैं, जिसकी वजह से बिजली ट्रिपिंग की समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह समस्या हर वर्ष गर्मी में देखने को मिलती है, बावजूद इसके सुधार नहीं हो पा रहा है। गर्मी शुरू होते ही लोग फ्रिज, कूलर, एसी का इस्तेमाल ज्यादा करने लगते हैं। गर्मी के चलते ज्यादातर समय लोग अपने घर में ही गुजारते हैं। जिसके चलते 24 घंटे ज्यादा खपत लेने वाले ऐसे विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल भी अधिक हो रहा है। यही वजह है कि अचानक से ट्रांसफार्मर उड़ जाता है और सप्लाई बंद हो जाती है।
पिछले साल से 58 लाख यूनिट बढ़ी खपत
वर्ष 2025 में अप्रैल का महीना गर्मी के मामले में पीछे नहीं था। गर्मी ने पिछले साल भी खूप तपाया था। तब भी रिकार्ड तोड़ बिजली का उपयोग हुआ था। बिजली विभाग के आंकड़ों की मानें तो अप्रैल 2025 में कुल 1400 लाख यूनिट 30 दिनों में खर्च हुआ था। जबकि अप्रैल 2026 में यह आकड़ा 1458 लाख यूनिट पहुंच गया है। अनुमान है कि मई और जून माह में खपत इससे भी कहीं ज्यादा बढ़ जायेगी।
शिकायत निराकरण में लग जाते हैं घंटों
बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के उदासीन रवैये का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। यदि बिजली आपूर्ति किसी कारण वश बाधित हो गई है तो उपभोक्ताओं के द्वारा शिकायत की जाती है। लेकिन इसके बाद भी बिजली सुधारने में घंटों का समय लग जाता है। रात में तो यह स्थिति और भी भयावाह हो जाती है। रात में यदि बिजली बंद हुई तो वह सुबह ही सुधर पाती है।


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