उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में विवादित मस्जिद का ढांचा ढहाए जाने के बाद मलबे के नीचे 20 फीट गहरा और 100 साल पुराना प्राचीन कुआं मिला है।

सहारनपुर। स्टार समाचार वेब
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। हाल ही में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक विवादित मस्जिद के ढांचे को प्रशासनिक कार्रवाई के तहत ढहा दिया गया था। अब इसी ढहाए गए ढांचे के मलबे की सफाई के दौरान जमीन के अंदर से लगभग 100 साल पुराना एक प्राचीन कुआं निकला है। अधिकारियों के मुताबिक यह कुआं करीब 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा है, जिसे फिलहाल सुरक्षा के लिहाज से लोहे की चादर से ढक दिया गया है।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को बुलडोजर चलाकर लगभग 16 घंटे की लंबी कार्रवाई के बाद विवादित मस्जिद के ढांचे को पूरी तरह गिरा दिया गया था। इसके बाद रविवार सुबह जब मजदूर मलबे को हटाने और सफाई करने का काम कर रहे थे, तभी जमीन पर एक कंक्रीट का स्लैब दिखाई दिया। जब प्रशासन के निर्देश पर कटर की मदद से इस भारी-भरकम स्लैब को काटा गया, तो उसके ठीक नीचे एक गहरा कुआं नजर आया।
कुएं के आयाम: यह कुआं लगभग 20 फीट गहरा और 1.5 मीटर चौड़ा है।
मौके पर पहुंचे अधिकारी: कुआं मिलने की खबर फैलते ही सहारनपुर के उपजिलाधिकारी (SDM) सुबोध कुमार तुरंत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
ASI को सूचना: कुएं के ऐतिहासिक महत्व और प्राचीनता का सही पता लगाने के लिए प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इसकी आधिकारिक सूचना दे दी है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कुआं लगभग एक शताब्दी (100 साल) पुराना हो सकता है। पुराने दौर में जब आधुनिक जल आपूर्ति या नल की व्यवस्था नहीं हुआ करती थी, तब ऐसे कुएं ही पानी का मुख्य स्रोत हुआ करते थे। इसके अलावा, मस्जिदों के पास पारंपरिक रूप से वजू करने और स्नान करने के लिए कुओं का निर्माण कराया जाता था। हालांकि, इस कुएं की सटीक उम्र और इसके इतिहास से जुड़ी वास्तविक जानकारी पुरातात्विक विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ पाएगी।
घटनास्थल की अत्यधिक संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं।
लोहे की चादर से ढका गया: किसी भी दुर्घटना से बचने और कुएं के भीतर मलबा या मिट्टी गिरने से रोकने के लिए इसे मजबूत लोहे की चादर से पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
पुलिस छावनी बना परिसर: पूरे कलेक्ट्रेट क्षेत्र में भारी पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। किसी भी बाहरी व्यक्ति या आम नागरिक को उस संवेदनशील स्थल के आसपास जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
यह पूरा मामला कानूनी और प्रशासनिक लड़ाइयों का परिणाम रहा है। इस विवाद की शुरुआत साल 2025 में हुई थी, जब बजरंग दल के क्षेत्रीय संयोजक विकास त्यागी ने सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित यह ढांचा अवैध रूप से बनाया गया है।
अदालत का फैसला: मामले की सुनवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने ढांचे को अवैध करार दिया और इसे गिराने के आदेश दिए।
अपील खारिज: इस फैसले के खिलाफ मस्जिद प्रबंध समिति ने जिला अदालत का रुख किया था, लेकिन 2 सितंबर को जिला अदालत ने भी प्रबंध समिति की अपील को खारिज कर दिया।
16 घंटे की कार्रवाई: कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शनिवार को इस विवादित ढांचे को बुलडोजर की मदद से लगभग 16 घंटे की लंबी कार्रवाई के बाद पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।

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