मंडी बोर्ड के सार्थक ऐप में लोकेशन छेड़छाड़ कर फर्जी हाजिरी लगाने का मामला सामने आया है। सतना, मैहर समेत छह जिले दागदार हुए, जबकि रीवा में सबसे ज्यादा कर्मचारी चिन्हित किए गए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सिस्टम पर भरोसा कर बनाई गई डिजिटल व्यवस्था को ही कर्मचारियों ने मजाक बना दिया। सार्थक ऐप में लोकेशन से छेड़छाड़ कर घर बैठे हाजिरी लगाई गई और बिना काम के वेतन उठाया गया। अब जब मामला सामने आया है। मसला मंडी का । जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सार्थक ऐप से हाजिरी लगाने की व्यवस्था में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि कई अधिकारी-कर्मचारी बिना कार्यालय पहुंचे ही घर बैठे या अन्य स्थानों से उपस्थिति दर्ज कर पूरे माह का वेतन उठा रहे थे। मामला सामने आते ही मंडी बोर्ड सख्त हो गया है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बोर्ड की सूची में इनके नाम
सतना जिले में सहायक संचालक करूणेश तिवारी, नाकेदार बलेंद्र शेखर अग्निहोत्री, दिनेश कुमार उरमलिया, कृष्ण पाल सिंह, लक्ष्मीकांत शुक्ला, पंकज सिंह चौहान, पूनम पाठक, प्रतीक सिंह गहरवार, रावेंद्र सिंह परिहार और वरुण त्रिपाठी के नाम सामने आए हैं। मैहर में अमित कुमार शुक्ला, बृजभान प्रसाद बाजरा, देव प्रताप पनिका, शिवेंद्र मिश्रा, शुभेंदु पांडे और वीरेंद्र कुशवाह शामिल हैं। वहीं रीवा जिले में अंबुज तिवारी, आनंद मिश्रा, अशोक सिंह, धनेंद्र वर्मा, गायत्री बैगा समेत 18 कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है।
सतना मंडी सचिव का भी नाम
तीन महीनों की उपस्थिति रिपोर्ट के परीक्षण में यह गंभीर अनियमितता पकड़ी गई। रिपोर्ट के अनुसार रीवा-शहडोल संभाग के रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, अनूपपुर और शहडोल जिलों में यह खेल चल रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सतना जिला की कृषि उपज मंडी के सचिव करुणेश तिवारी जो सहायक संचालक होने के साथ रीवा कृषि उपज मंडी के प्रभारी सचिव भी हैं, उनका नाम भी इस सूची में शामिल है।
रीवा में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
मंडी बोर्ड की सूची में सबसे अधिक मामले रीवा जिले से सामने आए हैं। यहां 18 अधिकारी-कर्मचारियों ने कथित तौर पर कार्यालय से दूर रहकर ही उपस्थिति दर्ज की और वेतन लिया। सतना में 10, मैहर में 6, मऊगंज, शहडोल और अनूपपुर में 2-2 कर्मचारी इस गड़बड़ी में चिन्हित किए गए हैं। सूची में नाकेदार (सहायक उप निरीक्षक), लेखाकार, उपयंत्री और चपरासी जैसे विभिन्न पद शामिल हैं।
7 दिन में जवाब 10 दिन में रिपोर्ट
मंडी बोर्ड ने इसे गंभीर सेवा आचरण उल्लंघन मानते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चिन्हित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिनों में जवाब लें। साथ ही 10 दिनों के भीतर कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजना अनिवार्य किया गया है।
सवाल बड़ा: सिस्टम फेल या मिलीभगत?
यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। जब जिम्मेदार अधिकारी ही इस खेल में शामिल पाए जा रहे हैं, तो यह तय करना मुश्किल नहीं कि सार्थक ऐप निगरानी का साधन कम और कमाई का जरिया ज्यादा बन गया था। अब देखना होगा कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या वाकई जिम्मेदारों पर गाज गिरती है।

रीवा जिले में गेहूं खरीदी की घोषणा के तीन दिन बाद भी एक क्विंटल तौल नहीं हुई। बारदाने की कमी, भरे गोदाम और प्रशासनिक लापरवाही से किसान परेशान होकर लौट रहे हैं।
रीवा में टाटा एनर्जी 28 हजार करोड़ निवेश से पावर प्लांट लगाएगी। एक हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन होगा और पांच हजार युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
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रीवा के बिछिया थाना क्षेत्र में डकैती की कोशिश नाकाम रही। घर में घुसे नकाबपोश बदमाश परिवार के जागने पर भाग निकले। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई, पुलिस जांच में जुटी।
सीधी के गांधी चौक में पत्नी को वापस बुलाने की जिद में युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। घंटों हाईवोल्टेज ड्रामा चला, बाद में पुलिस की समझाइश पर सुरक्षित नीचे उतरा।
सतना के व्यंकट वन स्कूल में जनगणना प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों और प्रगणकों को बदबूदार व दूषित भोजन परोसा गया। नाराज प्रशिक्षुओं ने थालियां फेंकी, ठेकेदार को फटकार लगाई गई।
मंडी बोर्ड के सार्थक ऐप में लोकेशन छेड़छाड़ कर फर्जी हाजिरी लगाने का मामला सामने आया है। सतना, मैहर समेत छह जिले दागदार हुए, जबकि रीवा में सबसे ज्यादा कर्मचारी चिन्हित किए गए।
सतना जिला अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए अब आभा आईडी अनिवार्य कर दी गई है। नए नियम से गंभीर मरीजों और परिजनों को लंबी लाइन, तकनीकी दिक्कतों व देरी की समस्या झेलनी पड़ेगी।
सतना के मझगवां वनक्षेत्र स्थित देवलहा बीट में भीषण आग भड़क उठी। तेज लपटों में दो वनकर्मी झुलस गए। लेंटाना झाड़ियों से आग तेजी से फैली, कई हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ।
सतना जिला अस्पताल में 400 बिस्तरों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। नर्सिंग स्टाफ की कमी, छुट्टियां और उच्च शिक्षा के लिए अवकाश से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने लगी है।

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