सतना जिला अस्पताल में रविवार को छह घंटे बिजली बंद रहने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। ब्लड बैंक की ऑनलाइन व्यवस्था ठप रही और परिजन घंटों कतार में खड़े रहे। बैकअप व्यवस्था पर सवाल उठे।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल में रविवार को करीब 6 घंटे तक बिजली बंद रहने से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चले विद्युत कार्य के दौरान कई वार्ड अंधेरे में डूबे रहे जिससे मरीजों और उनके परिजनों को गर्मी और उमस के साथ कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे गंभीर हालात ब्लड बैंक के दिखे जहां सुबह से परिजन ब्लड का इंतजार करते दिखाई दिए। बिजली की समस्या के चलते सिस्टम की नाकामी के बाद ब्लड बैंक की चौखट पर हंगामे की स्थिति भी देखी गई। पड़ताल में पता चला कि कई मरीज जोकि निजी अस्पतालों में भर्ती थे उनके परिजन सुबह से ब्लड लेने के लिए कतार में खड़े थे। इसके अलावा मैहर से भी ब्लड लेने परिजन सतना पहुंचे थे। जिला अस्पताल में लम्बे समय से फाल्ट केबिलों को जोड़ कर चलाई जा रही तारों को आखिरकार बदलने का निर्णय लिया गया। रविवार को जिला अस्पताल में स्थापित ट्रांसफार्मर से डायलिसिस यूनिट तक नई केबिल खींची गई। बताया गया कि इस कार्य में बिजली कम्पनी के कर्मियों द्वारा सहयोग किया गया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में बिजली गुल होने की शिकायत मरीजों के परिजनों ने सीएम हेल्पलाइन में की गई है।
ब्लड बैंक में दिखा सबसे ज्यादा असर, दिन भर लगी रही कतार
बिजली बंद होने का सबसे ज्यादा असर ब्लड बैंक में देखने को मिला। सिस्टम बंद होने से ब्लड जारी करने की प्रक्रिया ठप हो गई। कई मरीजों के परिजन सुबह से शाम तक ब्लड लेने के लिए कतार में खड़े रहे। हालांकि ब्लड बैंक विभाग की मानें तो बिजली बंद होने के बाद कई गंभीर मरीजों को आफ लाइन ब्लड मुहैया कराया गया। बिजली बंद होने के चलते आॅनलाइन ब्लड इश्यू नहीं किया जा रहा था। बिजली आने के बाद उन्हें कम्प्यूटर में आॅनलाइन दर्ज किया गया लेकिन मौके पर मौजूद परिजनों ने कहा कि सुबह 10 बजे से बैठे हैं अभी तक किसी को ब्लड नहीं दिया गया है।
बैकअप व्यवस्था फेल मचा हंगामा
बिजली जाने के दौरान अस्पताल परिसर की बैकअप व्यवस्था भी फेल नजर आई। ब्लड बैंक जैसे संवेदनशील जगह में बैकअप व्यवस्था न होना यह भी चिकित्सकीय व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। इससे ब्लड बैंक में अफरा- तफरी और हंगामे जैसी स्थिति बन गई। परिजन घंटों इंतजार करते रहे लेकिन तकनीकी व्यवस्था ठप होने के कारण कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा था। इस पूरे मामले ने अस्पताल की आपातकालीन तैयारियोें और बैकअप सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लम्बे समय से अस्पताल परिसर में बिजली व्यवस्था को लेकर समस्याएं देखने को मिल रही थीं। लाइनमैन के द्वारा बताया गया कि कई जगह विद्युत तारें फाल्ट हैं, रविवार को ट्रांसफार्मर से डायलिसिस तक नई तारें खिंचवा दी गई हैं, इसी के चलते बिजली आपूर्ति बंद थी जबकि बैकअप व्यवस्था शुरू थी। ब्लड बैंक में क्या हुआ इसकी जांच करवाएंगे।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल
ब्लड की कमी के चलते पत्नी निजी नर्सिंग होम में भर्ती हैं, सुबह दस बजे से ब्लड का इंतजार कर रहे हैं, लाइट नहीं है यह कहकर इंतजार करने को कहा गया है।
संजय विश्वकर्मा, पिण्डरा
बच्चे निजी अस्पताल मेंं भर्ती हैं, चार दिन पहले जन्में नवजातों को ब्लड की कमी बताई गई है, ब्लड के इंतजार में सुबह से ब्लड बैंक के सामने कतार में लगे हुए हैं।
पूजा कुशवाहा, सतना
बच्ची को खून की कमी बताई गई है, बच्ची जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती है। सुबह 11 बजे से लाइट गोल है और ब्लड बैंक वालों ने लाइट आने का इंतजार करने के लिए कहा है लेकिन शाम चार बजे तक लाइट नहीं आई।
राधा पटेल, मैहर
ब्लड के लिए 10 बजे से लाइन में लगे हुए हैं, बिजली नहीं है यही बार-बार कहा जा रहा है। ऐसे संवेदनशील जगह पर बैकअप व्यवस्था भी नहीं की गई है। क्या इंसान के मरने के बाद ही खून उपलब्ध हो पाएगा?
कृष्णकांत द्विवेदी, बकिया


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