सतना जिला अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हील चेयर गायब, मरीजों को गोद व कंधों पर ले जाने की मजबूरी, प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सरदार बल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल से स्ट्रेचर गायब हो गए हैं। सोमवार को ऐसे ही कई नजारे देखने को मिले जिसमें परिजन मरीज को गोदी के सहारे या लाठी के सहारे वार्ड तक ले जाने मजबूर दिखे। गेट पर खड़ा सिक्योरिटी गार्ड भी यह तमासा देखता रहा। घंटे भर परिजन मरीज को इलाज के लिए ले जाने परेशान दिखे लेकिन न तो वार्ड ब्वाय ने मदद की और न ही सिक्योरिटी गार्ड ने। सोमवार को करीब 7 मरीज ऐसे आए जिन्हें न तो स्ट्रेचर मिला न ही व्हील चेयर। इन घटनाओं ने अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए।
केस-1: जानकारी के अनुसार पहले मरीज के परिजन प्रमोद दोपहर 1 बजे के करीब अपनी मां को एम्बुलेंस से अस्पताल लाए थे, परिजन की मां का पैर फ्रैक्चर था। एम्बुलेंस से उतरने के बाद उन्होंने आधे घंटे तक स्ट्रेचर को जिला अस्पताल में ढूंढा लेकिन कहीं भी स्ट्रैचर उपलब्ध नहीं मिला, मजबूरन परिजनों ने मरीज को गोद में टांगकर इमरजेंसी वार्ड में उपचार के लिए ले गए।
केस-2: दूसरा मामला रामपुर बाघेलान क्षेत्र का है, यहां भी मरीज को ले जाने स्ट्रेचर या व्हील चेयर नहीं मिली तो परिजनों को लाठी का सहारे से मरीज को एक्स-रे कराने ले जाना पड़ा।
केस-3: गंभीर गर्भवती को नहीं मिली व्हील चेयर न ही स्ट्रेचर, मजबूरन मरीज को कंधों के सहारे गायनी वार्ड तक ले जाना पड़ा।
13 स्ट्रेचर एवं 28 व्हील चेयर, मौके पर एक भी नहीं
जिला अस्पताल में प्रबंधन द्वारा मरीजों के लिए 13 स्ट्रेचर एवं 28 व्हील चेयर की उपलब्धता कराई गई है लेकिन मौके पर एक भी नजर नहीं आती। प्रबंधन के अनुसार हर वार्ड के बाहर व्हील चेयर की उपलब्धता भी कराई गई है। इसके अलावा 8 नए स्ट्रेचर तैयार करने के निर्देश हैं एवं पुराने 4 स्ट्रेचरों को रिपेयरिंग के निर्देश दिए गए हैं। बड़ी बात यह है कि 400 बिस्तरा अस्पताल में रोजाना 1200 से 1300 मरीज इलाज करवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन कम संसाधनों के चलते मरीज को उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
वार्ड ब्वाय को ढूढ़ लाओ, इनाम पाओ
यहां यह वार्ड ब्वाय को ढूढ लाओ और इनाम पाओ वाली कहावत भी सिद्ध हो रही है। देखा जाए तो जिला अस्पताल के रजिस्टर में करीब 25 वार्ड ब्वाय की उपस्थिति रोज दर्ज की जाती है लेकिन मौके पर कोई भी वार्ड ब्वाय उपलब्ध नहीं रहता। इन वार्ड ब्वायों की अलग-अलग जगहों पर तैनाती की गई है। इमरजेंसी वार्ड के बाहर भी दो वार्ड ब्वाय की तैनाती है, लेकिन यहां हाल ऐसा है कि परिजन वार्ड ब्वाय को ढूढ़ते परेशान नजर आते हैं, अंतत: परिजनों को ही मरीज को लाने- ले जाने के लिए विवश होना पड़ता है।
जिला अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हील चेयर की कोई कमी नहीं है, परिजनों द्वारा मरीज को ले जाने के बाद अन्यत्र जगहों पर स्ट्रेचर व व्हील चेयर को छोड़ दिया जाता है जिसके चलते मौके पर यह संसाधन मरीज को उपलब्ध नहीं हो पाते। अगर किसी कारण यह समस्या आई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
डा. शरद दुबे, आरएमओ जिला अस्पताल

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