सतना कृषि उपज मंडी में ई-मंडी योजना के नियमों की अनदेखी सामने आई है। तुलावटी की बजाय व्यापारी उनकी आईडी से तौल एंट्री कर रहे हैं, जिससे किसानों के हित प्रभावित होने की आशंका है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
ई-मंडी योजना के तहत मंडियों में तौल से जुड़ी पूरी जानकारी आॅनलाइन पोर्टल पर अनुज्ञप्तिधारी तुलावटी द्वारा दर्ज किया जाना अनिवार्य है, लेकिन सतना कृषि उपज मंडी में इसके उलट स्थिति सामने आ रही है। यहां व्यापारी स्वयं तौल की जानकारी भर रहे हैं। वह भी तुलावटी की आईडी का उपयोग करके। यह व्यवस्था न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे किसानों के हितों पर सीधा असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। मंडी प्रशासन का तर्क है कि कई तुलावटी आॅनलाइन पोर्टल पर एंट्री करने में दक्ष नहीं हैं, इसलिए उनके सहयोग के लिए व्यापारियों से जानकारी भरवाई जा रही है। हालांकि, यह तर्क सवालों के घेरे में है क्योंकि राज्य स्तर पर इस विषय में पहले ही सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके, संभाग की ए ग्रेड मानी जाने वाली सतना मंडी सहित सतना-मैहर जिले की अन्य मंडियों में भी आदेशों का पालन नहीं हो रहा। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड को अन्य मंडियों से भी ऐसी शिकायतें मिली थीं। इसके बाद बोर्ड के एमडी ने सभी मंडी सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ई-मंडी पोर्टल पर तौल की एंट्री केवल तुलावटी ही करेंगे। साथ ही, नियम उल्लंघन पर नाराजगी जताते हुए संयुक्त संचालकों को मंडियों के नियमित निरीक्षण के आदेश भी दिए गए थे।
किसान हो सकते हैं ठगी का शिकार
प्रक्रिया के अनुसार किसान की उपज की पहले नीलामी होती है, फिर संबंधित तुलावटी काटा क्रमांक के अनुसार तौल कर उसकी एंट्री ई-मंडी पोर्टल पर करता है। इसी दर्ज तौल के आधार पर किसान को भुगतान होता है। लेकिन जब व्यापारी ही तुलावटी की आईडी से लॉग-इन कर तौल की जानकारी भर रहा है, तो तौल कम दिखाने और कम भुगतान करने की गुंजाइश बन जाती है। यानी हर सौदे में थोड़ा-थोड़ा घटाकर किसान को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
आदेश में वैकल्पिक व्यवस्था साफ
मंडी बोर्ड द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि तुलावटी कम हों या तकनीकी दिक्कत आए, तो मंडी का अधिकृत कर्मचारी तौल एंट्री करेगा व्यापारी नहीं। इसके बावजूद व्यापारियों द्वारा तुलावटी की आईडी से एंट्री होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
आईडी-पासवर्ड कैसे पहुंचे व्यापारियों तक?
तुलावटी संघ का कहना है कि व्यापारियों को तुलावटी की आईडी और पासवर्ड मिलना गंभीर मामला है। कई बार जब तुलावटी स्वयं एंट्री करने पहुंचते हैं, तो जानकारी पहले से भरी मिलती है। उनका आरोप है कि यह सब प्रशासनिक मिलीभगत के बिना संभव नहीं।
कुछ तुलावटियों के आईडी पासवर्ड ले रखें है व्यापारी। इसकी शिकायत मंडी प्रशासन से कई बार कर चुके हैं।
शरद परौहा, अध्यक्ष तुलावटी संघ
कई बार व्यवस्था बदली गई है तो हो सकता है ऐसा हो। लेकिन यह गलत है। जो जिसका काम है उसे ही करने देना चाहिए।
विनोद अग्रवाल, सचिव, कृषि उपज व्यापारी संघ
तौल तुलावटी करता है और ई मंडी में चढ़ाता है। फरवरी तक यह सब ठीक हो जाएगा।
करुणेश तिवारी, सचिव, कृषि उपज मंडी


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