सतना जिले में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बिना एनओसी के विद्युत विभाग द्वारा पोल गाड़े जा रहे हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सौ से ज्यादा पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में नाराजगी है। पत्राचार तक सीमित पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बिना अनुमति लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) की जमीन पर बिजली के खंभे गाड़े जा रहे हैं। कैमरी पहाड़ से बाबूपुर तक बिछाई जा रही 15 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइन से जुड़े इस कार्य में न तो पीडब्लूडी की एनओसी ली गई है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है। खंभे सड़क की पटरी पर तय दूरी से बेहद करीब गाड़े जा रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा मंडरा रहा है। साथ ही, तकरीबन सौ हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने पर्यावरण प्रेमियों को भी आक्रोशित कर दिया है। बिना अनुमति सरकारी जमीन पर खंभे गाड़ना, हरे पेड़ों की अवैध कटाई और सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक गंभीर मामला है। लोक निर्माण और विद्युत विभाग के बीच तालमेल की कमी से आमजन की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी चेतते हैं या फिर हादसे के बाद जागते हैं।
बिना एनओसी के हो रहा निर्माण कार्य
लोक निर्माण विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि सड़क के मध्य से 15 मीटर की परिधि में कोई भी निर्माण या ढांचा नहीं लगाया जा सकता, लेकिन विद्युत विभाग ने इन निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पीडब्लूडी ने सतना-कोटर-अबेर मार्ग (35 किमी) और सतना-सेमरिया मार्ग (19 किमी) में खंभों को सही दूरी पर लगाने संबंधी पत्र विद्युत विभाग को जारी किए थे। 29 जुलाई को भेजे गए पत्र क्रमांक 2567/कार्य/4-22/2024-2025 और 4 मार्च के पत्र क्रमांक 1153/कार्य/2-130/2024-2025 में खंभों को सड़क के केंद्र से कम से कम 15 मीटर दूर लगाने का निर्देश था। मगर इन पत्रों का न तो कोई जवाब आया, न ही विद्युत विभाग ने अपने कार्य में बदलाव किया।
हादसों को आमंत्रण देते खंभे
सड़क के किनारे मनमाने ढंग से गाड़े जा रहे खंभे दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। कैमरी पहाड़ से बाबूपुर तक की सड़क पर कई ‘ब्लैक स्पॉट’ पहले से ही चिन्हित हैं, जहां पहले भी गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। अब इन स्थानों पर बिजली के खंभे लग जाने से स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। पीडब्लूडी के कार्यपालन यंत्री बीआर सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से इन खतरों की आशंका जताई है और विद्युत विभाग को कार्य में सुधार करने का अनुरोध किया है।
पेड़ों का बेरहमी से हुआ कत्ल
विद्युत पोल लगाने के लिए बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया है। जानकारी के अनुसार कैमरी पहाड़ से बाबूपुर के बीच लगभग 100 पेड़ों को बिना किसी पूर्व स्वीकृति या एनओसी के काटा गया है। सवाल यह उठता है कि क्या विद्युत विभाग ने पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग या पर्यावरणीय स्वीकृति ली थी? यदि नहीं, तो फिर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? आम नागरिक यदि पेड़ काटता है तो उस पर तुरंत कानूनी कार्रवाई होती है, फिर सरकारी विभागों को इस से क्यों छूट दी जा रही है?
खानापूर्ति तक सीमित है पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई
जहां एक ओर पीडब्लूडी खुद मानता है कि खंभे मनमाने तरीके से लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग केवल पत्राचार कर अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है। न तो मौके पर जाकर कार्य रुकवाया गया, न ही उच्चाधिकारियों के समक्ष कोई ठोस कार्रवाई प्रस्तावित की गई। क्षेत्रवासियों का सवाल है कि यदि ऐसा निर्माण किसी आम व्यक्ति द्वारा किया गया होता, तो क्या पीडब्लूडी यूं ही चुप बैठा रहता?
स्थानीय जनता में नाराजगी, जवाबदेही तय करने की मांग
क्षेत्र के लोगों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकारी विभागों के इस प्रकार के असंवेदनशील रवैये से न केवल आम जन की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, बल्कि सरकारी जमीन और पर्यावरण की भी खुलेआम अनदेखी हो रही है। लोगों ने मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
सड़क व पटरी के इर्द-गिर्द सड़क के मध्य से 15 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। सतना-सेमरिया मार्ग में खंभे लगाने के दौरान नियमों की अनदेखी हुई है। इस संबंध में विद्युत कंपनी के अधीक्षण यंत्री को पत्र भी लिखा गया है।
बीआर सिंह, कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी
जहां की जानकारी आती है वहां मौके पर भेजकर कार्रवाई की जाती है। कई बार पोल गाड़ने वाली ठेका कंपनी नियमों का ध्यान नहीं रखती तो ऐसी समस्याएं आती हैं। य्रादि ऐसा कोई मामला सामने आता है तो उस पर नियमपरक कार्रवाई की जाएगी।
पीके मिश्रा, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण कंपनी


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