सतना और मैहर वनमंडलों में संरक्षित नीलगाय लगातार शिकारियों के निशाने पर है। सर्दियों में घटनाएं बढ़ीं, फसल नुकसान और अवैध मांस कारोबार संभावित कारण माने जा रहे हैं, जबकि वन विभाग कार्रवाई में जुटा है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
नीलगाय को वन विभाग ने संरक्षित श्रेणी का प्राणी घोषित कर रखा है इसके बाद भी सतना-मैहर मंडल में यही वन्यप्राणी निशाने पर रही। सीधा-सीधा कहें तो दोनों वनमंडलों में यह सॉफ्ट टारगेट बनी। यह सब ठंड के दिनों में अधिक हुआ। इधर, ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर इस बात को हवा दी है कि जिस वन्य प्राणी का न मांस काम आता न सींग उस पर निशाना क्यों साधा जा रहा है? क्या फसल बचाना एक वजह है? या कुछ ऐसा है जिसकी तफ्तीश कायदे से नहीं हो पाई है? सतना-मैहर के दोनों वनमंडल में नीलगाय बड़ी संख्या में हैं। यह वन्यप्राणी फसलों के बीच में दौड़ और चर कर नुकसान पहुंचाती है जिसे लेकर किसान करंट आदि की बाड़ बनाते रहे हैं। यह प्रक्रिया अब परंपरा बन चुकी है जिसके चलते कई बार वन्यप्राणी मारे गए हैं। इसके अलावा कई बार शिकारी भी इसी वन्यप्राणी को अपने टारगेट पर रखते हैं। बीते जनवरी माह में तीन बड़ी घटनाओं ने यह साबित किया था। हालांकि जिस तादाद में नीलगाय हैं उस पर शिकारियों पर शिकंजा कसने में वन विभाग के वनपरिक्षेत्रों में तैनात दल-बल ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। यही कारण है कि तदाद और शिकार के बीच अच्छा खासा नियंत्रण देखने को मिला।
दूसरे जानवर का बता के बेचने का ट्रेंड
नीलगाय को लेकर दो तरह की बातें सामने आई हैं। वन के जानकारों का एक पक्ष यह मानता है कि नीलगाय का मांस खाने के हिसाब अपेक्षाकृत कम स्वाद वाला माना जाता है। दूसरा पक्ष यह कहने से नहीं चूक रहा है कि नीलगाय के मांस को खाने से ज्यादा बेचने का काम किया जाता है। यह औने-पौने दामों में किसी अन्य जानवर का बता कर बेचा जाता है। यही वजह है आदतन शिकारी अपने टारगेट पर रखता है।
सर्दी में ही शिकारी की सक्रियता
दोनों ही वनमंडलों में सर्दी का समय ऐसा रहा जब शिकारी सक्रिय नजर आए। दोनों वन मंडलों की अलग-अलग वनपरिक्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक शिकारी फंदा लगाते और शिकार करते पाए गए। इन पर हुई कार्रवाई ने यह बताया कि दल-बल सक्रिय है लेकिन एक टेंÑड सामने आया कि सर्दी के सीजन में ही शिकारी पकडेÞ गए। इसके अलावा इसी सीजन नीलगाय इन शिकारियों का सॉफ्ट टारगेट रही।
इन वनपरिक्षेत्र में ज्यादा नीलगाय
यों तो सतना और मैहर वनमंडल में नीलगाय की तादात अच्छी खासी है लेकिन दोनों वनमंडलों में कुछ वनपरिक्षेत्र ऐसे हैं जहां नीलगाय की संख्या बेहतर कही जा रही है। इसमें मझगवां, चित्रकूट, सिंहपुर, नागौद (उचेहरा), बरौंधा और अमरपाटन विशेष रुप से गिने जाते हैं। इनमें से नागौद, सिंहपुर, अमरपाटन और मझगवां में नीलगाय के शिकारी पकडेÞ गए थे। इनसे शिकार के लिए प्रयुक्त सामग्री भी मिली थी।
इन तारीखों में नीलगाय का शिकार


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