सतना-मैहर में पंचायतों के पंप कनेक्शनों पर 102.87 करोड़ बिजली बकाया संकट बन गया है। वसूली लगभग शून्य है, अधिभार बढ़ रहा है और बिजली कटौती की स्थिति में ग्रामीण जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के सतना सर्किल की ग्राम पंचायतों द्वारा संचालित पंप कनेक्शनों का बिजली बिल की वसूली अब बड़ा संकट बन गई है। आंकड़े बताते हैं कि दोनों जिले की पंचायतों का पंप बिल का कुल बकाया 102.87 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है जबकि बकाया चुकाने में पंचायतें कंजूसी कर रही हैं। हालात यह हैं कि कई ब्लॉकों में एक रुपए तक जमा नहीं हुआ, जिससे अधिभार लगातार बढ़ता जा रहा है।
तमाम मिशनों के माध्यम गांवों के घर-घर पानी पहुंचाने की स्कीम को बिजली बिल बकाया बना हुआ है। विद्युत वितरण कंपनी के कर्जदार पंचायतों का हाल यह है कि एक साल के अंदर भी एक पैसा नहीं चुकाया है। इधर, कंपनी बिल वसूलने के लिए हथकंडे अपना रही है लेकिन पंचायतों ने बकाया बिल नहीं चुकाया है जिससे अधिभार बढ़ रहा है। ऐसा ही रहा तो मूल बकाया से अधिभार अधिक हो जाएगा।
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के सतना सर्किल में ग्राम पंचायतों द्वारा संचालित पंप कनेक्शनों पर बिजली बिल का बकाया अब गंभीर वित्तीय संकट का रूप ले चुका है। मार्च 2025 से मार्च 2026 तक की अवधि के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जिले के विभिन्न ब्लॉकों में बकाया बिल की अधिभार सहित कुल देनदारी 102.87 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गई है, जबकि वसूली बेहद नगण्य रही है। आंकड़ों के हिसाब से सतना वृत्त की ग्राम पंचायतों के एक वर्ष की वास्तविक बिजली बिल देनदारी 95 करोड़ 62 लाख 33 हजार 346 है, जबकि अधिभार 7 करोड़ 25 लाख 42 हजार 766 है। इससे न केवल कंपनी पर आर्थिक दबाव बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण जल आपूर्ति व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासनिक नाक के नीचे के ब्लॉक की पंचायतों द्वारा बकाया बिल चुकाने के मामले में ढीली हैं। सर्किल से प्राप्त आंकड़ों में सोहावल ब्लॉक की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां 471 पंपों पर 19.46 करोड़ रुपए का बिल बकाया है और अधिभार ही जुड़ चुका है और कुल देनदारी 20.90 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि यहां भी कोई वसूली नहीं हुई। नागौद में 442 पंपों पर 17.68 करोड़ मूल और 1.21 करोड़ अधिभार सहित 18.89 करोड़ रुपए बकाया हैं।
इसी तरह मझगवां में 317 पंपों पर 7.48 करोड़ मूल और 64 लाख अधिभार सहित 8.13 करोड़ रुपए बकाया हैं, जहां एक भी रुपए की वसूली नहीं हो सकी। रामपुर बाघेलान ब्लॉक में 389 पंपों पर 8.15 करोड़ मूल और 51 लाख अधिभार मिलाकर 8.66 करोड़ रुपए शेष हैं। उचेहरा ब्लॉक में 312 पंपों पर 9.34 करोड़ मूल और 73 लाख अधिभार सहित 10.07 करोड़ रुपए बकाया हैं।
पांचवें वित्त से चुकाने की बात
पंपों का बिजली बिल जमा करने में कंजूसी कर रही पंचायतों को पूर्व में ही निर्देश दिए गए थे लेकिन धनराशि और मदों को लेकर जारी बेपरवाही और मनमाने रवैया के चलते बिजली का बकाया तक नहीं जमा कर सके। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों को पांचवें वित्त की राशि से बिजली जैसा बिल चुकाने के निर्देश है लेकिन पंचायतें इसका उपयोग नहीं कर रही हैं हालांकि कुछ पंचायतों ने इसका उपयोग भी किया है।
मैहर की पंचायतों का भी यही हाल
मैहर जिला के तीनों ब्लॉक की पंचायतों की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। यहां भी पंप का बिजली बकाया देने में कोताही बरती जा रही है। सर्किल के आंकड़ों के अनुसार अमरपाटन ब्लॉक में 884 पंप कनेक्शनों पर 18.28 करोड़ रुपए मूल राशि और 1.52 करोड़ रुपए अधिभार मिलाकर कुल 19.81 करोड़ रुपए की देनदारी बनी है। मैहर ब्लॉक में 545 पंपों पर 13.51 करोड़ मूल और 1.03 करोड़ अधिभार के साथ कुल 14.54 करोड़ रुपए देनदारी दर्ज है। रामनगर में 125 पंपों पर 16.93 करोड़ मूल और 1.38 करोड़ अधिभार सहित 18.32 करोड़ रुपए बकाया हैं।
मात्र एक ब्लॉक में जमा हुआ बकाया
पंचायतें धड़ल्ले से पंपों में बिजली खपत कर रही है लेकिन बिल जमा करने के मामले में आलसी बनी हुई है जिसके चलते सर्किल के ऊपर बोझ बढ़ रहा है। आंकड़ों से यह तस्वीर साफ हो गई है कि मात्र एक ब्लॉक की पंचायतों ने पंप का बकाया जमा करने में दिलचस्पी दिखाई है। यह ब्लॉक अमरपाटन हैं जहां बकाया राशि के विरुद्ध पंपों का बिल 4,349,692 रुपए जमा किा जा चुका है जबकि मझगवां, मैहर, रामनगर, रामपुर बाघेलान, उचेहरा, सोहावल और नागौद ब्लॉक की पंचायतों के एक आना तक जमा नहीं किया है।
कटी बिजली तो जलसंकट संभव
अधिकांश ग्राम पंचायतों ने बिजली बिल भुगतान में गंभीरता नहीं दिखाई है। समय पर भुगतान नहीं होने से अधिभार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कुल बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है। विद्युत कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यदि शीघ्र बकाया बिल नहीं जमा किया तो कनेक्शन विच्छेदन, सख्त वसूली अभियान जैसे कदम उठा रही है। हाल ही में मैहर की नगर पालिका की बिजली काट दी गई थी। अगर ऐसा हुआ तो गांवों में जलसंकट की स्थिति बन जाएगी। ऐसे में पंचायतें कैसे निबटेंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा।


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