सतना में धान उपार्जन अंतिम चरण में है। पश्चिमी विक्षोभ से बारिश की संभावना, केंद्रों पर रखे लाखों टन धान की सुरक्षा चुनौती।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
धान उपार्जन की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन इसी बीच मौसम का बदला रुख प्रशासन और किसानों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। शनिवार तक जिले में कुल 4647078 टन धान की खरीदी हो चुकी है, जबकि धान उपार्जन की अंतिम तिथि 20 जनवरी निर्धारित है। समय सीमा नजदीक होने के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण 19 और 21 जनवरी को बारिश की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उपार्जन केंद्रों पर रखी धान की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
4.61 एमटी धान रेडी टू ट्रांसपोर्ट
आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में 4613348 टन धान रेडी टू ट्रांसपोर्ट की स्थिति में है। यानी यह धान उपार्जन केंद्रों से आगे भेजे जाने के लिए तैयार है, लेकिन इसका पूरा उठाव अभी नहीं हो पाया है। अब तक 3626623 टन धान का डिस्पैच किया जा चुका है, जबकि 3437155 टन धान को स्वीकार्य (एक्सेप्टेड) घोषित किया गया है। इसके अलावा 3178200 टन धान वेयरहाउस में सुरक्षित रखी गई है, जो कुछ हद तक राहत देने वाली स्थिति है। हालांकि, इसके बावजूद बड़ी मात्रा में धान अभी भी केंद्रों पर पड़ी हुई है, जो मौसम की मार झेल सकती है।
भुगतान में देरी का डर
किसानों का तर्क है कि उन्होंने समय पर अपनी उपज उपार्जन केंद्रों पर जमा कर दी है। अब उसकी सुरक्षा और सुरक्षित परिवहन की जिम्मेदारी पूरी तरह शासन और संबंधित एजेंसियों की है। किसानों को आशंका है कि यदि धान खराब होती है तो इसका अप्रत्यक्ष नुकसान अंतत: उन्हें ही उठाना पड़ सकता है, चाहे वह भुगतान में देरी हो या गुणवत्ता को लेकर विवाद। दूसरी ओर, उपार्जन केंद्रों के प्रभारियों और अधिकारियों का कहना है कि परिवहन एजेंसियों की सीमित उपलब्धता, ट्रकों और रैक की कमी तथा लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण डिस्पैच अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। इसके बावजूद दावा किया जा रहा है कि प्राथमिकता के आधार पर रेडी टू ट्रांसपोर्ट धान का उठाव कराया जा रहा है और अधिक से अधिक धान को वेयरहाउस में सुरक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थायी तिरपाल के सहारे
उपार्जन केंद्रों पर रखी धान की स्थिति एक समान नहीं है। कई केंद्रों पर धान खुले मैदान में या अस्थायी तिरपाल के सहारे रखी हुई है। यदि बारिश होती है तो धान के भीगने, नमी बढ़ने, अंकुरण और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बना रहेगा। इसका सीधा असर धान की ग्रेडिंग, भंडारण और आगे की आपूर्ति पर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि एक बार धान में नमी बढ़ने पर उसे सुखाने और दोबारा मानक के अनुरूप लाने में अतिरिक्त खर्च और समय लगता है।
असली परीक्षा बाकी
प्रशासन के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर 20 जनवरी तक शेष धान की खरीदी पूरी करनी है, वहीं दूसरी ओर संभावित बारिश से पहले उपार्जित धान को सुरक्षित करना है। यदि समय रहते परिवहन तेज नहीं किया गया या पर्याप्त ढंकाव और भंडारण की व्यवस्था नहीं हुई, तो मौसम की एक-दो बारिश पूरे उपार्जन तंत्र पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन प्रशासनिक तैयारियों और निर्णयों की असली परीक्षा साबित होने वाले हैं।
बारिश के संकेत मिले हैं। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता दिखी है। 19 और 21 को बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे ठंड भी बढ़ जाएगी।
आर के श्रीवास्तव, मौसम विज्ञानी
पत्रा तो बता रहा है कि 18 से 22 तक में पानी बरसेगा लेकिन कहां-कहां बरसेगा यह बताया नहीं जा सकता लेकिन माघ माह में बारिश बताई जा रही है।
पं. छत्रपाल द्विवेदी, पंचाग विशेषज्ञ
विभागीय तौर पर सभी समितियों को अलर्ट किया गया है। पूर्व में भी आदेश किए जा चुके हैं। कई स्तर पर निर्देश हैं।
सम्यक जैन, जिला आपूर्ति अधिकारी

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