सतना के निजी अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर ऑपरेशन के बाद हंगामा, परिजनों ने गलत इलाज का आरोप लगाया। विवाद के बाद अस्पताल ने इलाज का पैसा लौटाया, पुलिस हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर के प्रियंवदा बिरला अस्पताल में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ,अस्पताल प्रबंधन पर गलत इलाज का आरोप लगाकर किए गए इस हंगामें के चलते लगभग ढाई से तीन घंटे अस्पताल पुलिस छावनी बना रहा। पुलिस की समझाइश और अस्पताल प्रबंधन द्वारा इलाज में खर्च हुए पैसे वापस किए जाने के बाद मामला शांत हुआ। इस बीच आरोप है कि मरीज के परिजनों और उनके साथ आए लोगों ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ के साथ झूमा- झटकी की। दरअसल यह सारा हंगामा ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट पर चीरा लगने की वजह से खड़ा हुआ जिसे राजनीतिक रूप देने का प्रयास किया गया। घटना के सम्बंध में मिली जानकारी के मुताबिक सभापुर थाना क्षेत्र की माजन निवासी 60 वर्षीय जमुनिया साकेत को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। जांच में डॉक्टरों ने महिला को ब्रेन ट्यूमर बताया, जिसके बाद 1 अप्रैल को उनका ऑपरेशन किया गया। आर्थिक तंगी का हवाला देकर परिजनों ने शुक्रवार की सुबह करीब 10:30 बजे जमुनिया साकेत की अस्पताल से छुट्टी करा ली जबकि अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को उनकी आर्थिक हालत को देखते हुए मेडिकल कालेज रीवा या जबलपुर ले जाने की सिफारिश की थी।
दो चेक के जरिए वापस किया गया इलाज का पैसा
बताया जाता है मरीज के परिजन और उनके साथ आए लोगों का इलाज में खर्च पैसा वापस पाने पर ज्यादा जोर था। हंगामे के बीच अस्पताल प्रबंधन ने दो चेक के जरिए इलाज में खर्च हुआ पैसा वापस किया। जमुनिया साकेत के नाम पर दिए गए दो चेक में एक चेक 1 लाख 29 हजार 500 और दूसरा 57 हजार 800 का दिया गया।
ऑपरेशन चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत किया गया है और सभी आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन किया गया है। मरीज को जब अस्पताल लाया गया था तभी ब्रेन ट्यूमर की खतरनाक स्थित और उससे होने वाली परेशानियों से परिजनों को अवगत कराया गया था। ऑपरेशन के बाद मरीज को 10- 15 दिनों तक अस्पताल में रहना होता है। मरीज के परिजनों ने अपनी आर्थिक स्थित का हवाला देकर शुक्रवार को छुट्टी कराई थी जबकि उन्हे ऑपरेशन के बाद रिकवर होने के लिए रीवा व जबलपुर जाने की सलाह दी थी।जहां तक पेट में चीरे का सवाल है उसमें ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान ब्रेन की एक हड्डी निकाल कर पेट की आंतों के बीच रखी जाती है। मरीज जब रिकवर हो जाता है तब वापस वो हड्डी ब्रेन में लगा दी जाती है,ये एक चिकित्सीय पद्धति है। इस बारे में भी मरीज के परिजनों को जानकारी दी गई थी और हंगामे के दौरान भी बताया गया पर वे सुनने को तैयार नहीं थे। मरीज का ऑपरेशन न्यूरोसर्जन डॉ निशांत श्रीवास्तव ने किया था। हंगामा कर रहे लोगों ने अस्पताल के स्टाफ के साथ झूमा- झटकी भी की।
हरिशंकर मिश्रा, पीआरओ प्रियंवदा बिरला


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