सतना जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर लिए गए फैसले जमीन पर उतरते नजर नहीं आ रहे हैं। आठ माह बाद भी ब्लैक स्पॉट समाप्त नहीं हो सके हैं। खराब सड़कों, अव्यवस्थित कट प्वाइंट, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में दुर्घटनाओं का आंकड़ा कम करते हुए सुगम यातायात मुहैया करवाने की बड़ी-बड़ी बातें तो बंद कमरे में होती हैं, पर इन बातों पर धरातल में अमल नहीं होता है, यही वजह है कि सुुगम यातायात मुहैया करवाने के जितने भी निर्णय लिए जाते हैं, वे सभी कागजों तक सिमट कर रह जाते हैं आम जनमानस को उसी समस्या से जूझना पड़ता है। दुर्घटनाओं को कम करते हुए सुगम यातायात मुहैया करवाने के निर्णयों और उन पर अब तक अमल की बात की जाए तो अन्य निर्णय तो छोड़िए सिर्फ ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने में ही पुलिस प्रशासन गंभीर नहीं है। आज से लगभग 8 माह पहले अपै्रल माह में सड़क सुरक्षा समिति की एक बैठक हुई थी, जिसमें बताया गया था कि जिले में चार ब्लैक स्पॉट हैं, इसी बैठक में यह भी निर्णय लिया गया था कि इन्हें जल्द से जल्द समाप्त कर लिया जाएगा, लेकिन लगभग 8 माह बाद 11 दिसम्बर को हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में बताया कि सिर्फ एक ब्लैक स्पॉट समाप्त हुआ है, तीन पुराने यथावत है, जबकि 13 और ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, जो ब्लैक स्पॉट हो सकते हैं।
क्या है ब्लैक स्पॉट
ब्लैक स्पॉट क्या है? यदि इसकी बात करें तो किसी सड़क, हाइवे, एक्सप्रेस-वे पर अगर एक ही जगह पर तीन साल में पांच सड़क हादसे हो जाए या इसी जगह पर तीन साल में कम से कम दस मौत हो जाए तो उसे ब्लैक स्पॉट घोषित कर दिया जाता है। हादसे के लगभग पांच सौ मीटर का एरिया ब्लैक स्पॉट माना जाता है। जिले में वर्तमान समय में तीन ब्लैक स्पॉट हैं, पहले चार थे, जिसमें से एक को समाप्त कर दिया गया है, हालांकि जिले में अभी तेरह स्थान और ऐसे चिन्हित किए गए हैं जहां लगातार दुर्घटनाएं ज्यादा हो रही हैं।
सड़क चौड़ी कर दी, खम्भा हैण्डपम्प हटाना भूल गए
अक्सर शहर में सुगम यातायात में अतिक्रमण व सड़क को बड़ी बाधा माना जाता है जिसको देखते हुए शहर में सुगम यातायात मुहैया कराने के उद्देश्य से कई स्थानों पर रोड निर्माण कर चौड़ीकरण का कार्य कराया गया है। किन्तु उन स्थानों पर लगे पुराने बिजली के खम्भों व पेड़ों का विस्थापन नहीं किया गया जिसके कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है। ऐसी स्थित शहर के कई स्थानों पर है जहां कहीं रोड के बीच में बिजली का खम्भा है तो कहीं पर हैण्डपम्प गड़ा हुआ है। सड़क का चौड़ीकरण तो कर दिया गया पर इन्हें हटाया नहीं गया।
शहर के अन्दर मार्गों की हालत खराब
सड़क दुर्घटनाएं न हो और हों भी तो उनमें लोगों की मौतें कम से कम हो इस बात को लेकर बीते दिनों आयोजित जिला रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक के दौरान एक बड़ी बात सामने आई की ज्यादातर हादसों के लिए सड़कें ही जिम्मेदार हैं और यह बात भी सामने आई कि शहर के अंदर मार्गों की स्थिति अत्यन्त खराब है। निर्माण एजेंसियों द्वारा जो कार्य करवाए जा रहे हैं उन कार्यों के बाद उनका समतलीकरण ठीक ढंग से नहीं होने से यातायात धीमी गति से चलता है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
सही ढंग से नहीं लगे नो इंट्री के बोर्ड
शहर में नो इंट्री के बोर्ड सही व विधिवत ढंग से नहीं लगे हैं। जो लगे भी हैं वे अत्यन्त छोटे हैं, उनको स्पष्ट रूप से चिन्हित कर लगवाया जाए। सुरक्षा मानकों का नहीं हो रहा पालन शहर के अंदर सड़क में हो रहे निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। मनमाने तरीके से कार्य हो रहा है, यह भी सुगम यातायात में एक बड़ी बाधा है।
हम न सुधरेंगे....
एक तरफ प्रशासन है कि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के नियम- कानून तो बंद कमरें में बनाता है लेकिन उन पर फील्ड में अमल नहीं करता तो दूसरी तरफ आम जनमानस भी है जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने में अपनी शान समझता है। कुछ ऐसा ही हाल सिविल लाइन की तरफ जाने में ओवर ब्रिज से नीचे उतरते समय देखने को मिलता है स्टापर लगे होने के बावजूद वाहन चालक लेफ्ट टर्न में जाने की वजाए गलत साइड़ में राइट टर्न की तरफ जाते हैं जिससे अक्सर हादसे की आशंका बनी रहती है।
बंद हों अनावश्यक कट प्वाइंट
शहर के अंदर सड़कों में कई स्थानों पर अनावश्यक कट प्वाइंट हैं, जिन कट प्वांइटों को बंद किया जाना चाहिए।
निर्धारित हों इनके स्थान
इन पर हो कार्यवाही

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