सतना जिले में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गंभीर शिक्षक संकट से गुजर रही है। जिला शिक्षा केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार 317 सरकारी स्कूल या तो पूरी तरह शिक्षक विहीन हैं या केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। 40 विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 277 स्कूल केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं। मझगवां, नागौद और उचेहरा जैसे विकासखंड सबसे अधिक प्रभावित हैं। Collector–DPC स्तर पर स्थिति सुधारने के लिए मर्जर और पदस्थापना पर चर्चा जारी है, लेकिन फिलहाल हजारों बच्चों की शिक्षा अधर में लटकी हुई है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सुबह की प्रार्थना का समय है। बच्चे कतार में खड़े हैं। हाथों में किताबें हैं, मगर सामने ब्लैकबोर्ड के पास कोई शिक्षक नहीं। यह तस्वीर किसी एक विद्यालय का नहीं, बल्कि सतना जिले के सैकड़ों विद्यालय की रोजमर्रा की सच्चाई बन चुका है।
जिला शिक्षा केंद्र की हालिया एक्सरसाइज से जो आंकड़े सामने आए हैं उनके अनुसार जिला के 3 सौ 17 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां या तो एक भी शिक्षक नहीं है या पूरा विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है। इनमें 40 स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन हैं, जबकि 277 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ है।
प्राथमिक शिक्षा सबसे ज्यादा असहाय
प्राथमिक विद्यालय जहां बच्चे अक्षर पहचानते हैं, लिखना सीखते हैं, सपने बुनना शुरू करते हैं वहीं सबसे बड़ी चोट पड़ी है। पांच विकासखंडों के 269 प्राथमिक स्कूल शिक्षक संकट की गिरफ्त में हैं। इनमें 33 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं, और 236 स्कूल केवल एक शिक्षक पर टिके हुए हैं। सबसे गंभीर स्थिति मझगवां विकासखंड की है, जहां 18 विद्यालय पूरी तरह शिक्षक विहीन हैं और 94 स्कूल एकल शिक्षक से संचालित हो रहे हैं। नागौद, उचेहरा और सोहावल जैसे विकासखंडों में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। रामपुर बघेलान भले ही शून्य शिक्षक की सूची में न हो, लेकिन वहां भी 23 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के सहारे खड़े हैं।
कलेक्टर-डीपीसी में चर्चा
शून्य और एकल शिक्षक शालाओं को लेकर पदेन जिला मिशन संचालक (कलेक्टर) और जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी)के बीच गहन विचार विमर्श हुआ है। इन दोनों तरह के शिक्षको को लेकर पदस्थापना और मर्ज करने पर चर्चा हुई है। डीपीसी विष्णु कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कलेक्टर सर से इन बिन्दुओ पर चर्चा की गई है। इसके बाद कार्ययोजना तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि शिक्षकों की पदस्थापना का मसला जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर का है। यही कारण है कि डीपीसी और डीईओ को समन्वय बनाकर इसका हल निकालना होगा।
माध्यमिक स्कूल भी सुरक्षित नहीं
कई बार यह माना जाता है कि माध्यमिक शिक्षा तक आते-आते व्यवस्था बेहतर हो जाती है, लेकिन आंकड़े इस धारणा को खारिज करते हैं। जिले के 48 माध्यमिक स्कूल गंभीर शिक्षक अभाव से जूझ रहे हैं। इनमें 7 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है और 41 स्कूल केवल एक शिक्षक पर संचालित हो रहे हैं। मझगवां और रामपुर बघेलान यहां भी सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं।


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