सीधी जिले में बिना अनुमति वन और कृषि भूमि पर अवैध ईंट भट्ठों का संचालन, विभागों की निष्क्रियता से पर्यावरण नुकसान, पीएम आवास के नाम पर दुरुपयोग, पेड़ों की कटाई और भूमि क्षरण गंभीर चिंता

हाइलाइट्स:
सीधी, स्टार समाचार वेब
जिले में बेखौफ होकर अवैध ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। ईटा भट्ठे का संचालन करने वाले लोगों द्वारा वन भूमि को ही ताक में रखकर जंगलों के अंदर भट्ठे लगाने से नहीं चूक रहे हैं। वहीं विभाग द्वारा एमपी आवास की बात को लेकर कार्यवाही करने से बच रहा है। जबकि पीएम आवास के नाम पर ईट भट्ठा का संचालन कर इसका व्यवसायिक उपयोग करने से भी ऐसे लोग पीछे नहीं हट रहे हैं। जिले में वन और कृषि भूमि में ईटा भट्ठे का संचालन होने से पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है। कार्यवाही के नाम पर खनिज विभाग जुमार्ना वसूली करने में जुटा हुआ है। वहीं वन विभाग इस मामले में अपने सीमित अधिकार होने की दुहाई देकर कार्यवाही करने से पीछे हटने की कोशिश में जुटा हुआ है। राजस्व विभाग के अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से मौन नजर आ रहे हैं। जबकि कृषि भूमि के इस बेजा इस्तेमाल के खिलाफ होने वाली कार्यवाही के मामले में राजस्व विभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में मकान निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रशासन अपनी ओर से सभी प्रयास कर रहा है। इसी वजह से शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं हो रही है। इसकी बड़ी कीमत वनों की हरियाली नष्ट कर और कृषि योग्य भूमि को बंजर होकर चुकानी पड़ रही है। लेकिन गरीबों को आशियाना देने के नाम पर राजनैतिक रोटी सेंकने के चक्कर में शासन और प्रशासन के अधिकारी इसे ओर पूरी तरह से मुंह मोड़े हुए हैं। अवैध ईट भट्ठों को लेकर उत्पन्न हो रहे विवाद की स्थिति को देखते हुए इन दिनों अधिकारी भी खासे परेशान हैं। विशेषकर वन विभाग के अधिकारी इस तरह के मामले में कार्यवाही न होने से हलाकान हैं। वहीं खनिज और राजस्व विभाग पीएम आवास निर्माण के लिए भारी मात्रा में ईट की जरूरत को पूरा करने के दबाव के बोझ तले दबे हुए हैं। इन अवैध ईट भट्ठे की आंच में वन और राजस्व क्षेत्र मेंं मौजूद हरे पेड़ पौधे भी झुलस रहे हैं। प्रशासन की इस उदारता से मनमानी पर उतर आए ईट भट्ठों के संचालक भट्ठे के लिए मिट्टी जुगाड़ करने के चक्कर में बड़े-बड़े पेड़ों के चारों ओर की मिट्टी को खोदकर निकाल रहे हैं। इससे पेड़ों की जड़ को नुकसान होने पर या तो वे सूखे जा रहे हैं या बारिश के दौरान धराशायी हो रहे हैं। यहां तक की वन विभाग के द्वारा विशेष रूप से संरक्षित किए गए क्षेत्रों में भी ईट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है।


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