सीधी में आरओ पानी के नाम पर सादा और मिलावटी पानी बेचा जा रहा है। बिना जांच के कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है और प्रशासन जिम्मेदारी टाल रहा है।

हाइलाइट्स:
सीधी, स्टार समाचार वेब
जिला मुख्यालय एवं जिले के नगरीय क्षेत्रों में घर व दुकानों में जो आरओ फिल्टर पानी लोग खरीदकर पी रहे हैं वो कितना शुद्ध है ये कोई नहीं जानता। बस शुद्ध पानी के नाम पर इसे खरीदा जा रहा है। अब शहर एवं कस्बों में इसका व्यापार इतना फल फूल चुका है कि हर माह कई लाखों रुपए का पानी बिक रहा है। एक अनुमान के मुताबिक जिले भर में तकरीबन 25 हजार लोग फिल्टर के नाम पर ये पानी पी रहे हैं। गंभीर बात ये है कि नगरीय निकाय या स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कभी इन प्लांट्स की जांच करना उचित नहीं समझा।
दुकानदारों में है खास डिमांड
शहरीय क्षेत्र में फिल्टर पानी की कैन अब घर व दुकानों में दिखने लगी है। लेकिन जो पानी सप्लाई हो रहा है जरूरी नहीं है कि वो आरओ का ही पानी हो। पानी के कैन सप्लाई करने वाले कई कारोबारी आरओ की बजाय सीधा जमीन से निकाला गया पानी ठण्डा कर उसमें थोड़ा बहुत फिल्टर पानी मिलाकर सप्लाई कर रहे हैं। इतना ही नहीं बासी पानी भी लोगों को बेचा जा रहा है चाहे उसमें बदबू ही क्यों न आ रही हो। शहर में इतना कुछ हो रहा है और प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग आंख बंद करे बैठा है। आरओ का पानी बोलकर सप्लाई फिल्टर पानी करके दे देते हैं जबकि आरओ का पानी मीठा होने के साथ काफी शुद्ध भी होता है। आरओ सिस्टम के तहत पानी की कड़वाहट समाप्त हो जाती है जबकि फिल्टर का पानी साफ तो होता है लेकिन इसमें कड़वाहट जारी रहती है। अधिकतर सप्लायर आरओ का पानी कहकर फिल्टर या फिर सीधा जमीन से खींचकर कैन में भरकर बेंच रहे हैं जो उसकी शुद्धता भी प्रभावित होती है। पूरी तरह शुद्ध नहीं होता क्योंकि फिल्टर सिस्टम के अलावा आरओ का पानी काफी खचीर्ला होता है। इसमें पानी में मौजूद कीटाणुओं को समाप्त करने के साथ पानी की गंध में भी बदलाव आ जाता है। एक छोटा प्रोजेक्ट 3 लाख रुपए में लगता है। ये प्रोजेक्ट तीन साल तक ही अच्छा काम करता है। इसके बाद फिर से खर्च बढ़ जाता है लेकिन फिल्टर सिस्टम में ऐसा नहीं है। इसके सिस्टम में फिल्टर ही चेंज करने पड़ते है इसलिये ज्यादातर व्यापारी इसी से काम चला रहे हैं।
सीधी जिला मुख्यालय के साथ ही कस्बाई क्षेत्रों एवं इनसे लगे ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से आॅरो फिल्टर प्लांट डालनें का प्रचलन बढ़ा है। कम पूंजी में ज्यादा लाभ मिलनें वाला यह कारोबार बनता जा रहा है। ये अवश्य है कि आरो फिल्टर पानी के नाम पर अधिकांश कारोबारी लोगों के साथ सिर्फ धोखाधड़ी ही कर रहे हैं। गर्मी के दिनों में शीतलता का एहसास करनें के लिए जिस फिल्टर पानी को वह खरीद रहे हैं वह शुद्ध होने की गारंटी में नहीं रहता है।
एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
प्रशासनिक अफसर पानी की जांच के नाम पर एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि हमारा काम पैकिंग वाले पानी की जांच करना है खुले पानी की जांच हम नहीं करते। ये काम नगर पालिका का है। वहीं नगरपालिका के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। जिले में करीब दर्जन भर व्यापारी पानी सप्लाई का काम कर रहे हैं। ये लोग सुबह ही घरों, दुकानों, सरकारी कार्यालयों, पुलिस थाने और शादियों में ठंडे पानी के कन को अपनी गाड़ी के माध्यम से पहुंचाते हैं। कई बार तो इनमें से तेल की भी गंध आती है। वहीं व्यवसायी क्षतिग्रस्त केन से भी पानी की सप्लाई में लगे हैं जिससे पानी के रिसाव के चलते कम पानी मिलता है। शादियों व सामाजिक कार्यों में तो लोग बर्तन न मिलने पर उन कैन में मिट्टी का तेल, डीजल और पेट्रोल लाने ले जाने का काम भी कर लेते हैं अगले दिन उन्हीं कैन में पानी भरकर बेच दिया जाता है। कैन मालिकों द्वारा आरओ का पानी देने नाम पर प्रति केन पर 30-40 रुपये लोगों से लेते हैं। शुद्ध पानी के नाम पर जो कैन में पानी की सप्लाई करते हैं उसकी भी सुरक्षा नहीं है। गाडिय़ों में रखी इन कैन को खुला कर पानी सप्लाई करते हैं। जिससे कई कैन खुली भी पड़ी रहती हैं।


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