सिंगरौली जिले के बैढ़न, देवसर और चितरंगी के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद जर्जर है। जानलेवा भवनों में छात्र-छात्राएं पढ़ाई को मजबूर हैं। वर्षों से शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने नहीं की मरम्मत, सीएम हेल्पलाइन पर भी कार्रवाई अधूरी। क्या जिम्मेदार किसी बड़े हादसे का कर रहे हैं इंतजार?

हाइलाइट्स
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
विकासखंड बैढ़न, देवसर व चितरंगी शहर से लेकर ग्रामीणों अंचलो में संचालित हो रही अधिकतर शासकीय विद्यालय जर्जर हालत में हैं। जहां छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। सरकार द्वारा विद्यालय भवन को सुधार कराने के लिए बकायदे बजट भेजा जाता है ताकि विद्यालय का सुधार हो सके और छात्र-छात्राएं अपने आप को सुरक्षित महशूस कर अध्ययन कर सके हैं। लेकिन यह बजट कहां जाता है ,जिम्मेदार बताने में कतरा रहे हैं और विद्यालयों का मेंटीनेंस भी नही कराया गया है। जिसको लेकर जिम्मेदार आला अफसरों पर सवाल खड़ा हो रहा है।
गौरतलब हो कि जर्जर भवनों की हालत इतनी खस्ता है कि अब वो पनाह नहीं बल्कि आफत बन चुके हैं। विद्यार्थियों एवं विद्यालयींन स्टॉफ की जिंदगी अब डर के साये में गुजर रही है। कई बार प्रशासन से गुहार लगाई जा चुकी है,पर अपने ही आदेश पर जिम्मेदार मौन हैं। कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है और तो और अखबारों के माध्यम से जर्जर भवनों के संबंध में खबरें प्रकाशित की जा रही है लेकिन उसके संबंध में ना तो किसी तरह का दिशा निर्देश न तो किसी की तरह की जाँच पड़ताल एवं सर्वे कराया जा रहा है। आखिर क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं जिम्मेदार जन अधिकारीघ् या उनके द्वारा जारी किया हुआ आदेश मात्र दिखावा है। जर्जर भवनो के संबंध में कोई सारसंभाल नहीं हो रही है। जानकारी के अनुसार चितरंगी विकासखंड अंतर्गत संकुल केन्द्र लमसरई के एक परिसर एक शाला शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुल्हुईया का भवन अत्यंत जर्जर हो गया है।
उसी जर्जर भवन में विद्यालय संचालित हो रही है,कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिसके संबंध में ग्राम वासियों सहित विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को विद्यालय के जर्जर स्थिति के संबंध कई बार जानकारी दी जा चुकी है । इतना ही नहीं जानकारी देने के बाद नवीन भवन की स्वीकृति की माँग भी की जा चुकी है। इतना ही नही पूर्व में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करवाई गई थी जांच उपरांत भवन डिस्मेंटल का प्रस्ताव विभाग द्वारा दिया गया था। पर एक वर्ष बीतने के पश्चात भी कोई कार्यवाही नही होने से विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर अध्ययन कर रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर आला अफसरों का ध्यान नही जा रहा है।


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