सिंगरौली के मुहेर गांव में नल-जल योजना विफल होने से ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जल संकट गहराने से बीमारियों का खतरा बढ़ा, प्रशासन की अनदेखी पर लोगों में भारी आक्रोश है।

हाइलाइट्स:
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
नगर पालिका निगम सिंगरौली के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मुहेर में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। सरकार की बहुप्रचारित नल-जल योजना यहां पूरी तरह विफल साबित होती नजर आ रही है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को आज भी नदी-नालों में खुदे गड्ढों झिरी का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इसी पानी का उपयोग मवेशी भी कर रहे हैं,जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में न तो पर्याप्त हैंडपंप उपलब्ध हैं और न ही घर—घर नल कनेक्शन से पानी की आपूर्ति हो रही है। इससे साफ है कि योजना का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित रह गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग ने केवल पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन देने तक ही काम सीमित रखा। मुहेर गांव में बने पानी के टैंक और पाइपलाइन अब शोपीस बनकर रह गए हैं। गांव की महिलाएं और बच्चे रोजाना दूर—दूर तक जाकर झिरी का पानी भरने को मजबूर हैं। इस दूषित पानी के सेवन से गांव में बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य और जल विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। जबकि हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। मुहेर गांव की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि जल गुणवत्ता और आपूर्ति को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों में गंभीरता का अभाव बना हुआ है।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि नहीं सुनते समस्या
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन को अपनी समस्या से अवगत कराया लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। लोगों का कहना है कि सिर्फ योजनाओं की घोषणा और कागजी उपलब्धियों से उनकी प्यास नहीं बुझ सकती। उन्हें वास्तविक रूप से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल चाहिए। एक ओर सरकार हर घर जल का दावा कर रही हैए वहीं दूसरी ओर मुहेर जैसे गांवों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गयाए तो आने वाले समय में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
अब तो टैंकर भी नहीं आता
मुहेर गांव के ग्रामीणों की बात माने तो एक बुजुर्ग दंपति ने बताया कि अब तो यहां टैंकर भी पानी लेकर नहीं आता है। प्यास बुझाने के लिए नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अब तो ना ही पार्षद सुनते हैं और नहीं जिम्मेदार अधिकारी। प्यास बुझाने के लिए नाला का पानी ही नसीब है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है ताकि उन्हें दूषित पानी पीने की मजबूरी से निजात मिल सके।


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