सुप्रीम कोर्ट ने 12 वर्षों से कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे 31 वर्षीय हरीश राणा को 'गरिमापूर्ण मृत्यु' का अधिकार देते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की मंजूरी दे दी है।
By: Ajay Tiwari
Mar 11, 202612:12 PM

12 साल का लंबा संघर्ष: 2013 से कोमा में थे हरीश राणा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: गरिमापूर्ण मृत्यु सुनिश्चित करने के लिए लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति।
एम्स की भूमिका: मेडिकल बोर्ड ने सुधार की संभावनाओं को शून्य बताया था।
कानूनी प्रक्रिया: 2023 के संशोधित गाइडलाइंस के तहत लिया गया फैसला।
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
न्याय और मानवीय संवेदनाओं के एक अत्यंत दुर्लभ मामले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक 31 वर्षीय व्यक्ति, हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति प्रदान की है। हरीश पिछले 12 वर्षों से कोमा (Vegetative State) में थे और उनकी स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं बची थी।
हादसे से कोमा तक का सफर
यह दुखद सिलसिला साल 2013 में शुरू हुआ था, जब हरीश राणा एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद वे अचेत अवस्था में चले गए। एक दशक से अधिक समय तक वे कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणालियों (Life Support) के सहारे जीवित रहे, लेकिन चिकित्सा विज्ञान उनकी चेतना वापस लाने में असमर्थ रहा।
अदालत का मानवीय दृष्टिकोण और गरिमापूर्ण विदाई
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने एम्स (AIIMS) को निर्देशित किया कि हरीश को उपशामक देखभाल इकाई (Palliative Care Unit) में स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जीवन रक्षक उपकरणों को हटाने की प्रक्रिया बेहद सुनियोजित होनी चाहिए, ताकि मरीज की मानवीय गरिमा अंतिम क्षणों तक बनी रहे। इससे पहले पीठ ने स्वयं हरीश के माता-पिता से मुलाकात कर उनकी पीड़ा को समझा था।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने स्पष्ट की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने एम्स-दिल्ली द्वारा गठित प्राथमिक और द्वितीयक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्टों का गहन अध्ययन किया। डॉक्टरों की समिति ने अपनी रिपोर्ट में हरीश की स्थिति को "दयनीय" बताया था और स्पष्ट किया था कि उनके ठीक होने की उम्मीद नगण्य है। कोर्ट ने 2023 में जारी अपने ही दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए यह कड़ा निर्णय लिया।
क्या है 'निष्क्रिय इच्छामृत्यु'?
कानूनी और चिकित्सीय भाषा में, निष्क्रिय इच्छामृत्यु का अर्थ है किसी असाध्य बीमारी या कोमा से जूझ रहे मरीज को जीवित रखने वाले उपचार, दवाओं या मशीनों (जैसे वेंटिलेटर) को हटा लेना, ताकि प्रकृति अपना कार्य कर सके और मरीज को तड़प से मुक्ति मिल सके।