चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जानिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी और इस पूरे विवाद की पूरी जानकारी।

मुख्य बिंदु
न्यायालय का सख्त रुख: उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म 6 में किए गए किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी गई है।
चुनाव आयोग से रिपोर्ट तलब: ईसीआई (Election Commission) से रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत यह जांच करेगी कि यह बदलाव किसने और किसके आदेश पर किया।
याचिकाकर्ताओं के आरोप: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और डीजी-आईटी पर बिना किसी कानूनी संशोधन के पोर्टल पर बदलाव करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के मतदाता पंजीकरण फॉर्म यानी फॉर्म 6 में कथित ‘गैरकानूनी’ बदलावों को लेकर सुनवाई चल रही है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
हाल ही में चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल (ECINET) पर पहली बार मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 में एक नया हिस्सा जोड़ा गया था। इसके तहत नए मतदाताओं से यह सवाल पूछा जा रहा था कि क्या उनके माता-पिता का नाम मतदाता सूची के आखिरी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में शामिल था या नहीं। हालांकि, इस बदलाव को करने से पहले मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 या किसी अन्य कानूनी प्रारूप में कोई आधिकारिक संशोधन नहीं किया गया था।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कोर्ट को बताया कि नए फॉर्म 6 में दो नई शर्तें जोड़ी गई हैं, जिसके कारण कई नए मतदाताओं को सूची में शामिल होने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी तय कानूनी प्रक्रिया के फॉर्म में इस तरह के बदलाव करके लोगों को परेशान किया जा रहा है।
वकील की दलील सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
"यह बात बिल्कुल स्पष्ट है। फॉर्म 6 में किए गए किसी भी बदलाव को हमने मंजूरी नहीं दी है… यह भी स्पष्ट कर दें कि जब रिपोर्ट पेश की जाएगी, तो हम देखना चाहेंगे कि किसने क्या बदलाव किया।"
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
बिना कानूनी संशोधन के बदलाव: याचिका के अनुसार, जुलाई 2026 में ईसीआईनेट पोर्टल पर डिजिटल तरीके से फॉर्म 6 में एकतरफा बदलाव किए गए, जिसके लिए कोई कानूनी अधिकार या नियम संशोधन नहीं हुआ था।
आंतरिक विरोध: 13 अगस्त 2026 को आयुक्त संधू ने इस बदलाव को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ करार दिया था और इसे तुरंत हटाने का आदेश दिया था, इसके बावजूद पोर्टल पर यह फॉर्म मौजूद रहा।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी की मांग: याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा इस प्रकार से मतदाता सूची में हेरफेर करना उनके आधिकारिक कर्तव्यों का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसके लिए व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
जिन राज्यों में एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां चुनाव आयोग ने ईसीआईनेट पोर्टल से फॉर्म 6 की इस घोषणा को हटा दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट अब अगले हफ्ते इस पर आगे की सुनवाई करेगा और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि यह अनधिकृत बदलाव किसने किया था।
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