सतना जिला अस्पताल में जननी एक्सप्रेस चालकों पर प्रसूता के परिजनों से पैसे मांगने का आरोप लगा है। शिकायत कलेक्टर तक पहुंचने के बाद मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सतना जिले में संस्थागत प्रसव की तमाम व्यवस्थाओं के दावों के बीच एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की एम्बुलेंस में मौत ने स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय पर इलाज, रेफरल व्यवस्था और प्राथमिक उपचार की कमी इस दर्दनाक घटना की बड़ी वजह मानी जा रही है।
रीवा और मऊगंज में अगस्त महीने में 90 मृतकों के शव नि:शुल्क शव वाहन से घरों तक पहुँचाए गए। सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा को मरीजों की जान बचाने के साथ ही अब शव ढोने की जिम्मेदारी भी दे दी है। यह सेवा नि:शुल्क है लेकिन इसमें कई खामियाँ हैं, जैसे-शव वाहन जिला सीमा पार नहीं कर सकता।
सतना के सरदार बल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में दो घंटे तक एम्बुलेंस नहीं मिलने से मरीज स्ट्रेचर पर तड़पता रहा। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और एम्बुलेंस संचालन व्यवस्था की पोल खुली, सीएमएचओ ने जांच के दिए निर्देश।
















