पन्ना के मोहन्द्रा वन परिक्षेत्र में औषधीय महत्व वाला केवकंद पौधा मिला है। विशेषज्ञ ने इसकी पहचान की। प्राकृतिक जंगलों में इसकी मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और वनौषधीय संपदा को दर्शाती है।
सतना के बरौंधा परिक्षेत्र में 1002 गिद्ध दर्ज किए गए, लेकिन एक भी अवयस्क गिद्ध नहीं मिला। वन विभाग की गणना ने गिद्धों की घटती नई पीढ़ी और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।
रीवा के टीकर जंगल के नीचे मौजूद बाक्साइड भंडार पर दो कंपनियों की नजर है। खनन के लिए वन भूमि आवंटन की फाइलें रीवा से भोपाल तक पहुंच चुकी हैं। यदि खदानों की स्वीकृति मिलती है तो 150 एकड़ जंगल और करीब 20 हजार पेड़ नष्ट होंगे। यह इलाका बाघ और तेंदुओं का कॉरीडोर भी है, जिससे जैव विविधता और वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
पन्ना के दक्षिण वनमंडल में हॉर्सहेयर वॉर्म (Horsehair Worm) का दुर्लभ अवलोकन हुआ है। यह पतला धागे जैसा जीव झिंगुर और टिड्डे जैसे कीटों के शरीर में परजीवी बनकर विकसित होता है और बाद में पानी में निकलता है। यह जीव पूरी तरह निरापद है और जैव विविधता का संकेतक माना जाता है।
















