सतना जिले के 367 विद्यालयों ने प्रधानमंत्री पोषण योजना की मध्याह्न भोजन रिपोर्ट एमडीएम पोर्टल पर अपलोड नहीं की। नागौद और मैहर में सबसे अधिक लापरवाही सामने आई, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
सतना में दस्तक अभियान की धीमी शुरुआत ने चिंता बढ़ाई। जिला सैम और डायरिया हॉटस्पॉट में शामिल है, जबकि लक्ष्य के मुकाबले केवल 2.79 प्रतिशत बच्चों की जांच हो सकी, स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठे।
सतना जिले में जुलाई 2026 के पोषण राशन वितरण में गंभीर लापरवाही उजागर हुई। गेहूं, फोर्टिफाइड चावल और नमक का 82 प्रतिशत से अधिक आवंटन उठ नहीं सका, जबकि चार नगर परिषदों में उठाव पूरी तरह शून्य रहा।
सतना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही एनएचएम की जांच में सामने आई। कुपोषण, उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की निगरानी में कमी और अस्पतालों में अनियमितताओं पर छह अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
नईगढ़ी के पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर कुपोषण और सांस की समस्या से जूझ रही तीन माह की बच्ची अलीजा का सफल उपचार किया गया। विशेष देखभाल और पोषण से उसकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
सतना-मैहर सिविल अस्पताल निरीक्षण में राज्यस्तरीय टीम ने लेबर रूम स्ट्रक्चर में तकनीकी गड़बड़ी पाई। कुपोषण जांच के दौरान एनआरसी कार्य सराहा गया, वहीं सुधार के निर्देश भी जारी किए गए।
सतना जिले के मझगवां में कुपोषण से मासूम की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जांच में लापरवाही, एनीमिया और सुविधाओं की कमी सामने आई, जिससे जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हुई।
सतना के सुरांगी गांव में मासूम सुप्रांशी की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया। संयुक्त टीम ने तीन कुपोषित बच्चों की पहचान की, एक को रेफर किया, दो परिवारों ने भर्ती से इंकार किया।
सतना के सुरांगी गांव में कुपोषण से मासूम की मौत के बाद जांच तेज हुई। हेल्थ जेडी ने पहुंचकर बयान दर्ज किए, लापरवाही उजागर हुई, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पर कार्रवाई भी की गई।
सतना के मझगवां क्षेत्र में चार माह के जुड़वा बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार मिले। इलाज में देरी और सरकारी योजनाओं की कमी पर सवाल उठे, बच्चों को जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में भर्ती किया गया।





















