मध्य प्रदेश सरकार ने आधी रात को किए 20 IAS अधिकारियों के तबादले। अशोक बर्णवाल के मुख्य सचिव बनने के बाद पहली बड़ी सर्जरी में 6 जिलों के कलेक्टर बदले गए। जानिए किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी।
मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल। मोहन सरकार ने 3 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए। मनोहर सिंह मंडलोई पीएचक्यू भेजे गए, सुधीर अग्रवाल टीकमगढ़ और मोती उर रहमान बने श्योपुर के नए एसपी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने AGMUT कैडर के 61 वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों का तबादला किया है। देखें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल की पूरी जानकारी।
मध्यप्रदेश सरकार ने पटवारियों के अंतर-जिला स्थानांतरण के लिए नई नीति लागू कर दी है। अब पात्र पटवारी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, जबकि विशेष परिस्थितियों में नए नियुक्त पटवारियों को भी मौका मिलेगा। दरअसल, राजस्व विभाग ने तबादलों की अवधि (15 जून) समाप्त होने से पहले ही पटवारियों के संविलयन की नई नीति 2026 जारी कर दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज यानी बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय हो सकते हैं। बैठक में सबसे अहम विषय तबादला नीति 2026 को माना जा रहा है, जिसका प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
राज्य सरकार ने बीती देर रात ती आईएएस अफसरों के तबादले आदेश जारी किए हैं। इनमें दो अपर मुख्य सचिव के विभागों में बदलाव किया है। वहीं एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार, गृह विभाग की जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला को सौंपी गई।
मध्यप्रदेश में 62 आईपीएस के तबादले किए गए हैं, जिसमें 24 जिलों के एसपी हटाए गए हैं। वहीं सिंगरौली बैंक डकैती मामले के बाद वहां के एसपी को भी हटाया गया है। दरअसल, राज्य सरकार ने बीती देर रात 62 आईपीएम के स्थानांतरण किए।
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक बड़ा फेरबदल करते हुए 26 IAS अधिकारियों का तबादला किया। प्रियंक मिश्रा भोपाल के नए कलेक्टर बने और कौशलेंद्र विक्रम सिंह को CMO में सचिव बनाया गया। देखें पूरी सूची।
मध्यप्रदेश में एक बार फिर सरकार प्रशासनिक सर्जरी करने जा रही है। इस बार जिलों से लेकर मंत्रालय तक बदलाव किया जाएगा। वहीं फील्ड में नहीं जाने वाले अफसरों को लूपलाइन में डालने की भी तैयारी है। सीएम डॉ. मोहन यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जो फील्ड में जाकर काम नहीं करेगा, वो जिलों नहीं मंत्रालय में बैठेगा।






















