विश्व जूनोसिस दिवस पर विशेषज्ञों ने रेबीज सहित जूनोटिक रोगों के बढ़ते खतरे को लेकर चेताया। पशुओं के नियमित टीकाकरण, स्वच्छता और समय पर उपचार को संक्रमण रोकने का प्रभावी उपाय बताया गया।
सतना और मैहर जिले में आवारा कुत्तों, बंदरों और बिल्लियों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। जून में 1454 लोग जानवरों का शिकार बने और एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ा। जिला अस्पताल में हर माह औसतन 2000 से अधिक एआरवी डोज लगाई जा रही है।
6 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व जूनोसिस दिवस का महत्व जानें। यह दिन जूनोटिक बीमारियों (जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती हैं) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनसे बचाव के उपायों पर केंद्रित है। जानें कैसे इन बीमारियों से खुद को और समुदाय को सुरक्षित रखें।















