मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर सियासी हलचल तेज है। कांग्रेस की एक सीट पर विंध्य क्षेत्र के नेताओं की दावेदारी बढ़ी, जिससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की मांग फिर चर्चा में है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें मार्च-अपै्रल में खाली हो रही हैं। इन तीन सालों में दो सीटों पर भाजपा व एक पर कांग्रेस सांसद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राज्यसभा चुनाव को अभी तो दो से तीन माह का समय बकाया है लेकिन सियासी हलचलें अभी से तेज हो गई हैं और राज्यसभा सीट के लिए गुणा-गणित लगाया जा रहा है। विधायकों की संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट मिलने वाली है। राज्यसभा की इसी एक सीट के लिए कांग्रेस में ‘एक अनार सौ बीमार’ जैसी हालत है।
समूचे प्रदेश के साथ-साथ विंध्य से भी इस इकलौती राज्यसभा सीट के लिए दावेदारी की जा रही है। मैहर में पार्टी के ब्राम्हण नेताओं के हुए एक चिंतन शिविर में बकायदा एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मांग की गई है कि एक बार फिर विंध्य को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिया जाए। मैहर मंथन से निकली मांग को पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कितनी तवज्जो देता यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन कांग्रेस के अंदर से निकली इस आवाज ने विंध्य में राजनीतिक हलचलें जरूर बढ़ा दी हैं। राज्यसभा सीट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि कांग्रेस क्या आठ साल बाद फिर से विंध्य के किसी नेता को राज्यसभा भेज सकती है। इन चर्चा में जो नाम अभी तक निकलकर सामने आए हैं उनमें सीधी जिले की चुरहट विधानसभा से विधायक पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल,चित्रकूट के पूर्व विधायक और पार्टी के राष्टÑीय सचिव नीलांशु चतुर्वेदी और सिहावल के पूर्व विधायक और कांग्रेस की वर्किंग कमेटी के सदस्य कमलेश्वर पटेल का नाम शामिल हैं। गौरतलब है कि लगभग 8 साल पहले 2018 में विंध्य से राजमणि पटेल को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा था जिनका कार्यकाल अप्रैल 2024 में समाप्त हुआ है।
कुंवर साहब 2000 से 2011 तक रहे राज्यसभा सदस्य
राज्यसभा में कांग्रेस द्वारा कब- कब विंध्य को प्रतिनिधित्व दिया गया है यदि इसकी बात की जाए तो भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले स्वर्गीय कुंवर अर्जुन सिंह ने राज्यसभा में विंध्य का प्रतिनिधित्व किया है वे दो कार्यकाल में लगातार 11 साल राज्यसभा सदस्य रहे। कुंवर साहब पहली बार अपै्रल 2000 से अपै्रल 2006 तक जबकि दूसरी बार उनका कार्यकाल अपै्रल 2006 से 4 मार्च 2011 तक रहा। श्री सिंह राज्यसभा सदस्य रहते हुए 22 मई 2004 से 22 मई 2009 तक केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री भी रहे।
क्यों जताई जा रही आवश्यकता?
कभी कांग्रेस के गढ़ रहे विंध्य में पार्टी इन दिनों अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। 9 जिले और 30 विधानसभा सीटों वाले विंध्य में पिछले दो चुनावों से कांग्रेस की दुर्दशा का हाल यह है कि पार्टी दहाई का अांकड़ा तक नहीं छू पा रही है, मात्र चार- पांच सीटों में सिमट रही है। यहां चार लोकसभा सीटों में से सभी सीटें कांग्रेस के लिए किसी सपने की तरह नजर आ रही हैं। ऐसे में पार्टी 2028 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से मजबूती के साथ खड़ी हो, प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने और उसमें सीटों के जरिए विंध्य का अहम योगदान हो इसके लिए कांग्रेस के ‘मैहर मंथन’ में विंध्य के किसी ब्राम्हण नेता को इस बार राज्यसभा भेजे जाने की मांग उठी है। इससे दो साल पहले तक सेमरिया के राजमणि पटेल राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, वे रीवा जिले के सेमरिया से आते हैं।
इसलिए भी विंध्य का दावा
संगठन और सत्ता के लिहाज से देखें तो राज्यसभा सीट के लिए विंध्य का दावा किसी लिहाज से कम नहीं है। वर्तमान समय में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार दोनों ही मालवांचल से आते हैं। ऐसे में प्रदेश की इकलौती राज्यसभा सीट के लिए विंध्य के कांग्रेस नेताओं का दावा जायज है।
तीन सीटें हो रहीं खाली
जिन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त होेने जा रहा है। उनमें मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह हैं। बीजेपी के सुमेर सिंह सोलंकी और जार्ज कुरियन का भी कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, कुरियन मोदी सरकार में राज्यमंत्री हैं। ऐसे में अभी भले ही राज्यसभा के चुनावी प्रक्रिया को दो से तीन माह बकाया हो लेकिन राजनीतिक गलियारों में सियासी गुणा- भाग लगाया जाना शुरू हो गया है।
कौन जाएगा राज्यसभा
प्रदेश की राजनीति मेंअपनी एक अलग धमक रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का दूसरा कार्यकाल 9 अपै्रल 2026 को समाप्त हो रहा है। विधायकों की संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस केवल एक ही नेता को राज्यसभा भेज सकती है। ऐसे में सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि दिग्विजय सिंह तीसरी बार राज्यसभा जाएंगे या फिर राज्यसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व दिग्विजय सिंह के स्थान पर कोई और करेगा। भले ही पार्टी के पास राज्यसभा की एक ही सीट है, पर राज्यसभा जाने की कतार में कई नेता शामिल हैं। अब देखना है कि पार्टी किसे मौका देती है।
2024 में खत्म हुआ है राजमणि का कार्यकाल
कांग्रेस ने राज्यसभा में विंध्य को समय- समय पर प्रतिनिधित्व दिया है। कुंवर अर्जुन सिंह के बाद रीवा के सेमरिया निवासी पार्टी के ओबीसी चेहरा राजमणि पटेल को राज्यसभा भेजा था। श्री पटेल 3 अपै्रल 2018 को राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुए थे, उनका कार्यकाल अप्रैल 2024 तक रहा।
भाजपा भी पीछे नहीं
राज्यसभा में विंध्य को प्रतिनिधित्व दिए जाने के मामले में भाजपा भी कांग्रेस से कहीं पीछे नहीं रही है। अब तक भाजपा ने विंध्य से दो नेताओं को राज्यसभा भेजा है। पिछले कार्यकाल में भाजपा ने विंध्य से अजय प्रताप सिंह को राज्यसभा भेजा था। श्री सिंह 2018 में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे यह अलग बात है कि राज्यसभा का कार्यकाल पूर्ण होने के 15 दिन पहले ही 2024 में उन्होंने ठीक लोकसभा चुनाव के पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अजय प्रताप सिंह सीधी से लोकसभा टिकट चाह रहे थे, टिकट न मिलने से वे नाराज हो गए थे। सबसे पहले विंध्य से भाजपा ने राज्यसभा में जगन्नाथ सिंह को भेजा था। श्री सिंह का कार्यकाल 3.6.1992 से 29.6.1998 तक रहा।
ये है राज्यसभा का चुनावी गणित


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