क्या अनुराग जैन की तरह दिल्ली में पदस्थ मप्र कैडर के अधिकारी यहां आएंगे या यहां पदस्थ अधिकारियों में से ही किसी की किस्मत चमकेगी। इसी पर स्टार समाचार की खास रिपोर्ट....

स्टार पॉलीटिक्स....
सवाल : अनुराग जैन की विदाई तो कौन बनेगा सीएस
पसंद : मुख्यमंत्री की इच्छा या चलेगी दिल्ली की
चुनौती :सिंहस्थ का सफल आयोजन व चुनाव
भोपाल। अरविंद मिश्रा
मप्र का अगला मुख्य सचिव कौन होगा...यह सवाल मंत्रालय से लेकर राजनैतिक गलियारों में गुंजने लगा है, हालांकि मुख्य सचिव अनुराग जैन का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है, लेकिन नए मुख्य सचिव की रेस अभी से शुरू हो गई है। यदि अनुराग जैन को सेवा विस्तार नहीं मिला तो प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया की कमान किसको मिलेगी...क्या अनुराग जैन की तरह दिल्ली में पदस्थ मप्र कैडर के अधिकारी यहां आएंगे या यहां पदस्थ अधिकारियों में से ही किसी की किस्मत चमकेगी। इसी पर स्टार समाचार की खास रिपोर्ट....
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस गति और आक्रामकता के साथ प्रदेश में विकास की नई कार्यसंस्कृति स्थापित करने का प्रयास किया है, उसे धरातल पर उतारने के लिए उतनी ही तेज, निर्णयक्षम और परिणामोन्मुख प्रशासनिक मशीनरी की आवश्यकता है। ऐसे में प्रदेश के अगले मुख्य सचिव को लेकर सत्ता और नौकरशाही के गलियारों में चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक हैं।
वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अब तक मुख्यमंत्री के विजन और मिशन के अनुरूप योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाई है। निवेश, अधोसंरचना, सुशासन और समयबद्ध निर्णयों जैसे विषयों पर उनकी कार्यशैली मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाती दिखाई दी है। ऐसे में यदि उन्हें सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) नहीं मिलता है, तो मुख्यमंत्री के सामने ऐसे प्रशासनिक मुखिया के चयन की चुनौती होगी, जो इसी गति और सोच के साथ सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ा सके।
मुख्य सचिव पद की दौड़ में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री ने अपनी मंशा सार्वजनिक नहीं की है। वहीं नौकरशाही में यह भी चर्चा है कि अनुराग जैन की कार्यशैली से मुख्यमंत्री और केंद्र, दोनों संतुष्ट हैं। इसलिए यह संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती कि उन्हें एक और सेवा विस्तार मिल जाए।
यदि ऐसा होता है तो मुख्य सचिव बनने की उम्मीद लगाए बैठे कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का इंतजार अधूरा ही रह जाएगा और उनमें से कुछ अपनी यह तमन्ना पूरी किए बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री प्रशासन की कमान किसी नए चेहरे को सौंपते हैं या फिर अनुभव और निरंतरता को प्राथमिकता देते हुए अनुराग जैन पर ही एक बार फिर भरोसा जताया जाता है।
रेस में शामिल चेहरे और रिटायरमेंट का पेंच
मप्र के नए मुख्य सचिव की रेस में 1990 बैच से लेकर 1992 बैच के 9 अधिकारी हैं। इनमें से 5 अधिकारी दिल्ली में डेपुटेशन पर हैं और 4 मप्र में है। इनमें 1990 बैच के राजेश राजौरा, 1991 बैच के मनोज गोविल, अशोक बर्णवाल, मनु श्रीवास्तव, 1992 बैच के पंकज अग्रवाल, केसी गुप्ता, आशीष श्रीवास्तव, वी.एल. कांताराव और नीलम शमी राव हैं। इनमें से एक अधिकारी आशीष श्रीवास्तव (1992) इसी साल और 5 अधिकारी राजेश राजौरा (1990), अशोक वर्णवाल (1991), मनु श्रीवास्तव (1991), के सी गुप्ता (1992) और वी.एल. कांताराव (1992) 2027 में रिटायर होंगे वहीं एवं नीलम शमी राव (1992) भी 2028 में रिटायर हो जाएंगी। इन सबमें मनोज गोविल (1991) ही ऐसे अधिकारी हैं जो 2029 में रिटायर होंगे।
वरिष्ठता बनाम पसंद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में अपनी पसंद के लिए वरिष्ठता को किनारे नहीं किया है। उनके कार्यकाल में प्रदेश की दूसरी महिला मुख्य सचिव वीरा राणा वरिष्ठता के आधार पर बनीं और बाद में एक एक्टेंशन भी मिला। उनके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव दिल्ली से अनुराग जैन को मुख्य सचिव बनाकर लाए। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठता के आधार पर मुख्य सचिव बनाया तो राजेश राजौरा का बनना तय है। हालांकि राजौरा को सिर्फ 10 महीने का ही कार्यकाल मिलेगा।
मनोज गोविल मजबूत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पसंद यदि राजौरा नहीं बनते हैं तो फिर दिल्ली में पदस्थ मनोज गोविल सबसे मजबूत हैं। उनके पास रिटायर होने में पर्याप्त समय हैं। उन्हें 2029 में रिटायर होना है। गोविल मुख्य सचिव बने तो मप्र में सिंहस्थ का आयोजन और विधानसभा चुनाव दोनों उनके कार्यकाल में होंगे। वरिष्ठता क्रम में गोविल से ऊपर 1990 बैच के राजेश राजौरा हैं और वे पहले से ही मंत्रालय से बाहर एनवीडीए में हैं। इसलिए मनोज गोविल का दावा मजबूत माना जा रहा है, हालांकि वे दिल्ली में डेपुटेशन पर पदस्थ है।
सीनियरिटी बनाम सेवा विस्तार का पेंच
मुख्यमंत्री की पसंद 2027 में रिटायर होने वाले आईएएस अधिकारी पर टिकती है और उन्हें मुख्य सचिव बनाते हैं तो अधिकारी को अपनी परफारमेंस दिखाने का समय कम मिलेगा और यदि वे कम समय में बेहतर काम कर पाते हैं तभी उनके एक्सटेंशन पर मुख्यमंत्री विचार करेंगे।
तो इन्हें देना पडे़गा एक्सटेंशन
डॉ. राजेश राजौरा मई 2027 में रिटायर होंगे। अशोक बर्णवाल जनवरी 2027 में रिटायर होंगे। वहीं मनु श्रीवास्तव सितंबर 2027 और केसी गुप्ता अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। इनमें से किसी को भी कमान सौंपने का मतलब है कि सरकार को बहुत कम समय में फिर से मुख्य सचिव बदलने या उन्हें एक्सटेंशन देने की कवायद से गुजरना पड़ेगा।
सिंहस्थ-चुनाव सबसे बड़ा फैक्टर
नए सीएस की पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में सबसे बड़ा निर्णायक फैक्टर साल 2028 माना जा रहा है। 2028 की शुरुआत में उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। सरकार का अनुमान है कि सिंहस्थ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे, जिसके लिए वृहद स्तर पर स्थायी बुनियादी ढांचा और भीड़ प्रबंधन की जरूरत है। यही नहीं, उसी साल के अंत में राज्य में विधानसभा चुनाव भी हैं। सरकार किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहेगी कि इन दो विशाल आयोजनों के बीच प्रशासनिक मुखिया बदलने की नौबत आए।
मालवा कनेक्शन से पंकज अग्रवाल
1992 बैच के आईएएस पंकज अग्रवाल मालवांचल से आते हैं, और मुख्यमंत्री भी मालवा (उज्जैन) का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। उनसे बेहतर तालमेल की उम्मीद है। सबसे खास बात यह है कि पंकज की सेवानिवृत्ति 2029 के अंत में है। यदि उन्हें मुख्य सचिव बनाया जाता है, तो राज्य सरकार को न तो बार-बार एक्सटेंशन देना पड़ेगा और न ही 2028 के अहम वर्ष में प्रशासनिक नेतृत्व परिवर्तन का जोखिम उठाना पड़ेगा, लेकिन वरिष्ठताक्रम में उनसे ऊपर 2 अधिकारी अशोक बर्णवाल और मनु श्रीवास्तव को मंत्रालय से बाहर पदस्थ करना पड़ेंगा।
अब तक दो महिला सीएस
निर्मला बुच: मध्यप्रदेश की पहली महिला मुख्य सचिव थीं, जिन्होंने 1991 से 1993 तक इस पद का कार्यभार संभाला था।
वीरा राणा: राज्य की दूसरी महिला मुख्य सचिव बनीं, जिन्हें नवंबर 2023 में इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
ऐतिहासिक एक्सटेंशन
मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को अब तक एक बार एक्सटेंशन मिला है। उन्हें अगस्त 2025 में रिटायर होना था, लेकिन मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी सीएस को सीधे एक साल का पूरा सेवा विस्तार दिया गया, जिसके बाद अब अगले महीने अगस्त में उनका कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है।
दो विवादित मुख्य सचिव
एसआर मोहंती: दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान, 1999-2000 में एमपी-एसआईडीसी के एमडी पद पर रहते हुए इन पर 719 करोड़ रुपए के उद्योग घोटाले में बिना गारंटी के कंपनियों को कर्ज बांटने के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में इन पर काफी समय तक जांच चली। शिवराज सरकार ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी, जो कमलनाथ सरकार के दौरान बंद कर दी गयी थी।
इकबाल सिंह बैंस: मार्च 2020 से नवंबर 2023 तक सीएस रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाने वाले बैंस विवादों में रहे। उन्हें विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान दो बार छह-छह माह का सेवा विस्तार दिया गया। पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत पर लोकायुक्त ने 500 करोड़ रुपए के घोटाले में बैंस पर केस दर्ज किया था। आईटी के छापों में जमीनों की खरीद-फरोख्त भी उजागर हुई थी।
35 मुख्य सचिव दे चुके सेवाएं
एच.एस. कामथ, आर.पी. नरोन्हा, एम.पी. श्रीवास्तव, आर.पी. नायक, आर.पी. नरोन्हा, एम.एस. चौधरी, एस.सी. वर्मा, के.एल. पसरीचा, बी.के. दुबे, जी. जगतपति, बीरबल, ब्रम्हस्वरूप, के.सी.एस. आचार्य, एम.एस. सिंह देव, आर.एन. चोपड़ा, आर.एस. खन्ना, आर.पी. कपूर, निर्मला बुच, एन.एस. सेठी, एस.सी. बेहार, के.एस. शर्मा, पी.के. मल्होत्रा, ए.वी. सिंह, बी.के. साहा, विजय सिंह, आर.सी. साहनी, अवनि वैश्य, आर. परशुराम, अन्टोनी जे.सी. डिसा, बसंत प्रताप सिंह, सुधि रंजन मोहन्ती, एम. गोपाल रेड्डी, इकबाल सिंह बैंस, वीरा राणा, अनुराग जैन।
ब्यूरोकैट्स की जुवानी
कभी मुख्यमंत्री की इच्छा कभी परिस्थितयां

मुख्य सचिव के पद पर 6 माह की सेवा विस्तार का प्रावधान अखिल भारतीय सेवा नियमों में है, जिसे मुख्यमंत्री की इच्छा और कभी कभार परिस्थियों पर दिया जाता है। प्रदेश में मुझे भी तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 6 महीने का सेवा विस्तार दिया गया था और बाद में और सेवा विस्तार देना चाहते थे, लेकिन मैंने मना कर दिया था। यही नहीं मुझसे पहले भी मुख्य सचिव पद पर सेवा विस्तार तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया है। 6 माह से ज्यादा का सेवा विस्तार भी मुख्यमंत्री की इच्छा पर निर्भर करता है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा ही सेवा विस्तार का प्रस्ताव केंद्र में भेजा जाता है, जहां से अनुमोदन के बाद ही सेवा विस्तार होता है।
आर परशुराम, पूर्व मुख्य सचिव
खास अनुभवी का सेवा विस्तार बहुत उचित

देखिए, जब चुनाव सामने हो, तो ऐसे व्यक्ति का चयन किया जाना चाहिए, जो किसी पार्टी से सहनुभूति न रखता हो। ताकि चुनाव निष्पक्ष हो सके। रही सेवा विस्तार की बात, तो पहले ये देखा जाना चाहिए की एक्टेंशन किसका हो रहा है। इसमें दो बातें है, जिसको एक खास प्रकार का अनुभव है और उस तरह के अनुभव का व्यक्ति अभी मिलना मुश्किल है। सेवा विस्तार का हमेशा मतलब होता है, कुछ लोगों को विपरीत प्रभावित करना, उसकी जगह जिसको मिल सकती थी, जिसको अभी तक उम्मीद रहती है, उसको दिक्कत होती है। सेवा विस्तार से कई सहयोगियों का नुकसान होता है। लेकिन यदि ऐसे पद का सेवा विस्तार है, जिस खास प्रकार के अनुभव की जरूरत है, और वो अनुभव वाले मिल नहीं रहे हैं। तब सेवा विस्तार बहुत उचित है।
शरद चंद्र बेहार, पूर्व मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश
राज्य के हित में स्थिर-अनुभवी का हो चयन

मुख्य सचिव जैसे सर्वोच्च पद पर एक्सटेंशन देने की प्रवृत्ति गलत है। इससे न केवल कैडर के अन्य योग्य और वरिष्ठ अफसरों का मनोबल गिरता है, बल्कि व्यवस्था में ठहराव भी आता है। राज्य की कमान किसी बाहरी को सौंपने के बजाय स्थानीय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जो राज्य की बारीकियों और जमीनी हकीकत से परिचित होता है। सरकार को ऐसे व्यक्ति का चयन करना चाहिए जिसका कार्यकाल कम से कम दो से ढाई वर्ष का हो। राज्य को सिंहस्थ जैसे महाआयोजन का प्रबंधन करना है, और उसी वर्ष विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इन दोनों कार्यों के लिए प्रशासनिक निरंतरता जरूरी है। बार-बार प्रशासनिक मुखिया बदलने से व्यवस्था के प्रबंधन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। राज्य के हित में एक स्थिर, अनुभवी का चयन किया जाना चाहिए।
दिनेश गुप्ता, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक, भोपाल
आज कानून की किताबों में "संजय नगाइच बनाम एमपी स्टेट' के नाम से लैंडमार्क जजमेंट है।
क्या अनुराग जैन की तरह दिल्ली में पदस्थ मप्र कैडर के अधिकारी यहां आएंगे या यहां पदस्थ अधिकारियों में से ही किसी की किस्मत चमकेगी। इसी पर स्टार समाचार की खास रिपोर्ट....
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