ओडिशा हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रायगड़ा परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट का यह फैसला वैवाहिक विवादों में व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम नजीर बनेगा।

कोर्ट ने खारिज की पति की याचिका, परिवार न्यायालय का फैसला बरकरार
केवल कानूनी रूप से विवाह बनाए रखने से उसकी पवित्रता सुरक्षित नहीं रहती
कटक। स्टार समाचार वेब
ओडिशा हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रायगड़ा परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट का यह फैसला वैवाहिक विवादों में व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम नजीर बनेगा। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरीश टंडन और न्यायमूर्ति चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने पति की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि विवाह केवल एक कानूनी बंधन नहीं, बल्कि पारस्परिक सम्मान, विश्वास और साझेदारी की भावना पर आधारित संबंध है। यदि इन मूल तत्वों का क्षरण हो जाए, तो केवल कागजी रूप से विवाह को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
अदालतों का काम टूट चुके संबंध को थोपना नहीं
खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालतों का दायित्व विवाह संस्था की रक्षा करना है और न्यायपालिका यथासंभव संबंधों को बचाने का प्रयास करती है। हालांकि, जब पति-पत्नी के बीच विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाए, संबंधों में लगातार कटुता बनी रहे और साथ रहने की गुंजाइश खत्म हो जाए, तब केवल औपचारिक अस्तित्व बनाए रखना न्यायसंगत नहीं है। विवाह की पवित्रता उसके कानूनी स्वरूप से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान से कायम रहती है।
2021 में हुआ था विवाह: दोनों पक्ष सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनका विवाह 20 अक्टूबर 2021 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था।
बढ़ता तनाव: शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच मतभेद गहराने लगे। वर्ष 2023 में पत्नी पति का घर छोड़कर अलग रहने लगी।
प्रताड़ना का आरोप: पत्नी ने प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए रायगड़ा परिवार न्यायालय में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की।
परिवार न्यायालय का रुख
मामले की सुनवाई के दौरान रायगड़ा परिवार न्यायालय ने साक्ष्यों और तर्कों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि दोनों के बीच वैवाहिक संबंध सामान्य स्थिति में लौटने की कोई संभावना नहीं बची है। इसके बाद 27 जनवरी 2024 को परिवार न्यायालय ने तलाक का आदेश पारित कर दिया।
हाईकोर्ट ने दी सहमति
परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तलाक के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले के सभी मानवीय व कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद परिवार न्यायालय के निष्कर्षों को सही ठहराया और पति की याचिका को खारिज कर दिया।

ओडिशा हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रायगड़ा परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट का यह फैसला वैवाहिक विवादों में व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम नजीर बनेगा।
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