देश के अधिकांश राज्यों में मानसून की विदाई का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन कुछ राज्यों में अब भी बारिश-बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इससे जन-जीवन के साथ ही यातायात व्यवस्था भी चौपट हो गई है। यही नहीं, मौत का भी आंकड़ा बढ़ गया है। प्रमुख शहर पानी से लबालब नजर आ रहे हैं।

वर्तमान समय में सबसे ज्यादा प्रभावित पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र नजर आ रहा है।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देश के अधिकांश राज्यों में मानसून की विदाई का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन कुछ राज्यों में अब भी बारिश-बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इससे जन-जीवन के साथ ही यातायात व्यवस्था भी चौपट हो गई है। यही नहीं, मौत का भी आंकड़ा बढ़ गया है। प्रमुख शहर पानी से लबालब नजर आ रहे हैं। राज्य सरकारों के अपदा प्रबंधन के तमाम दावे खोंखले सबित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा किसान प्रभावित हुए हैं। फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। वर्तमान समय में सबसे ज्यादा प्रभावित पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र नजर आ रहा है। दरअसल, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पिछले चार दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण अब तक 8 लोगों की मौत हो गई है। इनमें लातूर में तीन, बीड में दो और छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़ और धाराशिव में एक-एक लोगों की मौत बिजली गिरने, डूबने और अन्य कारणों से हुई है। मराठवाड़ा के आठ जिलों में 766 घरों को बाढ़ से नुकसान पहुंचा है। 33,010 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर लगी फसलें खराब हो गईं। बीड और धाराशिव में पांच बांध, कई सड़कें, पुल और स्कूलों को भी नुकसान पहुंचा है।

ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल के कोलकाता और आसपास के जिलों में बारिश से मरने वालों का आंकड़ा 10 पहुंच गया है। इनमें 8 मौत सिर्फ कोलकाता में हुईं। 10 में से 9 लोगों की मौत करंट लगने से हुई। कोलकाता के कई इलाके लगातार दूसरे दिन जलमग्न हैं। कोलकाता में सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह तक 251.4 मिमी बारिश हुई थी। कोलकाता में 39 साल बाद एक दिन में इतनी ज्यादा बारिश हुई थी।
कोलकाता में भारी बारिश के चलते पूरा कोलकाता के ज्यादातर इलाकों में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। 30 से ज्यादा फ्लाइट्स और कई ट्रेनें कैंसिल की गईं। स्कूल-कॉलेजों में 25 सितंबर तक छुट्टी की गई है। मूसलाधार बारिश से कई दुर्गा पूजा पंडालों और मूर्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। लोग घरों में कैद हो गए हैं। चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। कॉलेनियां तक जलमग्न हो गई हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में बाढ़ की स्थिति पर बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 17 टीमें प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू के कामों में जुटी है। धाराशिव में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित निकाल लिया गया है। प्रभावित किसानों के लिए 2,215 करोड़ के आदेश जारी किए हैं। किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश ने 30 साल के रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस मानसून सीजन में 1023 मिलीमीटर बादल बरस चुके हैं। बीते 30 साल में कभी भी इतनी भारी बारिश नहीं हुई। इससे पहले, 1995 में यानी 31 साल पहले जरूर 1029 मिलीमीटर बारिश हुई है। हालांकि, अभी हिमाचल से मानसून की वापसी नहीं हुई। ऐसे में इस मानसून सीजन में 1995 का रिकॉर्ड टूटने की संभावना है।
इधर, मध्य प्रदेश के तीन जिले- सिवनी, मंडला और बालाघाट में एक बार फिर तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक 44 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य से 19 फीसदी ज्यादा है। गुना और रायसेन में 61 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर के आखिरी दिनों में भी तेज बारिश होगी। इससे साफ जाहिर है कि मध्यप्रदेश से मानसून देरी से विदा होगा।


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