मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के रकबे को 30 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। मसाला उत्पादन में MP देश में पहले स्थान पर है। जानें उज्जैन में फ्लोरीकल्चर सेंटर और मखाना खेती की नई योजनाएं।
रीवा में बिजली विभाग की लापरवाही से शॉर्ट सर्किट से आग लगने से अमिलिया गांव में 40 बीघा गेहूं की फसल जल गई। किसानों को भारी नुकसान हुआ और मुआवजे की मांग तेज हो गई।
सतना जिले में तेज हवा और बारिश से गर्मी से राहत मिली, लेकिन गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा। खड़ी और कटी फसल प्रभावित, किसानों की चिंता बढ़ी, मौसम में उतार-चढ़ाव जारी।
वैलेंटाइन डे मनाने बांधवगढ़ से मैहर पहुंचा हाथी का जोड़ा। बांधवगढ़ से भागकर मैहर पहुंचे हाथी जोड़े ने रात भर वन अमले को छकाया, खेतों में नुकसान, ग्रामीणों में दहशत।
सतना जिले के रामपुर बघेलान क्षेत्र में महान ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी पर किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा और खड़ी फसल नष्ट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर जान-माल की सुरक्षा और न्याय की मांग की है।
सतना और मैहर जिलों में रबी फसलों के बीमा आवेदन बीते साल की तुलना में करीब 50 प्रतिशत कम दर्ज किए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि नजदीक होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान बीमा सुरक्षा से बाहर हैं, जिससे भविष्य के जोखिम बढ़ सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट बैठक में बड़वाह-धामनोद 4-लेन मार्ग, आंगनवाड़ी पोषण 2.0 और जबलपुर विधि विश्वविद्यालय के लिए करोड़ों की राशि स्वीकृत की गई। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
सतना और मैहर की सब्जी मंडियों में नए आलू की भरमार है, लेकिन यह असल में प्री-मेच्योर फसल है जो उत्तर प्रदेश से लाई जा रही है। स्वाद में ठीक होने के बावजूद यह अपेक्षाकृत महंगा बिक रहा है, जबकि स्थानीय किसानों की फसल अभी बाजार में नहीं आई है।
कोठी के शारदापुरी कॉलोनी में करोड़ों की लागत से बनी कृषि उपज मंडी वर्षों से बंद पड़ी है। रखरखाव के अभाव, अधिकारियों की निष्क्रियता और खरीदी संचालन न होने से मंडी श्मशान जैसी वीरान हो चुकी है। किसान अपनी फसल दूर बेचने को मजबूर हैं और सही दाम से भी वंचित हो रहे हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब दो तरह के नुकसान भी कवर किए जाएंगे, जिनकी किसान लंबे समय से मांग कर रहे थे।






















