ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में अपनी गहरी पैठ रखने वाले रामनिवास रावत ने हाल ही में कांग्रेस का दशकों पुराना साथ छोड़ भाजपा का दामन थामकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी।

विशेष साक्षात्कार: राम निवास रावत
ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में अपनी गहरी पैठ रखने वाले रामनिवास रावत ने हाल ही में कांग्रेस का दशकों पुराना साथ छोड़ भाजपा का दामन थामकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी। स्टार समाचार के साथ एक विशेष बातचीत में रावत ने अपने राजनीतिक गुरु स्व. माधवराव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया से वैचारिक मतभेदों, कांग्रेस की 'कबीलाई संस्कृति' और भाजपा में अपने भविष्य को लेकर बेबाकी से जवाब दिए।
सवाल: रावतजी, आप एक कृषक परिवार से आते हैं और उच्च शिक्षित भी हैं। राजनीति की तरफ आपका झुकाव कैसे हुआ?
जवाब: मेरा क्षेत्र काफी पिछड़ा हुआ था, स्टूडेंट लाइफ से ही मेरी सोच थी कि लोगों की सेवा करें और क्षेत्र का विकास करें। मेरा पूरा क्षेत्र असिंचित था, तो प्रारंभ से ही मेरे मन में भाव था कि क्षेत्र को सिंचित बनाने के लिए प्रयास करूं। सेवा और क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के संकल्प के साथ ही मैं राजनीति में आया।
सवाल: स्टूडेंट लीडरशिप में लाने का श्रेय किसको देते हैं? कौन है आपका राजनीतिक गुरु, जो आपको यहाँ तक लाए?
जवाब: मैं खुद स्टूडेंट पॉलिटिक्स में आया, उसके बाद मंडी का चुनाव लड़ा। इसके बाद महाराज माधवराव सिंधिया, जो आज हमारे बीच नहीं हैं (मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं), वही मुझे सक्रिय राजनीति में लाए। उन्होंने साल 1990 में मुझे उस समय टिकट दिलाया जब ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस की केवल पांच सीटें हुआ करती थी। उस समय विधायक बनने के बाद भी मैं जुडिशरी की परीक्षा दे रहा था और मेरा चयन भी हो गया था। मैं विधायकी छोड़ना चाहता था, लेकिन सिंधिया जी ने मना कर दिया और कहा कि तुम राजनीति में रहकर क्षेत्र के लिए ज्यादा काम कर सकोगे।
सवाल: दिग्विजय सिंह सरकार में आप मंत्री रहे। आपने कौन से ऐसे विकास कार्य किए जिन्हें आप अपनी उपलब्धि मानते हैं?
जवाब: सिंचाई के लिए बारदा बांध बनवाया और पूरे क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने के लिए लगातार संघर्ष किया। विजयपुर एक पिछड़ा क्षेत्र था, वहाँ बहुत काम किए। मेरी बड़ी इच्छा वहाँ बड़ी इंडस्ट्री स्थापित करने की थी, जो मैं नहीं कर सका, लेकिन आज भी प्रयासरत हूँ ताकि बेरोजगारी मिटे। ट्राइबलों के लिए मैं लड़ा, विधायक रहते हुए बच्चों की बीमारी और कुपोषण के खिलाफ 14 दिन भूख हड़ताल पर बैठा। मंत्री के रूप में मेरा सबसे बड़ा अचीवमेंट पंचायत मंत्री रहते हुए विधानसभा में विधेयक पारित कराना और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराना रहा।
सवाल: साल 2020 में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कमलनाथ सरकार गिरी, तब आप सिंधिया परिवार के नजदीकी होने के बावजूद भाजपा में नहीं गए। क्या वजह थी?
जवाब: उस समय भाजपा में नहीं आने का कारण यह था कि सिंधिया जी ने मुझसे कोई चर्चा नहीं की थी और मेरी इच्छा कांग्रेस में ही रहने की थी। मैं सोच रहा था कि वहाँ अपना वजूद बना पाऊंगा। लेकिन कांग्रेस में 'कबीलाई स्थिति' है; वहाँ कबीले का सरदार ही आपकी वकालत करता है, तभी आपको पद मिलता है। मैं 2003 से 2018 तक लगातार विधायक रहा, विधानसभा चलाने में मेरी अहम भूमिका रही, लेकिन जब भी संगठन में पद की बात आती थी, मुझे पीछे कर दिया जाता था। राहुल जी से सीधी बात हो नहीं पाती थी। जब कांग्रेस की स्थिति खराब थी तब मैं नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ा, लेकिन पिछले पार्लियामेंट चुनाव में जब मेरी जीत तय थी, मेरा टिकट काटकर बाहरी व्यक्ति को दे दिया गया। इन हालातों की वजह से मैंने कांग्रेस छोड़ना उचित समझा।
सवाल: संघ की राष्ट्रवाद की सोच को लेकर आपका क्या मानना है?
जवाब: देखिए, राष्ट्रीयता और राष्ट्रभाव तो चाहे व्यक्ति कांग्रेस में हो या भाजपा में, हर नागरिक के मन में होना चाहिए। राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं होता। मैं छात्र जीवन में भी कुछ समय के लिए आर.एस.एस. से जुड़ा रहा था।
सवाल: आपने कहा कि राहुल गांधी तक बात नहीं पहुँच पाती थी। क्या समय माँगने पर भी नहीं मिलता था?
जवाब: स्थिति लगभग यही समझिए। हालांकि वह एक अच्छे व्यक्ति हैं, मैं उनका स्नेह करता हूँ, लेकिन वह 'पॉलिटिकल' नहीं हैं।
सवाल: 2024 में भाजपा में आने के पीछे किसका मुख्य योगदान रहा?
जवाब: इसे आप सम्मिलित योगदान समझिए, हालांकि मुख्य भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की रही। इसमें नरेंद्र सिंह तोमर जी ने भी साथ दिया।
सवाल: आप मंत्री रहते हुए उपचुनाव हार गए, इसकी क्या वजह रही?
जवाब: इसके पीछे समय और भाग्य के अलावा कोई और वजह नहीं थी। मेरा समय ठीक नहीं था और शायद भाग्य में उस समय वह जीत नहीं थी।
सवाल: इसे भाग्य कहें या कानूनी विशेषज्ञता? आपके प्रतिद्वंद्वी मुकेश मल्होत्रा की तकनीकी चूक (हलफनामे में जानकारी छिपाना) कैसे पकड़ में आई?
जवाब: इसमें मेरे मित्रों और शुभचिंतकों की सजगता का बड़ा हाथ है। चुनाव आयोग ने हलफनामे की व्यवस्था बहुत सख्त की है। यदि कोई उम्मीदवार आपराधिक रिकॉर्ड या संपत्ति की जानकारी छिपाता है, तो उसे 'भ्रष्ट आचरण' मानकर निर्वाचन रद्द किया जा सकता है। हमारे साथियों ने इसी तकनीकी पहलू को पकड़ा, जो अब न्यायालय के अधीन है।
सवाल: विजयपुर आदिवासी बहुल सीट है, फिर भी आप वहाँ लगातार जीतते रहे। आपका नेटवर्क कैसे काम करता है?
जवाब: लोगों के बीच रहना और उनसे निरंतर संपर्क बनाए रखना। मेरे दरवाजे जनता के लिए 24 घंटे खुले रहते हैं, मैं सदैव उनके काम के लिए तत्पर रहता हूँ।
सवाल: आदिवासियों के जीवन और शिक्षा में अभी भी क्या कमियाँ और गुंजाइश दिखती है?
जवाब: सुधार हो रहा है, लेकिन प्रशासन की कमी यह है कि आदिवासियों को जो सहायता मिलती है, उसे वे मौज-मस्ती का साधन मान लेते हैं। हम उन्हें यह समझाने में विफल रहे कि यह राशि उनके जीवन स्तर को उठाने के लिए है। भ्रष्टाचार भी एक बड़ी समस्या है।
सवाल: चर्चा है कि 2028 के चुनाव में आप अपनी सीट बदलने जा रहे हैं?
जवाब: बिल्कुल, निश्चित रूप से। मैं चाहता हूँ कि पार्टी के हित में उस आदिवासी सीट से किसी आदिवासी को मौका मिले, जिससे आसपास की कई अन्य सीटें भी प्रभावित हों। हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से कुछ नहीं कहा गया है।
सवाल: ज्योतिरादित्य सिंधिया से अब आपके संबंध कैसे हैं?
जवाब: देखिए, उन्होंने मुझे व्यक्तिगत नुकसान बहुत पहुँचाया, लेकिन अब सब पुरानी बातें हैं। अब हम आमने-सामने मिलते हैं तो नमस्कार होता है। वह हमारे नेता हैं और केंद्र में मंत्री हैं, हम उनका सम्मान करते हैं।
सवाल: माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया की कार्यशैली में क्या अंतर देखते हैं?
जवाब: हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है। माधवराव सिंधिया जी 'देवतुल्य' व्यक्ति थे। उनका हृदय निष्कपट था और उन्होंने कभी झूठ नहीं बोला, कम से कम मुझसे तो कभी नहीं। ज्योतिरादित्य जी भी बहुत मेहनत करते हैं और जनता से संपर्क बनाए रखते हैं।
सवाल: सुप्रीम कोर्ट के मामले को लेकर आप कितने आशावान हैं?
जवाब: मैं हमेशा पॉजिटिव सोचता हूँ। हम पूरी तरह आशावान हैं कि जीत हमारी ही होगी।
सवाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव में आपको क्या विशेष नजर आता है?
जवाब: वह सच और स्पष्ट बोलने वाले व्यक्ति हैं। वह झूठ नहीं बोलते और जो घोषणा करते हैं, उसका इंप्लीमेंटेशन सुनिश्चित करते हैं। वह कृषि और उद्योगों के विकास के लिए अच्छा विजन लेकर काम कर रहे हैं।
सवाल: क्या आप इसी साल पुनः मंत्री बनने जा रहे हैं?
जवाब: मैं भविष्य की ज्यादा नहीं सोचता। अभी मैं विधायक भी नहीं हूँ। फैसला आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। मैं पदों के पीछे नहीं दौड़ता।
सवाल: 2028 में ग्वालियर-चंबल की क्या स्थिति रहेगी?
जवाब: भाजपा बेहद मजबूत और अच्छी स्थिति में आएगी।
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किशोर कल्पीवार, साक्षात्कार, स्टार विशेष
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