AIIMS भोपाल अब एलोपैथी और होम्योपैथी के संगम (Integrated Medicine) से सिकल सेल, किडनी स्टोन और डायबिटिक फुट जैसी बीमारियों का स्थायी इलाज खोज रहा है। जानें एम्स की इस नई शोध पहल के बारे में।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भोपाल अब 'इंटीग्रेटेड मेडिसिन' (समेकित चिकित्सा) पर विशेष ध्यान दे रहा है। विश्व होम्योपैथी दिवस के मौके पर संस्थान ने स्पष्ट किया कि मरीजों को बेहतर और स्थायी स्वास्थ्य लाभ देने के लिए अब आधुनिक एलोपैथी के साथ होम्योपैथी का समन्वय किया जाएगा। इस अनूठी पहल का उद्देश्य सिकल सेल, किडनी स्टोन और एलर्जिक राइनाइटिस जैसी बीमारियों का जड़ से समाधान खोजना है।
एम्स की होम्योपैथी इकाई ने ईएनटी और जनरल सर्जरी विभागों के साथ मिलकर एलर्जिक राइनाइटिस और एनल फिशर पर गहन अध्ययन किया है, जिसके परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं। सफलता को देखते हुए अब संस्थान निम्नलिखित बीमारियों पर भी मल्टी-डिपार्टमेंटल रिसर्च शुरू करने जा रहा है:
सिकल सेल रोग
टिनिटस (कान में निरंतर आवाज आना)
फैटी लिवर
डायबिटिक फुट अल्सर
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. माधवानंद कर के अनुसार, संस्थान साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) चिकित्सा पद्धति को प्राथमिकता दे रहा है। इसके लिए जल्द ही केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के साथ एक एमओयू (MoU) साइन किया जाएगा। इससे विशेषकर सिकल सेल जैसी जटिल बीमारियों के शोध में तेजी आएगी।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शाश्वती नेमा ने बताया कि दुनिया भर में बढ़ते 'एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस' (दवाओं का बेअसर होना) की समस्या से निपटने में होम्योपैथी मददगार साबित हो सकती है। डायबिटिक फुट इन्फेक्शन जैसे मामलों में होम्योपैथी के उपयोग से एंटीबायोटिक दवाओं पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अंजन कुमार साहू के अनुसार, एलोपैथी और होम्योपैथी के संयुक्त उपयोग से एलर्जी के मरीजों को लंबे समय तक आराम मिल रहा है। इसके अलावा, किडनी स्टोन और बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन (UTI) के उपचार में भी होम्योपैथी को प्रभावी पाया गया है।

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